सरोज शर्मा
किलै कि प्याज लाषण थै शाकाहार – मने जांद ?यु राक्षसी भोजन च ?
ये बारा म एक धार्मिक कहानि च समुद्र मंथन कि बात च जब समुद्र मन से अमृत निकलि त अमृत पीणा गद्यपताओं और दानवों म छीना झपटी लगि। तब मोहिनी रुप विष्णु न द्यपताओं अमृत पान कराण क उद्देश्य से राक्षसों अमित कैरिक अमृत बंटण शुरू करि । राहु क राक्षस थै मोहिनी पर संदेह है त वु चाप द्यपतों कि पंगत म बैठ ग्या। अमृत दा बंटदा भगवान विष्णु भि वे नि व्यांण सका और वै भि अमृत पान करै
पर सूर्य और चंद्रमा कि सानि से भगवान
विष्णु न सुदर्शन चक्र न वेक मुंड धड़ से अलग कैर द्या। मुंड कटदा हि वे राक्षस का मुख बटिक ल्वै दगड़ द्वी बूंद अमृत भि धरति म पोड़ ग्या, जैसे प्याज और लाषण कि उत्पति है।
अमृत से पैदा हूंण क कारण प्याज़ लाषण रोगनाशक और जीवनदायिनी छन, पर राक्षसी ल्वै से पैदा हूण से यूंमा राक्षसी गुणों क समावेश है ग्या, यूंक सेवन से शरीर राक्षसों जन बलिष्ठ है जांद।
रोग नाशक और जीवनदायिनी है कि भि यु पाप थै बढांद, बुध्दि थै भ्रष्ट और अशांति क जन्मदाता च ।
इलै प्याज लाषण द्यपतों पर नि चढ़दा।
