रावत जी (पड़ोसी) हे यौ, भैजी अचकाळ भौत कमजोर लगणा…
श्रीमती जी – यूँक वीं बौ न बोलि ह्लाळ तेमा कि म्यार द्ययूर को ख्याल नि रखदू मि जरूर, हैं ना.
रावत जी-ना जी ना. वो भाभी
तो बहुत अच्छी हैं, पर शरीर से लग रहे हैं. रिटायरमेंट से पहले हीरो लगते थे लाल सुर्क.
श्रीमान जी – ना भुला वो व्रत छ्याई न म्यार परसी महाशिवरात्रि को. तो..
श्रीमती जी – अच्छा तो मिन बोलि छै तुमते कि व्रत ल्याव. जब भूख नि साएँद. मिठू नि खाण, खडू नि खाण, बल, नखराट भि इन करदु यू आदिम..
श्रीमान जी – अच्छा, अर ब्याळी भि यीन दिन भर भुक्की राख मिते, बल म्यार चतुरदर्शी को व्रत च.
श्रीमती जी – हे भगवान, म्यार धरमु क हजार रुप्या क फल मंगाई छ्याई यूँ खुणी.
श्रीमान जी – मिन तो एक नि खाई. क्यापणी- क्यापणी फल छ्याई जो मि पसंद नि एकाबवाड़ा, श्रीफ़ा आदि पता नी क्या, हमतें तो नाम भि नि मालूम.
श्रीमती जी – मिट्टू फल बल नि खाण. इतगा मैंगू फल.. बल मि भूखी रौ. दिखणा ये आदिम तै तुम, कन बदनाम करणो हमतें.. जैदिन बिटि रिटायरमेंट ह्वे, परेशान हे गयों हम.
रावत जी तो आज तो कैरि याल खाणी – पीण भैजी.
श्रीमान जी – ना भुला, आज भी नि पके यीन बल आज सूर्य ग्रहण च बल. कुछ नहीं बनेगा आज भी..
रावत जी – पर वै ग्रहण को सूतक तो बल हिंदुस्तान मा छै हि नी. भैर देशों मा दिखेंण बल. अर फिर बुड्या, बीमार अर बच्चों खुणी तो सब माफ. तुम्हारी वा पुष्पा बौ हि बतौणी छै.
श्रीमती जी – दयूर जी, तुम यख यूँक वीं बौक तारीफ़ करणो अयां छवा कि.. हाल – चाल पूछणो.
श्रीमान जी – ठीक्क बुलणो भुला. भुला ! मि पर तो वेदिन बिटिक हि ग्रहण लगयूँ जैदिन अठतीस साल पैलि मिन यू डाव कार..
रावत जी – भैजी मि जांदु छौ, तुमार वीं बौक बल ब्रेड पकोड़ा बण्या छन. बुलाणी छै तुमते भी..
श्रीमती जी – दयूर जी अगर इतगो हि प्रेम आणू ये बच्चा पर तो आपर घार हि ली जा यूँ ते या वीं… निथर मि आफिक बणोळ आज यूँक भूक को पकोड़ा…
श्रीमान जी – हे ब्वे कन मोरि मि फिर आज.. भुला रुक जा कुछ देर,…
