रंत रैबार ब्यूरो…..
देहरादून। मासिक साहित्यिक संगोष्ठी (दिल्ली) का पैळाऽ बरसै थौळा-मेळा शुब संगराद, नैवर्ष, मकरैणी-उत्तरैणी अर गणतंत्र दिवस पर गढ़वाल भवन, दिल्ली मा ‘बौऽभाषा काव्य कौथिग मनैगे।
वसुधैव कुटुंबकम् की तर्ज पर साहित्य का नख-शिख विकास अर सोळ-सिंगार की आदर खातर हिंदी, नेपाली, गढ़वाली कुमाउनी अर जौनसारी पांच भाषाओं का लगभग 100 से जादा कवियों/साहित्यकारों कि काव्य गोष्ठी अपणा आप मा एक ऐतिहासिक पैल छ।
काव्य कौथिग मा डॉ हेमा जोशी ‘हिमाद्रि’ की द्वी पोथी- ‘विज्ञान कथाः एक परिचय ‘अर ‘कंडाली धूप ?’ का विमोचन का दगड़ै-दगड़ डॉ० कुसुम भट्ट तै साहित्य सम्मान दिये गे।
सम्मान समारोह, पुस्तक विमोचन अर मैनै एकजुट-एकमुठ जन्म-त्यारै हँसि खुसि मा पंचमेवा, नर्यूल, रोट भेलि को अठ्वाड़ मेळा भी उर्ये गे। दगड़ मा पुस्तक प्रदर्शनी भी लगे गे। पिछळा मैना मा पैळो
साहित्यिक सम्मान कमल रावत तैं वृंका ऐतिहासिक उपन्यास ‘देवलगढ़’ खुणि दिये गेछौ।
पारंपरिक दुपळि मा बिराज्यां पड़ोसी मित्रदेश नेपाला कवियों ला रोटी-बेटी का
रिश्ता-नाता हैं गींठी जन गंठ्य। त वखी भंडि दूर गौचर, चमोली जिला बटि पारंपरिक चेतन-चोला मा ऐई पजल परिवारै दीसा-धियाणि मंगलेर राजेश्वरी पंवार पुष्पा कनवासी अर सुशीला बिष्ट का सुंदर मांगलगीत ‘खोली का गणेशा
–‘ ला कवियों खुणि ‘रेड कार्पेट औं भगत’ को काम करे। यींऽ तरां पारंपरिक गैंणाँ से सर्जि-धजिं कमला रावत, डॉ० रामेश्वरी नादान, डॉ० कुसुम भट्ट, रंजना नौटियाल, पूनम तोमर, प्रमिला तोमर, अनुराधा सोलंकी अर आशा खंडूड़ी ला काव्यपाठ को आगाज हैरि झंडी दिखे करि।
ये मौका पर जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ न बोलि कि’ साहित्य तैं भाषायी बंधन मा नि बांधि ज्यै सकद। हरेक मनखीऽ भितर कस्तूरीमृग तरां साहित्य लुक्यूं होंद। बस वै मणिमहेश से वीं निधि तैं खोज
खाजिक भैर गाडनै जरोरत होंद’।
साहित्यकार सुशील बुड़ाकोटी ‘शैलांचली’ ला ‘हजार ग्राम हजार धाम, हमरी भाषा हमरी पछ्याण’ का संदेश का दगड़ उरयों पजल जातराओं अर मासिक साहित्यिक संगोष्ठी का एकवर्ष की यात्रा पर बक्तब्य दे। दिल्ली विश्वविद्यालय का शिक्षक संघ का अध्यक्ष डॉ० वीरेंद्र सिंह नेगी ला बोलि यींऽ तरां का भाषा, संस्कृति, साहित्य का त्रिवेणी जागर (समागम) हमुर्ते अपणा मूलजळड़ों दगड़ जुड़ण मा सौंजड़िया सिद्ध होला। मास्टर रुद्र घनशाला ला गढ़वाली भाषा मा अपणा संभाषण से दर्शकगणौं पाथो भोरिक लाड दुलार पायि। बल द्यब्ता छुटो, अर छै ? बड़ो। त बल पाथो बड़ो या नातो।
गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर बटि न्यूत्यां लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र का निदेशक गणेश खुगशाल ‘गणी’ न बोलि ‘आज डा. कुसुम को ही नि यो वृंको भी सम्मान छ। नया कवियों हैं यनी बड़ा चौका-धुरपळों पर अपणि कविता को लुहा मनवाण से पैळि यौंऽ तरां कि मासिक साहित्यिक संगोष्ठी का अणस्यव्ळा मा लोहाघाटाऽ लौह-पुरुष कवि जनी तपण होलु। साहित्य विधाओं की चर्चा कर्क्स वून पजल साहित्य पर भी अपणि बात रखी। न्यूल्यां कवियों मा नेपाली भाषा का कवियों गंगाप्रसाद रिजाल, टेकराज पनेरू, प्रजापति नेगी, रमेश पन्त ‘मीतबन्धु’, हेमबाबु लेखक ला अपणि कविताओं से दुयी देशों का मैत्रीय गठजोड़ों पर ध्यान धर्यं करि।
हिंदी भाषा का कवियों अशोक अवस्थी अंजाना, जगदीश मीणा, ? नीलेश निराला, पंकज प्रकाश, महक नैन, डॉ मनोज कामदेव, डॉ राम निवास तिवारी ‘इंडिया’, राजेन्द्र सिंह रावत, सुबोध भारद्वाज अर विवेक बादल बाजपुरी ला उत्तराखंड की भाषाओं का दगड़ रळे-मिसेकि बौऽरंगी चोली-दामन को दगड़ो दे। कुमाउनी भाषा का कवियों ओम प्रकाश आर्य, नीरज बवाड़ी, डॉ० हेमा जोशी ‘हिमाद्रि’ अर जौनसारी भाषा का कवियों खजान चंद शर्मा, प्रमिला तोमर, पूनम तोमर, राम सिंह तोमर अर सुल्तान सिंह तोमर ला रळे-मिसेकि काव्य कौथिग तैं उत्तरैणी मकरैणी कौथिग का रंगों मा रंगण मा क्वी कोर-कसर नि छोड़ि।.. गढ़वाली भाषा का कवियों अंजना बिष्ट, आशा खंडूड़ी, ओम ध्यानी, ओम प्रकाश पोखरियाल, उदय ममगाईं राठी, डॉ० उनीता सच्चिदानंद (धस्माना), कैलाश कुकरेती, गोविंद राम पोखरियाल ‘साथी’, चंदन प्रेमी, जवर सिंह कैंतुरा, जयपाल सिंह रावत, जय सिंह रावत जसकोटी, दर्शन सिंह रावत, दिग्विजय सिंह बिष्ट, दिनेश ध्यानी, दीवान सिंह नेगी, देव सिंह रावत, देवेन्द्र सिंह रावत, द्वारिका प्रसाद चमोली, निर्मला नेगी, पयाश पोखड़ा, पार्थसारथि थपलियाल, पुष्पा कनवासी, डॉ० पृथ्वी सिंह केदारखंडी, भगवती प्रसाद जुयाल ‘गढ़देशी’, रघुवर दत्त शर्मा ‘राघव’, रंजना नौटियाल, राजेश्वरी पंवार राम जी, डॉ० रामेश्वरी नादान, रविन्द्र गुडियाल, रोशन लाल ‘हिंद कवि’, संदीप गढ़वाली (घनशाला), सते सिंह रावत, सतीश रावत, सागर पहाड़ी, सीमा नेगी भैंसोड़ा ‘श्रीमा’, सुनील थपलियाल ‘घंजीर’, सुभाष गुसाई, सुरेशी