देहरादून। पर्यावरण कु मतलब हमारा चारों तरफ कु वातावरण जखमां कि भूमि, पाणि, हवा, डाला-बोटला, पशु-पक्षी अर मनखि सबि शामिल छन। पर्यावरण का बिना जीवन कि कल्पना भी नि करि सकदां पर आज कु मनखि विकास की अंधी दौड़ मां यु भूलि गै कि वु वै हि पर्यावरण तैं नष्ट करणू जै पर कू अस्तित्व टिक्यूं छ। कै बार स्थिति इनि होंद कि विकास ही विनाश कु कारण बणी जांद। हमारि संस्कृति मां पर्यावरण संरक्षण सदानि से पूजनीय माण्ये जांद। हमारा वेदों मां बोल्ये जांद ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ पृथ्वी मेरी मां छ अर मैं वींकू पुत्र छां। हम पीपल, बरगद, औंला, केला, आम, तुलसी की पूजा करदां, गंगा-यमुना तँ माँ माणदन। ज्यूंदा रण तैं भोजन, पाणी अर हवा जरूरी होंद।
प्रदूषण चार रूपों मां देखणक मिलद।
वायु प्रदूषणः गाड़ियों, फैक्ट्रियों कु धुआं, पराली जलौण आदि और निर्माण कार्य की धूल। अस्थमा, कैंसर और हृदय रोग तेजी से बढ़णा छन जु मानव जीवन तैं भौत ही घातक व जानलेवा छन।
जल प्रदूषणः* हमारी पवित्र नदियाँ आज नाला बणी गैन। आज गंगा कु पाणी पेण लैख नि रै।
भूमि प्रदूषणः बिजां रासायनिक खाद व कीटनाशकों का प्रयोग जमीन बंजर होणी। देश की राजधानी दिल्ली मां कै जगों कूड़ा का पहाड़ देखणक मिलदन।
शोर प्रदूषणः *शहरों मां लगातार हॉर्न, लाउडस्पीकर अर मशीनु कु शोर 85 डेसिबल से ऐंच पहुँची गै, जो हमारी सुणण की शक्ति धीरे-धीरे खत्म करि देंद।
प्रदूषण कु सबसे भयानक परिणाम च जलवायु परिवर्तन। पिछले 100 सालों मां पृथ्वी कु तापमान 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़िगे। ग्लोबल वार्मिंग बढ़णी, हिमखंड 20% तेजी से पिघलणा छन, समुद्र कु स्तर हर साल 3.3 मिमी बढ़णू। कबि राजस्थान मां बाढ़ औणी त कबि मेघालय मां सूखा पड़णू। पर्यावरण विनाश कु कारण जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण व औद्योगिकीकरण भि च। जंगल काटिक कॉलोनि, फैक्ट्री बणौणू प्रकृति पर्यावरण तैं घातक छ। उद्योगों कु विकास व बहुमंजिली इमारत बणौणक डाला काटिक कुदरत हैं विनाश का कगार पर लि जाणा छन। पर्यावरण बचौण कि खातिर सरकार अर समाज द्वियों तँ मिलिक काम करण होलू। यीं दिशा मां सरकार का साथ भौत सारा गैर सरकारी संगठन भी काम करणा छन पर पर्यावरण संरक्षण एक व्यक्ति या सरकार कु काम न हैक सबु तैं येमां अपणी भूमिका निभाणी चैंद या हम सबुकी नैतिक
