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देवभूमि कु दिव्य वेडिंग डेस्टिनेशन बणि त्रियुगीनारायण
रंत रैबार ब्यूरो…..
रूद्रप्रयाग। उत्तराखंडे पावन केदारघाटी मा बस्यूं पौराणिक अर विश्वप्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर आज केवल आस्था कु केंद्र ही नि बल्कि देशभरा नवयुगलों का वास्ता सबसे चर्चित अर आध्यात्मिक वेडिंग डेस्टिनेशन बण्यूं छ। मान्यता छ कि ई दिव्य जगह परे भगवान शिव अर माता पार्वती कु ब्यौ ह्वे छौ अर खुद भगवान विष्णु ये अलौकि ब्यौ का साक्षी बणि छा। यही कारण छ कि अब देशा कोणा-कोणा बटि नवयुगल ये पवित्र धाम मा सात फेरा लीणों तैं पहुंचणा छन। ये दिव्य स्थल मा सालभर श्रद्धालुओं अर नवविवाहित जोड़ों की
भारी भीड़ दिखणु तैं मिलणि छ। इखे आध्यात्मिक ऊर्जा, हिमालय की मनमोहक वादियां, पौराणिक महत्व अर अखंडे जलणी दिव्य आग नवयुगलों तैं
आकर्षित करणी छ। यही वजह छ कि त्रियुगीनारायण मंदिर अब आधुनिक डेस्टिनेशन वेडिंग चमक-दमक तैं पिछने छोड़ी आध्यात्मिक विवाह स्थला रूप मा
नै पहिचान बननु छ।
पौराणिक मान्यताओं का अनुसार भगवान शिव अर माता पार्वती न ईं जगह मा ब्यौ करि छौ। विवाह का दौरान प्रज्जवलित पवित्र आग आज मंदिर परिसर मा अखंड रूप सि जलणि छ, ज्यां तैं धनंजये अग्नि बुलै जांदू।
नवयुगल ई आग तैं साक्षी मानी सात. फेरा लिदंन अर वैवाहित जीवने शुरूआत करनं। मणै जांदू कि ई पवित्र अग्नि का शिव अर माता पार्वती कु विशेष आर्शीवाद समणि ब्यौ कन्न वेला दंपतियों तैं भगवान मिलदु अर वूकू वैवाहिक जीवन सुख, समृद्धि अर प्यार से भुरयूं रोंदू।
त्रियुगीनारायण मंदिर लोकप्रियता लगातार बढ़णी छ। दिल्ली, मुंबई, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बंगाल जगह-जगह बटि नवयुगल इख ब्यौ करणों तें पहुंचणा छन। सोशल मीडिया अर धार्मिक पर्यटना बढ़ता प्रभाव का चलता या जगह अब राष्ट्रीय स्तर परे चर्चाओं मा बणि छ।
जानकारी का अनुसार साल 2026 की शुरूआत बटि अभी तके इख करीब 100 सि जादा ब्यौ संपन्न ह्वे गेन, जबकि बाद लगभग 46 नवयुगल विवाह बंधन बाबा केदारनाथ धामा कपाट खुलणा मा बंध गेन, आण वला शुभ मुहूर्तों का वास्ता बि बड़ी संख्या मा बुकिंग अर पूछताछ हूणीं।
