(जबर सिंह कैंतुरा)
मायेरा पा-ऽद, बूमर पाळा मा -अदनंगा हाडंगा, चिरखा-चिरखा खुट्टा ! तल्यान्या, चियां जंखा। भूखन-ठंडन-खट-खट करदा दांत!
आर भैर परदेस-रूड्यों का अस्यो पस्यो मा-सैडि गत्ति -हात-मुक्क लर्क-तर्क, भड्याएणा छन मुंडु, भुला, चौकिदार ! खाणा गाळि, धिक्कि-माक्कि ।
ध्वोणा-जुठा भांडा। हैंसि ऐ जांदि, बड़ि बिखैऽ बड़ि, देखिक कुहाल ।
क्य ब्वोन्न ? कैमा ब्वोन्न ? क्वी नीं बींगण्या अजगाल ।
किलै कि यख त -सब्बि बण्या चन्न भला दिनवांऽ धुंयाळ !!
