(भगतराम सेमवाल)
तब गाय बाग, बंगार बणै, कप्तान साब से ह्वेगे लणैः ।
बाग लैगाया पोरु कई साल, ल्वे पींद जांद बेटी ब्याटु गाल । पैलि-पैलि बाग़ चोरखिंडा गाय, तख वेल देवी को खाडू खाय । कप्तान साबा ल मार लथा, बागा ल अंगोठ्या खाय कैर सपा । तब गाय बाग़ जी मासी बणै, पंछी को बल्द मार ढोळ हणै । पंछी ल बंगार भेज बौड़ी, बागा ल मारी याल लैंदी गौड़ी द्य बाग़ मनू कू ऐगे सारी जत्था, इस्कूल्या नौनि मार एक्या गफा ।
बाड़ी लगूली लगुली लेटा, बाग बैठिग्या उड्यारा पेटा ।
बाग़ मना कि अब बात सूणा मर्च मिटै नि ऊँल दस दूणा ।
कूटो तमाखू, तमाखू धुसी, बाग मोरिग्या अब जनता खुशी ।
