ठोस प्रयास कन्न होला……
हिमालय दिवस पर हिमालय का संरक्षण अर संवर्धन कु आहृवान करैगि। ये मौका पर जागरूकता रैली, संगोष्ठी आदि करेगे। क्या यॉसि हि हिमालय की रक्षा हे सकलि। हाल ही मा हिमालय का नैपाल जनि प्राकृतिक आपदा हमतै सचेत कर्द कि प्रकृति का दगड़ि जादन छेड़छाड़ ठीक नी छ यां विकास का नौ पर पहाड़ दगडि जु होणु छ वु ठीक नी छ यां पर विचार कन्नै जरूरत छ।
हिमालय एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र छ यख जु बि नीति बणै जावन वे मा स्थानीय लोगु की भागीदारी सुनिश्चित करे जाव। यांका अलावा पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हिमालय अनुसंधान, नवाचारों अर पबि हिमालय राज्य मा नीति निर्माण वास्ता एक समन्वित दृष्टिकोण की जरूरत छ। दिखे जाव त हिमालै हमर वास्ता जीवनदाता का रूप मा सन्ये जांद। हमर जीवन विः जादातर गतिविधि हिमालै का मिजाज पर निर्भर कर्दन। हिमालै सि ही बाढ़, हिमपात, भूकम्प अर प्राकृतिक संसाधनों को क्रम प्रभावित होंद, ये वास्ता भारतीय उपमहाद्वीप को वाटर पवर का नौ से प्रचलित हिधारी का संरक्षण वास्ता उच्च स्तरीय प्रयास करे जाण चैंदन।
पूरी तरां दोहन कनु सीख याज़ि। हम हर संभव वींका प्रदत्त सुविधों कि चाखिरी बूंद तक निचोड़ ले मानसिकता ल्हेकि चलणा छां। मनखिन पण दिमाग से प्रकृति कि हर सुन्दरता अर सुविधों को दोहन कन्न चांद। कुदरत जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी अर आकाश पांच तत्वों को संगम छ। हि पांच तत्वों से जीव, वनस्प ते अर भू-मण्डल-सौर मण्डल अर अनंत तिरिक्ष कि रचना होयीं छ। कर्कान्द्र मा क्की तत्व जादा छ त कखि मा कम।
आज मनख्यों न अपण स्त्रार्थपूर्ति का वास्ता प्रकृति का खज्यना को वींका प्रावधान अनावश्यक नी छन। जख जथगा-जै तत्व कि जर्वत सूस करे ग्ये ठीक वीं तरां से वेकि रचना करे गये। मनखि प्रकृति का यम कैदों से छेड़छाड़ कैरी वॉक संतुलन तैं बिगड़नै कोशिश कनू छ। पर “जादा दिन नि चल सकदी। यानि जखि कुछ अति होंद वो मनखि तैं पणु नियम बिंगै देंद। किलैकि हर नियम अपण जगा मा अटल अर यंसिद्ध छ। ये वास्ता मनखि कि हर कोशिश को क्लाइमेक्स बर्बादी कि ऐ जांद। यानि अव्यक्त रूप से वो खतरै घण्टी बजैकि बतौंद कि
यखि तक छ तेरी सीमा यांसे अगनै चलिल्यु त वो अतिक्रमण मने लो। अर हर अतिक्रमण कि सज्य वो स्वयं तै कर्द। वो कै ढंग से मनखि पाठ पढ़ौंद क्की नि बिंगे सकदो। क बे प्रकृति आपदा का रूप मा त कखि मारी का रूप मा कबि त कबि गृह संघर्ष का रूप मा वो मनखि तें वेकि ना का आभास करौणी रैंद पर मनखि यातें विज्ञान कि कसौटी पर कसी
सार्वभौम प्रक्रिया को नौ देकि कुदरत पर अपणु सिद्धांत थोपणै शिश कर्द।
