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किसिम – किसिम का गढ़वळी व्यंजन
जुयाला घरम आज प्क्याँ छन
आवा भैजी आवा जी
जु बि तुमर ज्यू ब्वनू च
कीटि-कोटि क खावा जी
दस भेली की सूजी खैन्डी च. छै
नाली क खुसका पक्युं
दल्यां चणो की दाळ धरीं च पुवौं न
पुरो बिठलु भर्यु
हरीश जुमाल की गवाली मीजन याक विधि
भूड़ा-पक्वड़ा स्वाला अरसा, लड्डू
– पूरी, लगुड़ा-पटुड़ा
PORT
दड़बड़ी खिचड़ी, सड़बडु छ्न्च्या, चुनमंडो कु तौल धरयुं
आ ए दीदी, आए भुली, तु बिआए बौ उड़द रयाँसू की दाळ पकीं च डिगचा धरयां छन छवाड़ मा बासमती का चौंळ पकैकी तौला धरयां छन प्वार मा
लमींडा/ चचिंडा. ग्वदडि, छीमी, भिन्डी, लिंगुडा, खुन्तडा अर अचार राई, मूला, टुकुल, की भुजी तुमारो गिच्चाऊ खुण कर्यु ढुंगार
आ बोडी, आ काकी, आ मेरी समदण …
ग्थ्वणि, फाणु, गिंजडि पकीं चा भदवला छन भोरिक फरफरी कौणि का भडू धरयां छन दाळ पकीं च तोर की
मूला की धिंचवणि, पलिगौ धंपड़ी, लया की चटणी, चून कुं रोट
डूवळणि – झन्नावरु मरसा की भुजी कंड़ळी-बाडि घोट्म घोट
आ ये पौण
अल्लू क गुटका, ग्युं क फुल्का, निरपाणि की खीर पकीं गैथु का भरवाँ रवटलौं समणि घी की माँणि धरीं
तैडु गीन्ठी क परता भ्याँ छन ज्ख्या तुडका मा खूब भूटयां छन ग्वीराळ, सकीना, बेथु, बसिंगू, बंसकला ल्हेकी छन खुडक्यां सिंगनि का ग्वबका घन्डाघोर, कुख्ड्या च्यूं का डेग धरयां तिमला दाणी, खडिका टुक्कू, रौला प्फ्डी की भुजी बणी टिमाटरूं कु झोंळ बन्यून च तुमारो खातिर झळ लगीं आवा कक्या सास जी, बड्या सास जी… तू बि आ स्याळी जी पीणा खुणी छांछ धरीं च, छांची मा नौणी गुंकी घ्वलिँ चटणा-खुणि आमे चटणि चटपटि, चसचसी, चटणि चिन्नी घ्वलिँ फल फ्रूट मा लिम्बो क्छ्बोळी, पपीता खावा लूण रल्यूं गल्ल प्क्याँ छन बेडु तिमला लूण दगड तेल रल्यूं हैरी कखड़ी मा चिरखा दियां छन, भरवाँ लूण की चटणि पिसीं हिसर, किन्गोड़ा, करंडा, बिरन्गुळ, खैणा, हरड़, बयड़, किम्पू टीपी टीपी तँ ढवकरा भ्याँ छन काफुलू की कंडी भ्वरीन
घिन्धोरा, मेंलु, आडु, आम, औंला, बेर दळम्याँ, बिजवरा
सेब, संतरा, घर्या क्याला धाई लगाणा
आवा भैजी, अव्वा जी
सौंप सुपारी की जगा म्यारा सुप्प भयौँ छन चूड़ा अर खाजा से
अखोड़ धरयां छन च्यडाउन दगड़म भन्नञ्जीरो, तिल खूब रल्यां काला भट्ट का खाजा भुज्याँ छन कौन्यालुं का कुटरा ख्ल्याँ
मरसा क खील, ग्युं टाडा, मुगरी भूजिक ड़लुणा भ्रयाँ छ्युंती म्याला, ब्वदला टीपिक, सुरजा कौंला धरयां तुम खुणि बात हिटा को गुजारो कर्यु च भ्न्गुला तुमड़ा भ्रयाँ तुम खुणि
किसिम किसिम का गढ़वळी व्यंजन जुयाला घरम आज प्क्याँ छन
आवा भैजी आवा जी
जु बि तुमर ज्यू ब्वनू च
कीटि-कोटि क खावा जी
