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(ई.प्र. उनियाल)
एक हौर हिमालयन दिवस ऐकि चलिगे, बड़ा बड़ा वादा करे गेन। इनु होण चंद, इनु कन्न चंद पर वास्तविकता मा कुछ नि होंद हिमालय की सेहत दिन’ ब-दिन बिगड़द जाणी छ जै कु नतीजा आज हमरा समणी छ। जन-जन तै जिंदगी देण वळो हिमालै आज हर्बि-हर्षि प्रभाबित ही न होंद जाणू छ वरन चेका अंचल मा बस्यां गौं मा अब हैर्याळी रखणै भावना खत्म होणी छ। लोग तराई मा रैणु जादा सुबिंधा जनक समझदन। गौं कि खेती पाती इत्यास कि बात मन्ये जाणै स्थिति मा छ। आज हिमालै का निवासी वखै हवा, पाणि अर माटा कि तरां उंदु बगद जाणी छ पर कखि बटी क्वी यिनु रैबार नि औणू छ कि ये क्षेत्र कि हर्याळी कनुववे अक्षुण्ण रखे जाव। आज जब कि पहाड़ का लगभग 17 सौ गौं मा भूतू वासू होयूं छ, य रफ्तार बड़द जाणी छ। यिनि स्थिति मा जब पहाड मा खेतीपाती को चलण छौ तब पुंगड़ों मा हळ चलैकि चूंकि जलशोषण शक्ति तैं आधार देंदा छा।
दिखे जाव त हमनु हिमालै कि सेहत हि बिगाड़ी रख दे यख तक कि प्रदेश पर राज कन वळि सरकारों न बि ये मामला मा गंभीरता नि दिखै। दरसल कै बि क्षेत्र तें तबि सुरक्षित रखे जै सकेंद जब वखा लोगु का हित सुरक्षित होवन, यीं नजर से दूयखे जाव त हिमालै अर हिमालैवास्यों तैं एक दुसरा पूरक का रूप मा द्यखणै कबि कोशिश नि करे ग्ये, यानि अगर हिमालै कि सेहत ठीक रखणि हो त वेका अंचल मा बस्यां लोग्वी सुविधा पर विशेष फोकस करे जाण चयेणू छ, न सिर्फ उत्तराखण्ड वरन तमाम हिमालयी राज्यों बटी खेती किसाणी कि अवधरणा रसातल कि तर्फ सरकद जाणी छ। हिमालै तैं छिजण से बचौणो कोशिश होण चयेणी छ कि स्थानीय संसाधनों तैं प्राथमिकता का आधार पर सरकारी प्रश्रय दिये जाव। यो हि न यूं संसाधनों तैं पूरो संरक्षण देंद यूंका विकास का वास्ता प्रयास करे जाव त आस करे जै सकद कि हिमालै कि सेहत मा हर्बि-हर्बि सुधार ऐ जालो, यांसे क्षेत्रीय परिस्थितिकी तैं जीवनदायिनी का रूप मा प्रतिष्ठापित करे जाणै परम्परा तै बल मिललु।
दरसल कुछ पर्यावरणविदों अर पारिस्थतिकी विशेषों का सहारा हिमालै कि रक्षा नि करे जै सकदी यि लोग सिस्टम तैं अवगत करै सकदन चेतावनी दे सकदन कि अगर हिमालै नि बचलो त हमरो अस्तित्व बि ज्यूदो नि रैण्य, यांक वास्ता हिमालै कि सोच पर मंथन करे जाण चयेणू छ। हिमालै क्वी ह्यूं को घर नी छ। वेका अंचल कथगै संस्कृति पैदा हवेनि आज फलीभूत होणी छन पर अब वीं धरण
करि। यांमा वखै माटी, पाणि, हवा, जंगळ जनि अवधारणों तैं प्रोत्साहित करि। हिमालै रूपी प्राकृतिक संसाधनों का भण्डार का कारण हि देश का जंगळ, खेत, खल्याण, पुष्पित पल्लवित होद औणा छन। यांकै प्रताप से हिमालै का प्रश्रयमा रैण वळों तै प्राणवायु प्राप्त होणी छ, वो देश कि जलवायु तैं निर्धारित कैरी वेका विस्तार तै बढ़ावा देंदन।
वास्तव मा आज हिमालै तैं हर स्तर पर बिसरे जाणू छ। उत्तराखण्ड राज्य बण्यां 25 वर्ष पूरा होण वळा छन। सरकार औणी छन अर हिचौणी छन पर यूंमा राजभोग कन वळा मंत्री संत्र्यों न कवि हिमालै तैं प्राथमिकता नि दिनी। अब तक उत्तराखण्ड विकास का इतर समझी चले जाणू छ। य सोच घातक छ, एक तरां भावी पीढ़ी कि सांसों पर हमला जनु छ। बात चै विकास कार्यों कि हो चै मूलभूत सुविधों कि यूंमा हिमालै कि अनदेखी निरंतर होंद औणी छ, जबकि होण या चैंदु छौ कि हिमालै तै आधार मानी पहाड़ों कि विकास योजना शुरू करे जावन।
देश-प्रदेश कि सरकारों तैं चेत जाण चयेणू छ कि हिमालै कि अनदेखी वृंका वास्ता ठीक नी छ। यानि अगर हिमालै बीमार होलु त देश-प्रदेश का मनख्यों का वास्ता बि जीवन मरण कि स्थिति पैदा हवे जैलि।
साफ बात छ कि हमालै का सतत विकास पर ध्यान केंद्रित कनु समै कि मांग छ। हिमालै अर यखा मनख्यों का संबंध तें ध्यान मा रखद विकास योजना बणै जावन त हिमालै अर विकास का बीच बेहतर संबंध कायम वे सकदन। यीं दिशा मा हिमालै कि सेहत तैं यखद आजीविका का संसाधन विकसित कनै जर्वत छ। यीं दिशा मा कुटीर उद्योग धण्धा महती भूमिका अदा कर सकदन। यांका अलावा हमतें जल, जंगल, जमीन बचाण कु संकल्प लैण पडलू। हमतै, य बात याद रखण होलि कि अगर हिमालय सुरक्षित रालु तबी हमरू पर्यावरण अर हमरि पृथ्वी सुरक्षित रैलि। ये वास्ता हिमालय कु अस्तित्व बणै रखण खातिर इमानदारी सि काम कन्न पडलू। जरूरत छ हिमालय पर गहन शोध कन्नै कि ताकि यु सुरक्षित रौ अर हमारी पहरेदारी कर्द रौ, हमतै विकास का नौ पर ऐका दगडि अनावश्यक छेड़छाड़ नि कन्न होलि तबि जैकि यु सुरक्षित रौलु अर हम बि।
