रंत रैबार ब्यूरो…..
नई दिल्ली। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली द्वारा ये साल बि गढ़वाळि, कुमाउनी भाषा शिक्षण कक्षाओं कि शुरुवात ह्वेगे। जनुकी उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच, दिल्ली पिछला कै वर्षों बिटिन नै पीढ़ी तैं अपरी दूधभाषा सिखाणु च। उत्तराखण्ड लोक-भाषा सहित्य मंच, दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी ला बताई कि डीपीएमआई का चेयरमैन डॉ विनोद बछेती जी का सहयोग से मंच ये साल दिल्ली-एनसीआर में लगभग तीस केंद्रों म बच्चों तै गढ़वाळि, कुमाउनी भाषा सिखाणा छावा। वे का अलावा उत्तराखण्ड म देहरादून, श्रीनगर गढ़वाल व कुमाऊं क्षेत्र म बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ आदि जिलों म बि लगभग आठ केंद्रों म भाषा शिक्षण कक्षाओं की शुरुवात हूणी च। श्री ध्यानी ल बोलि कि हमरी कोशिश च कि देश अर दुन्या म जख बि हमरा लोग छन हम अपरी नै पीढ़ी तैं अपरी भाषा सिखांवा। ये प्रयास म हम लगातार पिछला पंदरा साल बिटिन लग्यां छौ। जब हम गढ़वाळि, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना बात करदौ तब हमरि या बि जिम्मेदारी च कि ज्वा पीढ़ी अपरी भाषा से दूर च छन हूणी वों तैं हम भाषा से जोड़ा। सुप्रसिद्ध समाजसेवी, भाजपा दिल्ली प्रदेश का सचिव, डीपीएमआई का चेयरमैन व उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संरक्षक डॉ विनोद बछेती ला बोलि कि जै समाज कि भाषा उन्नत होलि वो समाज हर लिहाज से उन्नत होंदा। हमरी भाषा, साहित्य व संस्कृति कु संरक्षण व प्रचार, प्रसार बरोबर हूण चैन्द। उत्तराखण्ड
वोलियो स्कूल
लोक भाषा साहित्य मंच, दिल्ली यीं दिशा म लगातार प्रयास करणू च य सराहनीय बात च। आज पंद्रह साल बाद हम दिखणा छां कि भौत सा बच्चों तैं पैली गढ़वाळि, कुमाउनी, जौनसारी भाषा जरा बि नि औन्दि छै लेकिन आज वो भौत बेबाकी से मंच म अपरी मातृभाषा म बात करदन। भाषण देंदन व लिखणा बि छन। डॉ बछेती ल बोलि कि ये साल हमरु प्रयास च कि अधिक से अधिक बच्चों तैं हम भाषा मुहिम से जोड़ा। डॉ विनोद बछेती ल बोलि कि हमरी
प्राथमिकता च कि हमरी भाषा नै पीढ़ी तक पौंछ। ये का खातिर सब्बि केंद्रों म भाषा शिक्षण का खातिर लगातार प्रयास हूण चंदन। बच्चों तैं रुचिकर विषय पढ्ये जाण चंदन। जब हमरी भाषा संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल होलि तब बड़ा बड़ा आयाम खुलला। इलै आज हम सबकी जिम्मेदारी चं कि हम सब लोग अपरी भाषाओं तैं सीखा, अगनै बढ़ावा व प्रचार, प्रसार कारा। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली द्वारा, दिल्ली-
एनसीआर व उत्तराखण्ड का हर भाषा शिक्षण केंद्र म रोज गढ़वाली-कुमाउनी म प्रार्थना, वंदना अर दीप प्रज्वलित का बाद बच्चों तैं भाषा ज्ञान दिए जाणू चा। गीत, कविता का माध्यम से बच्चों तैं मनोरंजन प्रिय पाठ्यक्रम पढ़ए जाणू। बच्चा यूँ कक्षाओं म भौत मन लगैकि पढ़णा छन। हर हफ्ता सुबेर 9-00 बजी बिटिन द्वफरा 12-00 बजी तक कक्षाओं को आयोजन हूणू। बच्चों तँ पाठ्य सामग्री, बैग आदि बि निशुल्क दिए गेन । कुछ सेंटर यना बि छन जख निरन्तर निशुल्क गढ़वाली-कुमाउनी भाषा शिक्षण कक्षाओं को आयोजन हूंदा। ये साल लगभग द्वी हजार से बंड्या बच्चों तैं भाषा शिक्षण कक्षाओं से ज्वड़णा प्रयास च। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली लगातार भाषा शिक्षण कक्षाओं कु संचालन, भाषा सेमिनार, आठवीं अनुसूची म हमरी भाषा गोष्ठी व दिल्ली से भैर उत्तराखण्ड म बि भाषा सेमिनारों को आयोजन करणु च। कुल मिलैकि मंच लगातार भाषाई सरोकारों परें सतत काम करणु च।
