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गढ़वाली जन की जनसंख्या लगभग पचास लक्ष तक है अतः नाट्य मंचन कन्सेप्ट कई तरह से समस्या से जूझता है। ऐसे में गढ़वाली रंगमंच विकास में प्रत्येक कलाकार का योगदान महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। गढ़वाली रंगमंच में धन की समस्या सबसे बड़ी समस्या है व कलाकार लगभग अपने खीसा से ही धन लगाकर रंगमंच विकास करते आये हैं।
आज हम गिरीश सिंह के योगदान पर विचार करेंगे।
नाम – गिरीश सिंह बिष्ट
पिता का नाम – श्री भैरव सिंह बिष्ट
ग्राम – लोदली, पट्टी साबली, बेदीखाल, पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड।
जन्म तिथि- 15/07/1968
शिक्षा – स्नातक, दिल्ली यूनिवर्सिटी
प्रथम नाटक – अर्द्धग्रामेशवर – 1986
– पैसा न धयला, गुमान . . .
– बाॅजी गौडी
– बांझ गाय
– लिंडरया छवारा
– आफत का टोला
– चमत्कार
– जय सिंह काका
– खाडू लापता
– चोर के घर मोर
– जय भारत जय उत्तराखंड
– अदालत
– कैकू ब्याऊ कैकू क्याउ
– वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली
– नीली छतरी इत्यादि
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