रंत रैबार व्यूरो
नई दिल्ली। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली द्वारा आगामी 1 फरबरी, 2026 खुणि डीपीएमआई सभागार न्यू अशोक नगर, दिल्ली म उत्तराखण्ड का सुप्रसिद्ध लोक गायक स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी जयंती समारोह कु आयोजन करे जालु। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी ल बोलि कि ये आयोजन म मंच द्वारा ग्रीष्मकालीन गढ़वाली-कुमाउनी भाषा शिक्षण कक्षाओं का केंद्र प्रमुख/प्रबंधक आदि कु सम्मान
बि होलु। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी का व्यक्तित्व अरं कृतित्व परैं ये आयोजन म चर्चा होलि। अगला साल का आयोजन का वास्ता बि एक रुपरेखा तैयार करे जालि । दगड़ी मंच द्वारा ये साल गर्मियों की छुट्टियों म भाषा शिक्षण कक्षाओं का आयोजन व अन्य आयामों पर बि चर्चा होलि। ज्ञातव्य हो कि स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी उत्तराखण्ड का प्रथम लोक गायक, गीतकार, निर्देशक व नाटककार स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी पैला
गौं-गुठ्यार बिटिन देश-विदेश अर मंच प्रदान करीन। देश की आजादी से पैलि
मनखि छन जौल गढ़वाळि गीत, नाटकों तैं
लगभग सन् 1944 बिटिन देश का भैर वर्तमान म्यांमार वबरि वर्मा/रंगून बिटिन ग्रामोफौन म गीत रिकार्ड कैरिकि गढ़वाळि गीतों तैं नै अगास देन। आपन आजीवन अपणि संस्कृति अर सरोकारों का प्रति अद्वितीय योगदान देन। बिटिन आदरणीय जीत सिंह नेगी जीन
स्वर्गीय जीत सिंह नेगी को जन्म 12 फरवरी 1925 पौड़ी गढ़वाल क पैडलस्यूं का अयाल गांव गौं सुल्तान सिंह नेगी जी व रूपदेयी नेगी जी कु घर हे।
वोंकी प्रारंभिक शिक्षा पौड़ी गढ़वाल (भारत), मेम्यो (वर्तमान, म्यांमार) अर लाहौर (पाकिस्तान) जना अलग-अलग जगों म ह्वे। किलैकि वों का बुबाजी फ़ौज म छाया। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी ला अपणु गीत-संगीत की शुरुआत 1940 क दशक का का लगभग कैरी। नेगी पैला गढ़वाली गायक छाया जौंका छह गढ़वाली लोक गीतों का संकलन 1949 म बॉम्बे की यंग इंडिया ग्रामोफोन कंपनी द्वारा ग्रामोफोन परें रिकॉर्ड हे छाया। जीत सिंह नेगी जी 1940 क दशक ब्योलि सि सजर्जी प्रकृतिम कन उज्याउ होयूं रैन्दू उडीपीएमआई म होलु सुप्रसिद्ध लोक गायक जीत सिंह नेगी जयंती समारोह कु आयोजन म गढ़वाली भाषा और भावनाओं हैं आवाज देण वळा पैला व्यक्ति छाया। नेगी जी न नेशनल ग्रामोफोन कंपनी, मुंबई म डिप्टी म्यूजिक डायरेक्टर क रूप म बि काम कैरी । स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी का नाटकों म वृंकु सुप्रसिद्ध नाटक भारी भूल का पैली दौं 1952 म गढ़वाल भ्रातृ मंडल का कार्यक्रम म दामोदर हॉल, मुंबई म हे। मलेथा की कूलः यह ऐतिहासिक नाटक जु गढ़वाली साम्राज्य क सेनाध्यक्ष, तिब्बत का विजेता योद्धा अर बहादुर भड़ गजेंद्र सिंह भंडारी क पिता माधो सिंह द्वारा निर्मित मलेथा नहर पर आधारित च । नाटक कु मंचन देहरादून, मुंबई, दिल्ली, चंडीगढ़, मसूरी, टिहरी अर कति स्थानों पर 18 (अठारह) बार हे छौ। इस नाटक का लेखन एवं निर्देशन सिंह नेगी ला ही कैरी। वन्नि जीतू बगड्वालः जीतू बगड्वाल गढ़वाल की लोककथाओं म प्रसिद्ध च । जीतू बगड्वाल एक प्रतिभाशाली बांसुरीवादक छौ। जीत सिंह नेगी जी ला यी लोकगाथा तैं संगीतमय नाटकम लेखी व ये कु विभिन्न क्षेत्रों म लगभग दस बार से अधिक बार मंचन हे। नेगी जी को एक हौरि सुप्रसिद्ध नाटक पतिव्रत रामीः पर्वतीय मंच दिल्ली द्वारा 1956 म सिंह नेगी द्वारा परिकल्पित व रचित हिंदी नाटक रामी बौराणी कु मंचन कै बार ह्वे। बार मंचन किया गया। राजू पोस्टमैनः यह एक धाबड़ी गढ़वाली नाटक च। व ये का संवाद हिंदी अर गढ़वाली मिश्रित छन ।
ये धाबड़ी नाटक कु मंचन सबसे पैलि राजू पोस्टमैन गढ़वाल सभा चंडीगढ़ द्वारा करेगे। वे का बाद यु नाटक बि एक दर्जन से बंड्या दौ मंचित है।
स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी कु सौब से पैलु गढ़वाली गीत आकाशवाणी 1954 में आकाशवाणी बिटिन प्रसारित ह्वे छौ। नेगी जी का गीत, नाटक कम से कम 600 से अधिक बार प्रसारित हे छाया य बात कै बि क्षेत्रीय भाषा क कलाकारा खुणि भौत बड़ी उपलब्धि च । जीतू बगड्वाल अर मलेथा की कूल रेडियो-गीत-नाटिका को भी आकाशवाणी से 50 से अधिक बार प्रसारण/रिले हे छौ।
उत्तराखण्ड का लोक संस्कृति, नाटकों का भीष्म पितामह जीत सिंह नेगी जी को निधन देहरादून म 21 जून, 2020 खुणि 95 साल की उम्र म हे। अपरा जीवन म नेगी जी एक शांत, सरल व कर्मशील मनखी रैन। आपकी भावना अपरा लोक व समाज के प्रति सदन्नी सकारात्मक रै। आजीवन आप कुछ न कुछ रचणा रौ। आपन समाज म लोक का माध्यम से भी व समाज सेवा का माध्यम से भी अपरी पछ्याण बणाई।
ये आयोजन म स्वर्गीय जीत सिंह नेगी की सुपुत्री श्रीमती मधु नेगी व नेगी जी की पौत्री श्रीमती रितिका नेगी आदि नेगी जी का परिजन भाग ल्याला यनि उम्मीद च। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली द्वारा अगला साल 2027 म स्वर्गीय जीत सिंह नेगी की सौवीं जयंती पर एक भव्य आयोजन कारलु। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी शताब्दी समारोह समिति गठित करे जालि। य समिति अगला साल होण वळा आयोजन का खातिर काम कारलि।
