सरोज शर्मा (भोजन शोधार्थी)
पर्शिया से ह्वै कि बिरयानि भारत पौंच, फिर यखखि बस ग्या, जतगा सवदि हूंद उतगा ही इतिहास भि उतगा हि मजेदार च,आज हम निकलला बिरयानि कु ऐतिहासिक सफर मा, जख हम ऐ कु इतिहास क साथ साथ अलग अलग किस्मों क बारमा म भि जणला,
बेगम मुमताज महल से जुडयूं च ऐ क इतिहास,
बड़ा चाव से खयै जांण वलि बिरयानि पर्शिया से सरया दुनियाभर फैल, पर्शियन शब्द बिरियन जैक मतलब बणाण से पैल फ्राइ और बिरिंज यानि कि चौंल से निकल,
भारत मा बोलै जांद मुगल अपण डगढ़ भारत मा लैं, शाही मुगल रसोढ़ मा भि या बेहतर से बेहतर हूंद ग्या, एक कहावत क अनुसार बिरियानि बणाण कु क्रेडिट मुमताज महल थैं जांद, बोले जांद कि एक दा बेगम सैनिक बैरक मा ग्या वीन दयाख सबय सैनिक कमजोर दिखेणा छा, तब बावर्चीयों कु आदेश दयाई कि सैनिको खुण संतुलित आहार वल खाण बणये जा ,बेगम ल बावर्ची थैं आदेश दयाई चौंल और मीट क अहार बणये जा जै से सैनिको कू भरपूर पोषण ह्वा, ऐका बाद कई मसलों केसर मिलै कि बिरयानि कु जन्म ह्वाई, इन भि मनै जांद कि 1398 क आसपास तुर्क मंगोल विजेता तैमूर भारत मा बिरयानि ल्याई, हैदराबाद का निजामु मा या भौत प्रसिद्ध छै।
