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नई दिल्ली। गढ़वालि,हिन्दी अर संस्कृत का जण्यां-मन्यां विद्वान अर साहित्यकार ,गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान का संरक्षक पं.ब्रह्मानन्द कगडियाल जी कु निधन 6 दिसम्बर, 2025 खुणि वोंका निवास मन्दाकिनी अपार्टमेंट, दिल्ली म अचणचक ह्वेगे। कगाड़ियल जी का निधन से गढ़वलि भाषा, साहित्य अर संस्कृति कि इनी क्षति च जैंकि पूर्ति आसानी से हूणि संभव नी च. गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान का माध्यम से वूंल गढ़वलि भाषा,साहित्य अर संस्कृति कि जु सेवा करि वु अतुलनीय च.आदरणीय ब्रह्मानन्द कगडियाल जी कु जन्म पौडी़ गढ़वाल का सुमाड़ी गौं मा 2 नवंबर,1938 मा ह्वे छयो. ऊंका बुबाजी पं.अभयानंद कगडियाल जी संस्कृत का विद्वान अर भागवताचार्य छाया. आदरणीय ब्रह्मानन्द कगडियाल जी खुद बि शास्त्री,एम.ए.,बी.एड. छाया अर दिल्ली मा राजकीय माध्यमिक विद्यालय,सरोजनी नगर मा प्रधानाचार्य का पद से सेवानिवृत ह्वींन। सेवानिवृति का बाद आप भाषा- साहित्य व सामजिक सरोकारों का प्रति समर्पित छाया। आप लगातार अध्ययनरत व लेखन का दगड़ा-दगड़ी सामाजिक चिंतन व लोगों की मौ-मदद बि लगातार करदा रैंदा छाया।
पं. ब्रह्मानन्द कगडियाल जी गढ़वलि,हिंदी अर संस्कृत का बहुत अच्छा कवि तथा निबंधकार छाया. दगड़ि हि वु भौत अच्छा गायक अर रंगकर्मी बि छाया. सुमाड़ी कि रामलीला से लेकि दिल्ली का रंगमंच तक ऊंकि रंगयात्रा बि भौत उल्लेखनीय छयी। कुल मिलैकि आप हर विधा म पारंगत छाया। विशेषकर भाषा- साहित्य से आप तैं आजीवन लगाव रै। गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान का संरक्षक का नाते आप लगातार संगठन तैं ऊर्जा प्रदान करदा छाया। हर वर्ष उत्तराखण्ड साहित्योत्सव व पुस्तक प्रकाशन हो चा भाषा सेमिनार हो आपकु मार्गदर्शन व सहयोग बराबर मिल्दु छौ।
गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान का माध्यम से वूंल गढ़वलि भाषा,साहित्य अर संगीत का क्षेत्र मा अपणो उल्लेखनीय योगदान करि. गढ़वलि भाषा का साहित्यकार, नाटककार अर कलाकारों थैं प्रोत्साहन का वास्ता वूंन अबोध बंधु बहुगुणा साहित्य सम्मान, ललित मोहन थपल्याल नाट्य कला सम्मान अर मीरा गैरोला स्मृति संगीत कला सम्मान कि स्थापना गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान का अध्यक्ष श्री रमेश चंद्र घिल्डियाल जी का साथ मिलिकि करि. दगड़ि हि दिल्ली म हर साल ‘उत्तराखंड साहित्योसव’ की भि परिकल्पना करि. इना महान मनीषी अर साहित्यसेवी कु निधन अपूरणीय क्षति च. गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान,गढ़भारती अर उत्तराखंड लोकभाषा मंच वूंकि पावन स्मृति थैं नमन करद अर श्रद्धा सुमन अर्पित करद।
उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली बि स्वर्गीय कागडियाल जी तैं श्रद्धासुमन अर्पित करदा। मंच का संयोजक दिनेश ध्यानी कु बुलणु च कि आदरणीय ब्रह्मानंद कगडियाल जी हमरा समाजा एक भौत विद्वान व चिंतनशील मनीषी छाया। जीवन का अस्सी वर्ष पूरा कना बाद भी आप लगातार गढ़वाली भाषा कनक्वे संविधान की आठवीं अनुसूची म शामिल हो यांका वास्ता लगातार मंच तैं अपरु आशीर्वाद देणा रैंदा छाया। आपका निधन से हमुन एक यना विद्वान् मनीषी तैं ख्वे दे जु हमरि भाषा-साहित्य व समाजा महत्वपूर्ण स्तम्भ छौ। आदरणीय कगडियाल जी तैं सच्ची श्रद्धांजलि यी होलि कि हम गढ़वाली-कुमाउनी भाषाओं तैं संविधान की आठवीं अनुसूची म शामिल कना खातिर लगातार जतन करला व एक दिन हमरि भाषा एक दिन टकलगैकि जरूर एक दिन संविधान की आठवीं अनसूचि म शामिल होलि।
