रंत रैबार ब्यौरो…….
दिल्ली। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली व दिल्ली पैरा मेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट द्वारा संचालित गढ़वाली, कुमाउनी भाषा शिक्षण कक्षाओं कु लगातार संचालन दिल्ली एनसीआर, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चम्पावत आदि क्षेत्रों म लगातार हूणु च। ज्ञातव्य हो उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच कै वर्षों बिटिन भाषा शिक्षण अभियान द्वारा नै पीढ़ी तैं अपणा भाषाई सरोकारों से ज्वड़णा काम करणू छ। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली लगातार भाषा शिक्षण कक्षाओं कु संचालन, भाषा सेमिनार, आठवीं अनुसूची म हमरी भाषा गोष्ठी व दिल्ली से भैर उत्तराखण्ड म बि भाषा सेमिनारों को आयोजन करणु च। कुल मिलैकि मंच लगातार भाषाई सरोकारों पर सतत काम करणु च। इना प्रयासों तैं समर्थन व सहभागिता कि जरुरत होंदा तभी यना प्रयास सफल होंदन। यांका अलावा उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली उत्तराखण्ड का कालजई लोक गायक, गीतकार, नाटककार स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की शताब्दी वर्ष समारोहों कु बि लगातार आयोजन कनू छ।
विगत 24 मई, 2026 बिटिन उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली द्वारा ये साल बि गढ़वाळि, कुमाउनी
भाषा शिक्षण कक्षाओं कि शुरुवात है। जनुकी उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली पिछला कै वर्षों बिटिन नै पीढ़ी तैं अपरी दूधभाषा सिखाणु च। उत्तराखण्ड लोक भाषा सहित्य मंच, दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी व डीपीएमआई का चेयरमैन डॉ विनोद बछेती का प्रयासों से या मुहिम लगातार अगनै बढणी छ। ये साल दिल्ली-एनसीआर म लगभग तीस केंद्रों म बच्चों तैं गढ़वाळि, कुमाउनी भाषा सिखाणा छावा। वे का अलावा उत्तराखण्ड म देहरादून, श्रीनगर गढ़वाल व कुमाऊं क्षेत्र म बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ आदि जिलों म बि लगभग आठ केंद्रों म भाषा शिक्षण कक्षाओं को संचालन हूणू । यांका अलावा पिछला साल मंच द्वारा इंग्लैंड म बि भाषा शिक्षण कक्षाओं कु ऑनलाइन संचालन करेगे। ये प्रयास म मंच का सब्बि
साहित्यकार, सामाजिक संगठन व भाषा प्रेमी लगातार पिछला पंदरा साल बिटिन लग्यां छौ। दूसरा तरफा गढ़वाळि, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कना बात करदौ तब हमरि या वि जिम्मेदारी च कि ज्वा पीढ़ी अपरी भाषा से दूर चछन हूणी वों तैं हम भाषा से जोड़ा। यना प्रयास सब तरफ बिटिन होवन तब सरकारों व नीतिकारों परैं दबाव बि बढ़दा।
डीपीएमआई का चेयरमैन व उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संरक्षक डॉ विनोद बछेती ला बोलि कि जै समाज कि भाषा उन्नत होलि वो समाज हर लिहाज से उन्नत होंदा। हमरी भाषा, साहित्य व संस्कृति कु संरक्षण व प्रचार, प्रसार बरोबर हूण चैन्द। डॉ बछेती ल बोलि कि उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी व सब्बि साहित्यकारों का सामूहिक प्रयास व डीपीएमआई का सहयोग से लगातार यीं दिशा म लगातार सफल प्रयास हूंणा छन। आज पंद्रह साल बाद हम दिखणा छां कि भौत सा बच्चों तैं पैली गढ़वाळि, कुमाउनी, जौनसारी भाषा जरा बिनि औन्दि छै लेकिन आज वो भौत बेबाकी से मंच म अपरी मातृभाषा म बात करदन। भाषण देंदन व लिखणा बि छन । डॉ बछेती ल बोलि कि ये साल हमरु प्रयास च कि अधिक से अधिक बच्चों तैं हम भाषा मुहिम से जोड़ा।डॉ विनोद बछेती ल बोलि कि हमरी प्राथमिकता च कि हमरी भाषा नै पीढ़ी तक पौंछ। ये का खातिर सब्बि केंद्रों म भाषा शिक्षण का खातिर लगातार प्रयास हूण चंदन। बच्चों तैं रुचिकर विषय पढ़ये जाण चंदन। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच की बड़ी मुहिम कि हमरी गढ़वाली, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल करे जा। यां से भाषाई सरोकारों का बड़ा-बड़ा आयाम खुलला। हमरी भाषा रोजगार परक बणलि इलै आज हम सबुकि जिम्मेदारी च कि हम सब लोग अपरी भाषाओं तैं सीखा व ये आन्दोलन तैं सफलता की तरफ अगनै बढ़ावा।