दानू, सुशीला बिष्ट, डॉ० सुशील सेमवाल, शशि बडोला, विमल सजवाण, विश्वेश्वर प्रसाद सिल्सवाल, सिमरन रावत, वीरेंद्र जुयाल ‘उपिरि’, डॉ० हरेंद्र सिंह असवाल अन्य की काव्य प्रस्तुतियां सानदार रैनि। सोम प्रकाश ला डोगरी अर राजस्थानी कविता से जिकुड़ि पर छपछपि लगे। चार सत्रों मा मंच संचालन नीरज बवाड़ी, वीरेंद्र जुयाल ‘उपिरि’, सुभाष गुसाई अर विवेक बादल ‘बाजपुरी’ ला भला सगोर-सलीका से करि। न्यूत्यां सभी कवियों अर मैमानौँ तैं शाल प्रशस्ति से सम्मानित किये गे। साहित्य सम्मान का सिग्नेटरी मंडल मा कुसुम रावत जगमोरा, मनवर सिंह रावत, शिक्षाविद, सुशीला रावत, नाट्यकर्मी अर डॉ हरेंद्र सिंह असवाल, शिक्षाविद अर कवियों का प्रशस्ति का सिग्नेटरी मंडल मा कुसुम रावत जगमोरा, कुलानन्द जोशी, आई ए एस (सेवानिवृत्त), डॉ हरिसुमन बिष्ट, साहित्यविद अर डॉ वीरेंद्र सिंह नेगी, शिक्षाविद विराजमान छाई। सम्मान अर प्रशस्ति प्राप्तकर्ता की भाषा हिंदी नेपाली गढ़वाली कुमाउनी अर जौनसारी मा दिये गेनि। कार्यक्रम मा वखी सुशीला रावत, खुशहाल सिंह बिष्ट, रमेश चंद्र घिल्डियाल ‘सरस’, अजय सिंह बिष्ट, अधिवक्ता संजय शर्मा दरमोड़ा, पदम सिंह, जगदीश सहगल, मदन सिंह रावत, बृजमोहन सिंह नेगी, कमला रावत, नीलम रावत, संगीता गुसाई, सविता पंत, गजपाल सिंह रावत, विश्वबंधु उनियाल, जोगाराम आर्य अनमोल, अंजली घनशाला, कविता शर्मा, राजेन्द्र सिंह, एन एस रावत, महेंद्र सिंह रावत, कृपाल सिंह बनकोटी, धीरेंद्र सिंह बवाल, धीरेन्द्र थपलियाल, देवदत्त धस्माना, यश डोभाल, मनोज कुमार, अमर सिंह, सत्य प्रकाश नैथानी, सुदर्शन जुगरान, अनीता जुगरान, खुशी, विकास चमोली, संदीप गुसाई, रामचरण धस्माना, सार्थक धस्माना, राकेश सिंह गुसाई, रेनू उनियाल, पवन गुसाईं, विशन दत्त नैनवाल, विमला देवी, उम्मेद सिंह रावत, हुकम सिंह कंडारी, दीप्ति रावत, पंकजा पाठक, मायाराम बहुगुणा, पियूष, जयलाल नवानी, जितेन्द्र सिंह रावत, राकेश रावत, दिनेश गुसाई, मुरलीधर ढौंडियाल, पंकज शर्मा, हरेंद्र पुरी, राज कुमार रावत, बिनोद जोशी, आनंद सिंह रावत, जसबीर सिंह, अनिल कुमार पंत, राकेश कुमार, सुरेन्द्र कुमार जुयाल, एम सी चतुर्वेदी, प्रवीण सिंह रावत, विक्रम सिंह रावत, सर्वेश्वर बिष्ट, नीलम रावत, प्रदीप तिवारी, रणजीत सिंह रावत, अर्जुन रावत आदि बड़ी संख्याबल मा गणमान्य लोगों की गरिमामय उपस्थिति है। कौथिग का शैल शिरोमणि ‘शैलांचली’ रैनि।
