जनप्रिय लेखिका अनिता नैथानी ढौंडियाल(कोटद्वार )
गणै जाव त रामैण तीन सौ से एक हजार तक कै रुपौं म मिल जाव। यूं मदि संस्कृति म रची वाल्मीकि रामैण ( आर्ष रामायण) सबसे पुरणी मनै जांद। साहित्यिक शोध क क्षेत्र म भगवान राम क बारा म आधिकारिक तौर पर जंणणूं मूल स्रोत महर्षि वाल्मीकि रचित रामैण हि च।ये गौरव ग्रंथ क कारण हि वाल्मीकि दुनिया क आदि कवि मनै जंदन। श्री राम कथा केवल वाल्मीकि रामैण तक हि सीमित नी च बल्कि मुनि व्यास रचित महाभारत म भि ‘ रामोपाख्यान’ क रुपम आरण्यकपर्व ( वन पर्व) म भि य कथा वर्णित च।यांका अलावा ‘ द्रोण – पर्व’ अर ‘ शान्तिपर्व ‘ म भि रामकथा क सन्दर्भ उपलब्ध छन। बौद्ध परंपरा मा श्री राम से सम्बंधित दशरथ जातक,अनामक जातक अर दशरथ कथानक नौ कि तीन जातक कथा मिल जंदन।रामैण से जरा अलग होण पर भि इ ग्रंथ इतिहास क स्वर्णिम पन्ना छन।जैन साहित्य म राम कथा क कै ग्रंथ लिखे ग्यनी,जामा – विमलसूरि कृत’ पउमचरियं’ ( प्राकृत) , आचार्य रविषेण कृत ‘ पद्म पुराण’ ( संस्कृत) ,स्वयंभू कृत’ पउमचरिउ ‘ ( अपभ्रंश) , रामचंद्र चरित्र पुराण अर गुणभद्र कृत उत्तरपुराण ( संस्कृत) । जैन परम्परा क अनुसार राम कु मूल नौ पद्म छौ।
परमार भोज न भि चंपु रामैण कि रचना कार।राम कथा हौर भि कै भारतीय भाषाओं म भि लिखे गी। हिंदी म कम से कम ११, मराठी म ८, बांग्ला म २५, तमिलम १२, तेलगू म १२, अर उड़िया म६ रामैण मिलदीं। हिन्दी म लिखीं गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस कु उत्तर भारत म विशेष स्थान च। यांका अलावा भि संस्कृत , गुजराती, मलयालम, कन्नड़, असमिया, उर्दू, अरबी , फारसी कै भाषाओं म राम कथा लिखै ग्या। महाकवि कालिदास,भास, भट्ट,प्रवरसेन, क्षेमेन्द्र, भवभूति, राजशेखर,कुमारदास, विश्वनाथ, सोमदेव,गुणादत्त,नारद , लोमेश, मैथिली शरण गुप्त,केशवदास,समर्थ रामदास,संत तुकडोजी महाराज आदि चार सौ से भि जादा कवियों न अर संतों न कै भाषाओं म राम अर रामैण क कै हौर चरित्रों क बारा मा भि काव्यों/ कविताओं कि रचना कार। स्वामी करपात्री न ‘ रामायण मीमांसा’ कि रचना कैरी वामां रामगाथा कु एक वैज्ञानिक आयामाधारित विवेचन द्या।़आज भि प्रचलित कै रामकथानकौं म आर्ष रामायण, कृत्तिवास रामायण,बिलंका रामायण,मैथिल रामायण,सर्वार्थ रामायण, तत्त्वार्थ रामायण, प्रेम रामायण, संजीवनी रामायण, उत्तर रामचरितम, रघुवंशम्,प्रतिमानाटकम,कम्ब रामायण,भुशुण्डि रामायण, आध्यात्म रामायण, राधेश्याम रामायण, श्री राघवेन्द्र चरितम,मंत्र रामायण, योग वशिष्ठ रामायण, हनुमन्नाटकम,आन्नद रामायण, अभिषेकनाटकम,जानकीहरणम,आदि मुख्य छन। विदेशों म भि तिब्बती रामायण, पूर्वी तुर्किस्तानकी खेतानीरामायण, इंडोनेशिया कीककबिनरामायण,जावा का सेवतराम,सैरीराम,रमकेलिंग,पातानीरामकथा,इण्डोचायनिकी रामकेर्ति( रामकीर्ती) , खमैररामायण, बर्मा( म्यांमार) कीयूतोकी रमयगन, थाईलैंड की रामकियेन आदि रामचरित कि खूब बखान करदन। यांका अलावा भि विद्वान इन भि मंदन कि ग्रीस क कवि होमरक भौत पुरणा काव्य इलियड, रोम क कवि नोनस कि कृति डयोनीसिया अर रामैण कथा म अद्भुत सममानता च। विश्व साहित्य म सैरी दुनिया क कै कवि अललिख्वारौं क राम क अलावा कै हौर क बारा म इतगा श्रृद्धा नि मिलदी।
स्वतंत्र भारत म भि संस्कृत म राम कथा आधारित कै महाकाव्य लिखे गेनी वामा रामकीर्ति,रामाश्वमेधीयम,श्रीमद्भर्गवराघवीयम,जानकीजीवनम,सीताचरितम,रघुकुलकथावल्ली,उर्मीलीयम,सीतास्वयंमबरम,रामरसायण,सीतारामीयम,साकेतसौरभम आदि मुख्य छन। डॉ भास्कराचार्य त्रिपाठी रचित साकेतसौरभ महाकाव्य रचना शैली अर कथानक कारण विशिष्ट च।नाग प्रकाशन नै दिल्ली बटी प्रकाशित इ महाकाव्य संस्कृत हिन्दी म समानंतर रुपम छन।
