सरगा गिड़कतलि सूंणिकै है जांद वींफर भिभराट करण बै जांद खिबणाट बांधि दींद मुंड फर मुंड्यसु पखड़ दींद हथ फर कुटळि अर बीजा कुटरी
चलि जांद पुंगडयों बणि जांद जिमदार बूति आंद रात भर भिजयीं मुंगरी छीमी, रयांस, कै बानिका बीज, सग्वड़ा मुंगरड़ो मा ढीस तिर्वाळ
पैंटि आंद छींजा, ठंगरा, झिकड़ा ये आस मा कि सरग बरखलो
पर सर खरांद सरग फर उड़ जंदी बरखा का बादल अर चम्म लगि जांद घामै चमाक
व असमान हेरद देखदी रै जांद बरखा जग्वाळम निरसे सि जांद।
