सरोज शर्मा (भोजन मूल शोधार्थी)
अचार देशभर मा विभिन्न नामो से जणैं जांद, कन्नड मा उपपिनकायी, तेलगू मा पचादी, तमिल मा उरकाई, मलयालम मा उप्पिलुथू, मराठी मा लोंचा, गुजराती मा अथानू और हिन्दी मा अचार-एक पारंपरिक रूप मा हजारों-हजार वर्ष पिछनै हट जांद, न्यूयॉर्क फूड संग्रहालयो क अचार इतिहास क मुताबिक भारत का मूल निवासी पैल बार टिग्रीस घाटी मा 230बीसि मा उठये ग्या।
भारतीय खाद्य ए हिस्टोरिकल डिक्शनरी ऑफ इंडियन फूड मा इतिहासकार केटी आचाया न नोट कार कि अचार बिना खाण पकाण की श्रेणी मा आंद, हालांकि आजकल भौत सा अचार मा आग कु प्रयोग हूंद, भारत मा अचार कु एक समृद्ध विरासत च, इतिहासकार क बोलण च कि गुरूलिंग देसिका क लिंगापुराना मा पचास प्रकार का अचार कु उल्लेख मिलद, भारत का अचार मूल तीन प्रकार छन सिरका मा, नमक मा, और तेल मा संरक्षित, भारत मा तेल अचार म इस्तेमाल किये जाण वल लोकप्रिय माध्यम च, यू मसलादार भोजन कि आवश्यकता पूरी करद,यात्रा मा भि आदर्श मने जांद।
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अचार सदियों भटिक हमर भोजन कु हिस्सा च, अचार कु चटपटी स्वाद सबयूं थैं पसंद आंद, ये क बिन थालि अधूरि लगद,
न्यूयार्क खाद्य संग्रहालयों म पिकल ( अचार) हिस्ट्री क अनुसार 2030 ईसा पूर्व मोसोपोटामिया क टाई गिर्स घाटि क लोग खीरा कु अचार कु उपयोग करदा छाई, समय क साथ साथ भोजन थैं ज्यादा समय तक संरक्षित और इनै उनै लिजांण म सौंगू हुणक खातिर प्रसिद्ध हूण लगी, धीरे धीरे ये क लाभों कि भि खोज हूण लगि, 350 ईसा पूर्व सुप्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तू न भी तारीफ कार, रोमन सम्राट जुलियास-सीसर(100-44 ईसा पूर्व) भी अचार क बहुत शौकीन छाया,वै समय मनै जांद छाई अचार ल मानसिक और शारीरिक शक्ति बड़द
2400 B.c मा भि अचार बणयै जांद छाई, यखक मूल निवासी खाद्य पदार्थ सुरक्षित रखण वास्ते तेल और लूण म डुबैक रखदा छा जन यात्रा क दौरान खाद्य पदार्थ कि कमी न ह्वा
अचार शब्द फारसी भाषा से आई, फारसी म और सिरका से संरक्षित भोजन कु अचार बोले जांद, औपनिवेशिक काल म अचार क जिक्र एक किताब मा मिल द García da Orta नामक किताब म मिलद जै म काजुओं कु स्टोर कनकु उपाय लिखयूं च जै थैं उ अचार बोल्दा छा,
बोलदा छन उत्तर पंजाब म अचार गोश्त विकसित ह्वाई
हैदराबाद लोगु क भी दावा च हैदराबाद बटिक अचार गोश्त बणाण कि शुरुआत ह्वाई इतिहासकार कन्निघम क भि यि मनण च हैदराबाद बटिक शुरुआत ह्वाई।
हरी सब्जी से लेकर फल आदि सबयू क अचार बणये जांद, ये म शामिल लूण तेल मसला भरपूर स्वाद दिंदिन, भोजन भी सवदि ह्वै जांद
