(संदीप गढ़वाली)
वींन ब्वाल मि फेसबुक मा लाइब जाणू छौ तुम मुरलि बजावा ।
मिन ब्वाल लोगुन सूणि दीण
बल सुणण द्या ।
मिन फिर ब्वाल लोग ऐ जाला त ?
बल आंण द्या ।
मिन लम्बी सांस ल्हे अर क्वींऽ प्वींऽ कै ।
वींन ब्वाल अक्वै बजाओ ।
मिन ब्वाल औ जरा सुर त पखड़ण दे ।
मिन फिर लम्बी सांस ल्हे अर क्वीं ऽ प्वी ऽ ।
वींन ब्वाल – तुमुन अक्वै बजाणै कि ना ?
मिन ब्वाल यार मिथै जन आंद मिन उनि त बजांण ।
वींन ब्वाल ल्यावो मि बतान्दु कन बजन्दिन !
वीन बतै च कि इन बजावा ।
तुमरा सौं गिच्चु कळ्यूंच, गळवडा फूलि गेनि, घुण्डा क्वीना लिछे गीं कमर मा पिड़ा च हूंणी ।
मिन सांसु कैकि पूछि – यार त्वै पता च कि मिथै बंसुळि बजाण नि आंदि । तेरि माया मा त्यारु मान रखणौ खुणै मिन फ्वीऽ प्वां क्वींऽ बजै बि द्याई त गनिमत समझ । पर त्वैन मी थें मार क्योच ?
व ब्वनी मिन समाज थें संदेश द्याई कि जब जै चीजौ ज्ञान निह्वा त फेसबुक मा हौर्यू टैम खराब कनौ खुणै लाइब नि आंणू नथर इनि कुटेला ।
मिन ब्वाल यार लाईव तु ग्ये कि मि ? बल मि ग्यो पर म्यार मकसद ब्यूज पांणू नीच । मि सिर्फ लोगु थें बताणु छाई कि इन इना बि लाइब ऐ जांणा छन ।
मिन ब्वाल यार पर त्वै क्य मिलि अपणी आदिम कूटि कन ?
बल समाज मा बदलाव ल्याण त सबसे पैली शुरुआत अपणी भितर बटि करण प्वड़लि ।
