सरोज शर्मा (भोजन मूल शोधार्थी)
कबाब क नाम सुणद ही ये थैं पसंद करण वलों का गिचची मा पाणि ऐ जांद, टुंडे कबाब, हरियाली कबाब, पत्थर कबाब, शामी कबाब, इन्नी बनि बनि का कबाब भारत मा ही ना सरया दुनियाभर प्रसिद्ध च ऐकु इतिहास भि रोचक ही ह्वालु,
चलो जणदा छौं ऐक बारा मा ।
वेजिटेरियन से लेकि नान वेजिटेरियन पसंदीदा कबाब कु इतिहास,
मोरक्को क यात्री इबनबतूता क नाम त आपन सुणी होलू, वै क हिसाब से 1200 ऐडी से हि कबाब भारतीय खाण क हिस्सा च, लेकिन ऐ कि खोज तुर्की मा ह्वाई,
तुर्की मा कबाब कु कबूबा बोलदिन जैक अर्थ च बिना पाणि कु पकयूं मांस, हालाँकि भारत और अन्य देशूं मा कबाब नाम से ही जणें जांद, इन बोलदिन कि तुर्की सैनिक यात्रा क दौरान मांस बचौण क खातिर तलवारों मा मांस भूनिक कयी मसालों दगड खांद छाई,
ऐ क जिक्र 1337 मा लिखीं तुर्की कि किताब kyssa-i yusuf मा मिलद च,यू ही सबसे पुरण साक्ष्य च जखमा कबाब क जिक्र मिलद, खानाबदोश लोगों का जरिया से यू पूरी दुनियाभर फैल,
चंगेज खान कु भी कबाब खाणु पसंद छाई, इतिहासकारो क अनुसार जब भि सेना क दगड़ युद्ध मा जांद छाई तब वैकी पत्नियां सैनिको कु मांस प्याज चौंल मसाला बांध दींद छै ताकि विश्राम क दौरान तुर्को कि जन तलवार मा मांस भूनिक खै साका, चंगेज खां भि वी खांद छाई जु सैनिको खुण पकये जांद छाई,
16वीं शाब्दिक मा मुमताज महल क बेटा औरंगजेब न गोल कांडा मा जीत हासिल कैरिक सैनिको खुण कबाब बणवैन, पर तलवार मा भूनिक ना बल्कि ग्रेनाइट पत्थर मा भूनिक बणयै ग्या, अब मांस हि ना सबजियो और पनीर से भि कबाब बणयै जांद ,जैमा हरियाली कबाब, पनीर टिक्का, दही कबाब जना नाम प्रसिद्ध छन,वेजिटेरियन कबाब की खोज भारत मा हि ह्वाई, कुल मिलैकी कबाब हमर थकुला क सदियों से हिस्सा च।
