(ई.प्र.उनियाल)
उत्तराखण्ड मा अब महक क्रांति होलि यानी संगध पौधों की खेती का जरिया किसानों की आय बढली। प्रदेश की कैबिनेट न उत्तराखण्ड महक क्रांति नीति 2026-2136 तै मंजूरी दियाली। दस साल की ई नीति का पैला चरण मा 94 हजार लाभार्थियों का माध्यम सि 22750 हैक्टेयर भूमि तै संगध फसलों सि आच्छादि कन्न कु लक्ष्य रख्यूं छ।
नीति का तहत किसानों तैं एक हैक्टेयर जमीन पर 80 प्रतिशत अर वै से ऐंच लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान दिये जालु। बतै जाणु छ कि पैला चरण मा 22,700 हैक्टेयर क्षेत्रफल पर काम करे जालू जैमा लगभग 1050 करोड रूपया कु टर्नओवर अर 91 हजार सि जादा रोजगार का अवसर सृजित होला। चमोली व अल्मोड़ा का डैमस्क रोज वैली (200 हैक्टेयर), चंपावत, नैनीताल मा सिनमन वैली (5200 हैक्टेयर), पिथौरागढ़ मा तिमूर वैली (5150 हैक्टेयर) हरिद्वार पौडी मा लैमनग्रास वैली (2400 हैक्टेयर) उध मसिंहनगर व हरिद्वार मा मिन्ट वैली (8000 हैक्टेयर) सम्मिलित छ।
प्रदेश मा संगध वनस्पति कि कास्तकारी किसानों कि आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकद। अनाज उत्पादन का बजाय अगर यखा किसान संगध पादपों कि खेती का प्रति दिलचस्पी दिखावन त वो जादा खुशहाल हवे सकदन। अबि तक प्रदेश मा जिरेनियम अर लैमनग्रास जनि सगंध पादपों कि खेती कैरी किसान अपणि आमदनी बढौणै कोशिश कना छन। यांक अलावा अगर वो लैवेंडर कि कास्त पर ध्यान देवन त वृंका वास्ता आमदानी बढ़ौणो नयु विकल्प साबित ह्वे सकद।
हिमालयी क्षेत्र लैवेंडर कि खेती का वास्ता अनुकूल छ। यखै जलवायु ये मामला मा जम्मू-कश्मीर का समकक्ष छ, प्रदेश का उच्चा हिवांळी क्षेत्रों कि लैवेंडर का पौधों न जंगळी जानवर नुकसान पौछोंदा अर न पालतू। यां खुण जादा मेहनत का अलावा जादा पाणि कि बि जर्वत नि होंदी।
बतौं जांद कि लैवेंडर का फुल्वी मांग देश विदेश मा अच्छी छ। यानि किसान तैं अपण उत्पादन कि मार्केटिंग मा जादा नि भटकण पड़लो। यख तक कि अगर उत्पादन जादा वे ग्ये त लैवेंडर से इत्र बणोण वळा व्यवसायी अपण आप गौं बटी खरीदी ल्हिजै सकदन। अव्वल त प्रदेश सरकार सगंध पादपों कि खेती पर पैलि बटी हि जोर देंद औणी छ। यानि किसान का वास्ता अपणु सामान बिकौण मा जादा मशक्कत नि कन पड़लि।
कश्मीरां किसान पैलि अनाज कि खेती कर्दा छा पर वांमा बैतें क्वी जादा फैदा नि हवे। किलै कि कड़ी मेहनत कना बावजूद वो अपण परिवार को भरण पोषण अंक्वे नि कस सकदु छौ। यांक अलावा वेका पास क्वी हौर विकल्प नि होण से किसान कि आमदानी सीमित हि रैंदी है। यांक बाद वखा कास्तकारों न लैवेंडर कि खेती कनि शुरू करि त यामां वूतें जादा पैसा मिल्न बैठ गये। आज जम्मू-कश्मीर का किसानों कि आर्थिकी को आधार बणी छ लैवेंडर कि खेती। उत्तराखण्ड का उच्चै वळा क्षेत्रों मा लैवेंडर कि खेती का अनुकूल वातावरण छ ये वास्ता यखा किसानों तैं बि लैवेंडर कि खेती मा दिलचस्पी ल्हेण चयेणी छ।
एकदा लैवेंडर का डाळा लगैण पर वो 15 साल तक फूल देणा रैंदन। किलै कि लैवेंडर का फुलु से हि इत्र तयार करें जांद। फुलु से निकन वळा तेल कि बजार मा कीमत 10 से 12 हजार रूप्य प्रति लीटर छ। यां से साबुन, शैम्पू, पेस्ट, केक, बिस्कुट आदि तैं खुशबू दिये जांद। प्रदेश सरकार द्वारा शुरू करिं महकक्रांति तैं किसानों वास्ता एक अच्छी शुरूआत बोले जै सकद। उत्तराखण्ड का किसानों तैं यीं तर्फ दिलचस्पी दिखाण होलि वो दिन दून नी छ जब वो राज्य कि आर्थिकी मा अपणु महत्वपूर्ण योगदान दे सकला।
