मायै लगूली जमै ज्वा मायान रिझै भिझै
अजाणदां मायान लंत लोभम लुभै लुभै
जाणी गूंणी मि चुपचाप बौगा सरदि गयूं माया बड़ी दुती होंद छौ दिदाँ जण्यूं सुण्यूं
करम्वा अधीन होदन फल जोग संजोगा
मृत्यू लोक मा ऐ भोगेंदा सभी भोग भागा
माया बंधनू मा फंस्या मनखी छीं सौभ यख हुण्त्यला खुसहाल सुखीला जोग भागा यख
कैन बोली माया कभि कै सणि हंसौंदी नी भाग का टोणा टुटगा छिं कैन बात जाणी नी
जीवनौ सार क्या अजाणन गूणी नी साक्यू घंघतोल मा फंस्यूं रौंअनाड़पनम उलझ्यूं रैग्यों
होणी खाणी तृष्णा अपणा भागै भताग होंद
गेड़ बांधी लयीं ज्वा दगड़ा वीत फलद फुलद
होस संम्भालि मिन दगड़यों जब बिटी जीणू छौं मुंथा दरयो देखीक घुट घुटी
या लोली माया दिदाँ छोड़ी छोड़ेद भी नीच
मनख्यालू मिजाज अधितु धितयेंदु भी नीच
माया का समोदर मा गोता लगौंदु गयूं जथा रमदि गयूं उथा मायाम फंसदी गयूं
निहोण्या कुटक छयी मेरी ज्वा कुनेथ्या अंश बंसै टक छयी या मुंथा की वृथा
माया अधीन च गढदेशी तेरी जीवन कथा लिगलैली जथा लिगलौंदी भिंगरेली तु जथा
होणी खाणी सौभ भाग की बात लेख चैंद तेरू आशीस श्री राम तेरी कृपा गढदेशी तैं चैंद ।।
