मनोरी दा अर्थात मनोहर लाल शाह जी पुत्र स्वर्गीय खीमानंद शाह जी। मनोरी दा की कथा करुणा व पीड़ा से भरीं कथा च।
मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) जसपुर भौत सा विषयों हेतु याद करे जाल।
मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) जसपुर को प्रथम विज्ञान म इंटरमीडिएट छन।
मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) प्रथम शिल्पकार छन जौंक बरात डोला पालकी क साथ गाँव भितर चल छे। गाँव म ही ना क्षेत्र म भी तनाव छौ कारण कुछ समय पािल क्षेत्र म डोला पालकी आंदोलन म द्वी वर्गों म भिड़ंत ह्वे छे।
मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) को जन्म सम्पन सुनार परिवार म ह्वे छौ।
मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) क चाचा श्री कालिका प्रसाद जी लखनऊ म शाश्कीय उच्च पद पर छा तो मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) शिक्षा वास्ता लखनऊ गेन। मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) पढ़न म हुस्यार छा। इंटर विज्ञान से सफल हूणो पश्चात मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) रेलवे म नौकरी लग गे।
दुर्भाग्य से नौकरी करदा करदा मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) की मनो स्थिति म अस्थिरता आण लग गे अर मनोरी दा घर ऐ गेन।
मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) घर म नकचुंडी निर्माण करदा छा जो देहावसान तलक करदा छा।
मि मुरारी दा को भक्त ऊंका कला से हों। मुरारी दा (मनोहर जी ) कलाकार छा अर कखिम बि चपड़ पटाळ या पत्थर मिल जाओ तो मनोरी दा मवाँ भित्ति चित्र विशेषकर भगवान का चित्र बणै दींद छा। मी पर बि कुछ कुछ इनि रोग छौ कि मि म्वासन पटाळ या दीवार म लिख दींदो छौ।
एक बार तो मथि पाणी से गुदड़ वळ रस्ता क भौत सा खेतों क दीवाल पर मनोरी दान चित्र बणैन।
जो भी हो मनोरी दा (मनोहर लाल शाह जी ) जसपुर को प्रथम विज्ञान म इंटर पास करण वळ म , प्रथम शिल्पकार जैक ब्यौ म पालकी व ब्योली क डोला गांव भितर से गे हेतु सदा याद करे जाल व एक रूपचित्रकार , कलाकार हेतु बि याद करे जाल।