(दीनदयाल बन्दूणी)
पैलि गुरप-तब संगठन-खड़ा करदवां हम । हित नि सध्यो त – खड़ौं-मड़ा-करदवां हम ।।
संस्था बीच- तब गुट बणै- अप्णि हि चलै, जब नि बरबसै त – द्वी धड़ा- करदवां हम ।।
उसाम-दाम-दंड-भेद कैरि बि- जो नि मानु, तब डरांणौ-आँखा बड़-बड़ा-करदवां हम ।।
3भै-बंदि- नाता-रिस्तादरिम – झुकण पोड़द, नेतागिरिम रिस्ता – गड़-गड़ा- करदवां हम ।।
खटुलिम घुंजा घालि- हमरि जिंदगि बीत, तब किलै- खुटा छड़-छड़ा- करदवां हम ।।
भलि बात सुणंण दौं ठग टोल बणिं जंद्वां, बुरैं सुणंणौं-कंदूण तड़-तड़ा-करदवां हम ।।
दीन आज टक लगै-सबि स्वाचा-विचारा, तब किलै-अप्ण गिचा-कड़ा करदवां हम ।।
