विश्वेशर प्रसाद सिलस्वाळ
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श्रीमती जी -तुमार दिमाग़ खराब च क्य?
श्रीमान जी -दिमाग़ तो वे दिन बिटि ही खराब ह्वे जैदिन त्यार दगड़ यू डाव ह्वे.अब क्य ह्वे.
श्रीमती जी -तुमन मेरी भुली खुणी क्य ब्वाल फोन मा कि हम वींक बेटी क ब्यो मा नि आणा.
श्रीमान जी -अचकाल तो ब्यो बंद छन होलाष्टक छन.
श्रीमती जी -अरे, जादा नखरा नि करा. ब्यो तो बैशाखी खुणी च.
श्रीमान जी -अच्छा! मिन तो कुछ नि बोलि.
श्रीमती जी -अच्छा, तुमन ब्वाल बल..”कनके आण ब्यो मा मिन..मिमा पीलू कुरता हि नी…”
श्रीमान जी -अरे!मि तो स्याळी ते गाणा सुणाणु छ्याई अचकाल ट्रेंड मा च.. कि मि मा पीलू कुरता नि, कनके आण ब्यो मा, मिते छोड़ यीं ते द्यायख्या सुबेर पिलो, दिन मा नीलू, रात मा लाल साड़ी..
श्रीमती जी -तुमार गाणा को जबाब पता वीन क्य दे.
श्रीमान जी -क्या?
श्रीमती जी -“आणा हैं तो आ आओ, बुलाएंगे नहीँ ” फंड फुको पचास हजार न्योतो भिजवाओ ”
श्रीमान जी -इन भि हुन्द कखि, इतगा… न्योता.
श्रीमती जी -क्यों, अपनी बहिन की लड़की की शादी में तो तुमने नथ, साड़ी, अरे न्योता अलग से दिया था. तो मेरी बहिन की बेटी वो भी मेरी हुई ना..
श्रीमान जी -ये कोई बात हुई..मामा का फर्ज होता है नथ देना भांजी को..
श्रीमती जी -यूँ याँ अब कुछ ना, झट्ट पैलि तारीख म्यार हथ मा पचास हजार धेरी देन. तुम यखि राव, मि आपर भुला क दगड़ चलि जौल ब्यो मा.
श्रीमान जी -कन फंस आज, क्यापणी क्यापणी गाणा बणेक यूँ गायकोन हमार…
