उनियाल निवास मा ह्वे भागवत ज्ञान की बरखा…..
रंत रैबार ब्यूरो…..
पौड़ी गढ़वाल। न्यू विकास कालौनी स्थित उनियाल निवास मा स्वर्गिय मदन मोहन उनियाल जी की पुण्य स्मृति मा 23 मई बटि 31 मई तक श्रीमद्भागवत पुराण ज्ञान यज्ञ कु आयोजन करेगे।
ये भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ मा व्यासपीठ पर आसन भगवत पीयूष आचार्य डा. सतीश कृष्ण नौटियाल जी न अपणी अमृतवाणी सि कथा मा श्रीमद्भागवत का ज्ञान की बरखा करि क कथा कु अमृतरस कु पान करे।
मोझदायिनी श्रीमदभागवत कथा मनखि क ये लोग अर परलोक तैं सुधारण कु सबसे सरल उपाय बतौंद आचार्य नौटियाल जी न बोलि कि मन, कर्म,
वचन सि यदि मनखि प्रभु का चरणों मा समर्पित हे जाव त वेकु जीवन ध्यान हे जांदावून बोलि कि काम, क्रोध लोभ
मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु छन वू पर विजय पाण कु एक मात्र सरल रस्त भगवत भक्ति छ।
आचार्या श्री न बोलि कि भागवत कथा एक कल्पवृक्ष की तरां कल्याणकारी होंद जै कु पान कन्न सि मनखि का सबि दुख दूर ह्वे जांदा अर जन्म जन्मांतर का पाप सि मुक्त ह्वे जांद।
कु सुंदर व्याख्यान करि। यांका अलावा आचार्य नौटियाल जी न कृष्ण अर सुदामा की मित्रता की कथा, जरासन वध, शिशुपाल वध अर सत्राजीत की मणि की चोरी की वून भगवान श्री कृष्ण की 1608 रानियों
कथा विस्तार सि बतै। ई सब कथा हमतै शिक्षा अर ज्ञान देण वलि छन। वून बोलि कि प्रकृति रूप मा हमतै जु तत्व जन कि पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल, वृक्ष आदि
जू 24 तत्व छन वु हर एक तत्व हमतें अलग-अलग शिक्षा दैदन कि हमतै अपणा जीवन तैं कै प्रकार सि सार्थक बणै सकदा।
आचार्या जी न बोलि कि भगवान का नाम की बड़ी महिमा छ। अजामिल जना पापी बि नाम जपीकि ऐ भवसागर सि पार पैगेन। ऐ वास्ता हमतें मनसा वाचन, कर्मणा एकाग्र ह्वे कि प्रभु का चरणों मा शरणगति ह्वे जांण चैद आचार्य नौटियाल न बोलि कि हमतै जु यु मनुष्य रूपी अमुल्य देह मिलि छ वु हमतें प्रभु चरणों का समर्पित कन्न चैंद। आचार्य नौटियाल जी न कलयुग की महिमा
कु वर्णन कर्द बतै कि कलियुग प्रभु कु नाम जपण सि द्वि भवसागर सि पार ह्वे जांदन। ऐ मौका पर पूरा उनियाल परिवार का सदस्य व भारी संख्या मा पौड़ि निवासी श्रोतागण उपस्थित छा।
