बांज वृक्ष वनीकरण से स्वास्थ्य पर्यटन विकास
उत्तराखंड में चिकत्सा पर्यटन रणनीति -151
उत्तराखंड पर्यटन प्रबंधन परिकल्पना – 254
संस्कृत /आयुर्वेद नाम – बांज
सामान्य नाम – बांज , फनल
आर्थिक उपयोग —–
केवल पत्तियां चारा
कई काष्ठ वास्तु निर्माण ,
कृषि यंत्र के हत्थे आदि
जल रुकाव
चीड़ से हानि से रोकथाम , भूसंरक्षण
गोंद
—–—औषधि उपयोग —
रोग व पादप अंग जो औषधि में उपयोग होते हैं
गोंद
पत्तियां
छाल
फल
बीज
रोग जिनके निदान में पादप उपयोगी है
मूत्र रोग निदान
दांत दर्द
बबासीर
दस्त
पेट शूल निदान
गोनोरिया
स्वास
अपाचन निदान
टॉन्सिल में गार्गल प्रयोग
सर्प दंस
शारीरिक कमजोरी
बाजार में उपलब्ध औषधि
पादप वर्णन
समुद्र तल से भूमि ऊंचाई मीटर – १००० से २४००
तापमान अंश सेल्सियस – १५ से २४ कभी कभी ३०
वांछित जलवायु वर्णन – छायादार किन्तु सामन्य शुष्क , ओस , बर्फ सहनशील
वांछित वर्षा mm- सामन्य
वृक्ष ऊंचाई मीटर -२५ -३०
तना गोलाई मीटर – . आधा तक जा सकता है
छाल -मटमैली खुरदरी
टहनी – पत्तियां व फूल टहनी पर लगती हैं , शाखाएं वाला वृक्ष
पत्तियां -सदाबहार , चमकीली , मोमदार जैसे , गहरी हरी , बाहर तीखे कोने
पत्तियां आकार , लम्बाई X चौड़ाई cm और विशेषता – ५ से १० cm लम्बी
फूल विशेषता -सफेद, पिलाई लिए –
फल – गुठली जो एक कप से ढके होते हैं
बीज /गुठली विशेषता, आकार , रंग – मटमैले सफेद भूरे
फूल आने का समय – वसंत
फल पकने का समय – नवंबर मार्च किन्तु गुठली वृक्ष पर कई महीने तक रहती हैं
बीज निकालने का समय – तुरंत निकलकर बुवाई सही
बीज/गुठली कितने समय तक अंकुरण हेतु क्रियाशील हो सकते हैं – एक साल
संक्षिप्त कृषिकरण विधि –
बांछित मिट्टी प्रकार pH आदि -अम्लीय , क्षार , बलुई
बीज बोन का समय – २४ घंटे पानी में भिगोकर मानसून , बीजों को सुखाना नहीं चाहिए व छाया में रखे जायँ , तोड़ने के तुरंत बाद बोये जाने चाहिए
नरसरी में बोते समय बीज अंतर – cm कम से कम ६ -१०
मिटटी में बीज कितने गहरे डालने चाहिए – cm गहराई = १० cm
नरसरी में अंकुर रोपण अंतर- ४ मीटर
बीज बोन के बाद सिचाई क्रम – सामन्य
रोपण हेतु गड्ढे मीटर x x कठिन होता है और एक या दो साल बाद बहुत ही कठिन
रोपण बाद सिचाई – सामन्य
नरसरी स्थान छायादार या धुपेली – शुरू में छाया
क्या कलम से वृक्ष लग सकते हैं ? हाँ
क्या वनों में सीधे बीज या पके फल छिड़के जा सकते हैं ? गोबर गोले बनाकर अधिक उत्पादक हो सकते हैं /अथवा कटे-पके फलों व बीजों को नदी या गदनों में बहा देना श्रेयकर , बांज को चरान , बीमारियों से बचाना आवश्यक
गिलहरी से बीज बचाने आवश्यक
वयस्कता समय वर्ष -१५ के बाद
