रंत रैबार ब्यूरो
चमोली । मा नंदा की बड़ी लोकजात यात्रा सिद्धपीठ करुड बटि कैलाश वास्ता रखना है। करुड मंदिर समिति का अध्यक्ष सुखबीर रौतेला न बतै कि नन्दा सिद्धपीठ करुड बटि मा नन्दा की तीनों डोलियां कैलाश वास्ता रवाना ह्वेगिन। ज्वां विभिन्न पड़ावां सि होंद य यात्रा 12 सितम्बर तैं रामणी पौछली, यख अलग-अलग देव डोलियों अर छंतोलियों कु मिलन होलु। वेका बाद यात्रा आला, सितेल अर कनॉल होंद अगनै बढ़ली, वून बतै कि 15 सितम्बर तें बाण स्थित लाटू मंदिर मा नंदा की डोली कु प्रवास होलु। बाण बटि गैरोली पाल होंद 18 सितंबर तें उत्सव डोली वेदनी बुग्याल पौछली जख सप्तमी की पूजा अर्चना होलि।शुरू
19 सिंतबर तै यात्रा बगुवावासा, पातरनचैणियां कैलवा, विनायक, रूपकुंड अर ज्यूराजली होंद शिलास्पडु पौंछली, 20 सितंबर तें हेमकुंड मा पूजा का बाद चैगिग्य खाडू की कैलाश विदाई होलि।
धामिक रीति-रिवाजों का अनुसार पूजा अर्चना का बाद नन्दा भक्त जामुनजली का रात्रि प्रवास करला, वापसी का दौरान मा नंदा की उत्सव डोलि 30 सितम्बर तैं सुतोल, पेरी, सितेल गुलाडी, नारंगी अर फरखेत होंद कुरुड मंदिर पौछली यां का दगड़ा ही बड़ी लोकजात यात्रा कु समापन होलु।
बतै जाणु छ कि अगला साल एतिहासिक नंदा राजजात. कु आयोजन होलु ज्वा चमोली जिला का नौटी गौं सि होलि। य यात्रा 7 वीं शताब्दी मा
गढ़वाल का राजा शलिपाल न य परम्परा शुरू करि है।
चूंकि राजधानी चांदपुर गढ़ी सि मा नन्दा तें हर 12वां वर्ष मैत बटि कैलाश भेजण परम्परा शुरू ह्वे हैं बाद मा राजा कनकपाल न ई यात्रा तैं भव्य स्वरूप दे।
मान्यता का अनुसार नन्दा का मैती नंदा तैं कैलाश विदा कन्न जांदन’ अर फिर वापसी लोटि आंदन। बतै जांद की देवी नन्दा हर वारह साल मा अपणा मैत आंद या परम्परा पौराणिक काल बटि चलि आडी छ।
देवभूमि उत्तराखण्ड की नन्दा राजजात यात्रा धार्मिक यात्रा का दगड़ा दगड़ी ऐतिहासिक धरोहर बि छ। जै तै विश्व की सबसि लंबी पैदल
धार्मिक यात्रों मा एक मणै जांद नन्दा राजजात यात्रा गढ़वाल अर कुमाऊं क्षेत्रों मा हौंद जु सांस्कृतिक अर आध्यात्मिक तैं दिखांद। यात्रा मा 19 दिन कठिन बुग्यालों की चढे पार कन्न पड़द।
करीब 260 किलोमीटर पैदल दूरी नपण पड़द।। ईं पवित्र यात्रा मा स्थानीय अर देश-विदेश का पर्यटक शामिल होंदन। नंदादेवी राजजात यात्रा तें हिमालय कु कुंभ बि बोले जांद।
