रंत रैबार व्यूरो…..
देहरादून। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली का तत्ववाधान म मंच का संयोजक दिनेश ध्यानी व युवा कवि अशीष सुंदरियाल द्वारा उत्तराखंड की प्रमुख आंचलिक भाषाओं- गढ़वाली-कुमाउंनी का संरक्षण-संवर्धन का संदर्भ म उत्तराखण्ड का भाषा मंत्री खजानदास तैं वोंका रेसकोर्स देहरादून आवास म एक ज्ञापन सौंपी जैम बोलि कि गढ़वाली, कुमाउनी भाषा वर्षों पुराणी भाषा छन। यूंमा हर विधा म साहित्य सृजन हूणू च। यी भाषा राजकाज की भाषा बि छै ।
उत्तराखण्ड राज्य बणना का बाद यूँ भाषाओं पर ध्यान दिए जाण चैन्दु छौ पर इतगा साल बाद बि यि भाषा उचित मान-सम्मान नि पै साकी। ये का पैथर कखि न
कखि राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी व हमरा साहित्य संसार का लोगों की लापरवाही वि जिम्मेदार छन ।
भाषा मंत्री तैं दियेगे ज्ञापन म गढ़वाली एवं कुमाउंनी भाषाओं तै संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर राज्य विधानसभा बिटिन चर्चा का बाद एक प्रस्ताव केंद्र सरकार तैं भेजे जाण चंद। दगड़ि जनु उत्तराखंड म हिंदी, पंजाबी, उर्दू एवं संस्कृत अकादमी छन इन्नी गढ़वाली एवं कुमाउंनी अकादमी को गठन किए जाण चंद। येका अलावा जनुकि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 345 का अनुसार राज्य सरकार कै वि भाषा तैं राज्य म मान्यता दे सकदा बेशक व भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची म शामिल न हो। ता मंच की पुरजोर मांग च कि उत्तराखण्ड म गढ़वाली एवं कुमाउंनी भाषाओं तैं राज्यस्तर पर मान्यता दिए जाण चेंद। नाकि प्रदेश म गढ़वाली कुमाऊनी भाषाओं तैं पाठ्यक्रम शामिल करे जै सकु । उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी न बतै कि उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली लगातार गढ़वाली व कुमाऊनी भाषाओं तैं संविधान की आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर लगातार काम करणु च । दगड़ी दिल्ली एनसीआर समेत उत्तराखण्ड म व विदेश इंग्लैंड जना देशों म ऑनलाइन भाषा शिक्षण कक्षाओं कु लगातार संचालन करणू च। इलै अब बगत ऐगे कि उत्तराखण्ड सरकार व भारत सरकार हमरी मांगों परैं ध्यान देवन। ये का खातिर केंद्र सरकार तैं कै ज्ञापन दिए गे छन। दगड़ी जंतर-मंतर म धरना बि दिए गे छौ पर सरकार हमारी मांगों परैं ध्यान नई देणी छन। ता अगनै हम लोगों तैं भाषा संघर्ष हौरि तेज कन पोडलु। यांका खातिर सब्बि लिख्वार, भाषा प्रेमी व समाज का हर वर्ग कु समर्थन जरुरी च। हालाकिं उत्तराखण्ड सरकार का भाषा मंत्री खजानदास ला बोलि कि सरकार उक्त मांगों पर गंभीरता से विचार कारलि। ये का अलावा प्रदेश म गढ़वाली, कुमाउनी अकादमी गठन का खातिर बि तैयार च। यांका खातिर सरकार लगातार सकारात्मक रूप से काम करणी च। अशीष सुंदरियाल ला चिट्ठी पत्री वार्षिक पत्रिका (2025 अंक मंत्री जी तैं भेंट कैरि। दगड़ी दिनेश ध्यानी ला बि अपरी सद्य प्रकाशित गढ़वाली कथा संग्रह बगत भी कैरी द्वी पोथ्यों देखिकि मंत्री जी ला बोलि कि हमारी भाषाओं म अपार संभावना छन । आप जना लोगों का प्रयास से ही यनि उत्कृष्ट पुस्तकों कु प्रकाशन हूणू च । भविष्य म सरकार हमारी लोक-भाषाओं अगनै बढिकी काम कारलि। युवा कवि आशीष सुंदरियाल ला बोलि कि हम लोग अब लगातार हमरी भाषाओं का खातिर सरकारों से संपर्क करला व वो हर काम करला जां से हमरि उक्त मांग पूरी होलि।
