देहरादून। हमरा उत्तराखण्ड मा ब्यो खुण नौन्यु कु नि मिलुणु एक जटिल समस्या ह्वे ग्या जै से बगैर ब्यो का लगभग 30,000 से ज्यादा नौना छन जौंकि उमर 35 से 40 साल से उबु च अर सि अजूँ तक सारा बैठ्याँ छन जबकि ब्यो कि उमर त कबि निकळ ग्या वेका अलाव कुछ त पैली नौनी भौत कम छन जु छै बि छन उँका भौ बड्यां छन सि सरकरी नौकर, अकेला नौनू, अर दगड़म अच्छु मकान चाणी छन वेका पैथर कै कारण छन वाँ में से एक च भौत ज्यादा पढ़ी लिखी छन नौकरी कनी छन अर एश आराम कि जीण चाणी, छन इनी नौन्यूँ कु बि कखी नौनु नि मिलणु आधुनिकता की दौड़ मा क्की के से पैथर नि रैण चाणु अर ये चक्कर मा कै नौन्यूँ कु ब्यो नि हुणु जिन्दगी
अब स्वचण वळी बात या च कि बे बुबा का गिच्चा बंद ह्वे गेन अर औलाद निर्णय सुनानी छन बे बुबा अब इतगा लाचार ह्वे गेन कि उ बवना चन अपुदु मन
पसन्दौ खुजे ले. अब उन त खुद खुजे सकणा छन न ब्ये बुबै मनणा छन अगर कैकु मुश्किल से ब्यो हुणु बिचत कुछ टैम बाद तलाक ह्वे जाणु क्की नौनी त अफ्वी भाग जाणी छन वेबारि उ इन नि स्वचणी छन कि कतगा पडयूँ लिख्यूँ च नौकरि सरकारि छैच की नी सैरम कुड़ी छैच कि नी के जात्या छन कखा छन न उँ ब्ये बुबा फिकर न समाजै और ब्वनी छन ब्यो खुण अच्छु नौनु नि मिलणु त उ निरबै ब्वाय फ्रेंड कन क्के मिलणू य बात गौला नि उतरणी दूसरी बात जु नौनी हरेक बात से सुन्दर नौनू खुज्याणी छन कि हर एक चीज मा नौनु फिट हुण चैन्द वींल कबि अपड़ा अबगुण बि दिखिन ? केवल किताब रटण से क्की बडु आदिम नि बण जान्द वेका अन्दर संस्कार बि हुण चैन्द जै से जीवन और समाज द्वी चलदिन सर्वगुण सम्पन्न त केवल भगवान हुन्द मनखि मत कै अवगुण हुंदिन पर उ अफू थै नि दिखेन्दा अब चिन्ता कु विषय यो च कि जौंका
ब्यो नि हे साका उँकु त एथरौ बंश अर जीवन द्वी खतम के जंदिन अगर इनि हाल राला त देव भूमि उताराखंड त खालि ह्वे जालि तब भैरा का वख राज कारला पैली वख बटै लोग पलायन कै गेन अर अब या नै आफत और ह्वे ग्या ब्यो द्वी आत्मों कु पवित्र मिलन ही नी बलकि बुढ़ापा मा एक दुसरौ सारू बि हुन्द अर जीवन बि इनि कटिंद त भारे उत्तराखण्ड बचाण त बच्चों का ब्यो तै समय सै कै द्यावा याँका पैथर एक बडु कारण बि बताण चाणु छौ अगर नौन्यु कु ब्यो 21 साल तक ह्वे जा त इनी जाँद कारण कि व बचपन की ही उमर हुँद नौनी अपड़ा ससुराल मा जल्दी घुलमिल अर सिनक्कलि बच्चा हे जावन त गृहस्थी पटिडी फर चलण बैठ जाँद अब अगर कैकु ब्यो 40 वर्ष मा ह्वालू त अफ्वी लगै ल्या जैबरि उँकि औलाद 10 वीं कक्षा मां ह्वेली तैबरि थै उँ फर बुढापा ऐ जाँद तब रै जांद भगम चिन्ता कि कब ऐकि नौकरि लगली अर कब ब्यो हृलू ?
