देलिम डंडा कुलड़ी थमलू गिंडसू अछेणु धरयूं कबरि ना कबरि त आलू बाघ चिमनु बल्यूँ
सुरक किवाड़ खोली टक लगै देखलू वे सणी हे ब्वै किलै हैं इथा गुगर्योणू गाँऊ मा अमणी
जंगलु उद्घार रौला बौला छक्के छिं और पोर मनखि माणस नि छीं डेरौं मिलण्यां नी त्वे गोर
किलै मनख्यूँ अजक्याल ग्वालू बणै गमजौंणी जख देखा मनख्यूं गफ्फा गास सडैम बणौंणी
जणदु छौं मि पेटै भूख सभु तैं या पिदै जांद भलु बुरू भूख मा मनखि भी कुछ नि चितौंद
पुछलू जानवरू छोड़ी किलै बण्यूं तैं मनसागी कथगौं गमजैगें लोला खून यु कन गिच्चा लागी
आज नित भील तेरू भी त इनी बक्त आलू शिकारखूं का हथू बंदूकन चुचा धड़ाम मरे जैल्यू
गढदेशी मनख्याती इलै छौं त्वे सणी अड़ौणू जंगलू मा राज करधौं चुचा वखि स्वांधू गुगर्याणू
जीणौ हक हरेकौ जु मुंथाम जलमी यख अयूं त्वे कु भी कुदरतौ ग्वालू देख जंगलू जंगलू देयूं
चेती जा इथा रौल बौल भलि नि होंद टक लै गुगर्याली जंगलू चैन से नि कनी बिघ्नै अलै बलै
प्रकृति से बिंडी छेड़ छाड़ विधाता तैं भी नि स्वांद कर्म अकरम्वा का फल सभू माटम मिलै ही देंद
बघ्यूलन फैलण छाई चौतरफू गौं भेल भंगार खेती पाती बांझा पोड़ीन कूड़ी ह्वयींन खंद्वार ।।
