( संदीप गढ़वाली )
मि एक कवि छौ अर लेखक बि अर साहित्यकार बि बल इन मी दगडा लोग ब्वल्दीन ।
मिन बि सोचि यार इतगा गुण छन् म्यारा भितर अर मीथै पता नीच । क्यो ना वां कु फैदा उठये जा ।
सचै या च कि यु नेम फेम कु चक्कर मा साहित्यकार हो कवि हो वो द्वी शब्द सबसे पैली रटद । पैली अफु खुणैं हैंको मुख बटि वाह ! वाह अर हैंका खुणैं अपणां गिच्चा बटि भौत सुन्दर ।
एक गद्या लेखन करण वळा साहित्य कार कु संदेश दियूं छाई ,
रात्रि में .पिताजी हमें छोड़कर चले गये सुबह शोक सभा रखी गई है । समझ में नहीं आता कि आपको कैसे उनके योगदान बताऊं । आशा है आप हमारे संग इस दःखद घड़ी में साथ होंगे।
स्थान – निजि आवास समय आपकी इच्छानुसार ।
मिन बि मुड़ि बटि लेखी वाह भौत सुन्दर जबरदस्त लेखनी बहुत ही मार्मिक चित्रण बधाई आपको ।
वैन बि जबाब लेखि भैसाब धन्यवाद अयां जरूर ।
मिन ब्वाल टैटल क्याच ?
बल – हैं ?
मिन ब्वाल यार एक यूं छुट्टा सैत्यकारू दगडि ई दिक्कत च ई अंग्रेजी कम समझदींन । अरै भै नाम क्याच ?
बल _ स्व घुरच्याट सिंह
मिन ब्वाल – क्वी सब टैटल बिच ? याने उप नाम
बल हां – लम्पट बि ब्वादा छाई लोग ।
मिन ब्वाल – चीफ गेस्ट को छन ? कार्यक्रम की अध्यक्षता कैन कन ?
वो ब्वना – कन चीफ गेस्ट ? कन अध्यक्षता ?
मिन ब्वाल – हरै कल का सैत्यकार गढ़वाळी की सैत्य यात्रा पर सवाल कनू । मिन गुस्सा मा अरे तेरी किताब विमोचन कु कार्यक्रम मा ।
बल आप ब्वना क्य छौ गढ़वळि जी ? कु किताब ?
मिन ब्वाल – घुरच्याट
बल अरै वो म्यार बाबा कु नौ च । अर वो शोक संदेश छाई ।
मिन ब्वाल अरे भाई क्षमा प्रार्थी छौं ह्या हम थैं जब बि बुलान्द क्वी विमोचन मा या कवि सम्मेलन मा बुलांद वी आदत प्वड़ींच । बकै कैकु स्वास्थ कैकु दुख दर्द से हमथैं खास लगाव नि रैंदु । हमर सिर्फ भैचारा मंच बटै ही मैक का समणि दिखेंद बकै त तु कौन अर मै कौन ?
अर ह्या भै का सौं आज तक कैका म्वन मा या शोक सभा मा क्वी कवि सम्मेलन नि ह्वाई इलै हम जना बड़ा सैत्यकार समझदौ कि क्वी म्वरदु नीच ई दुऱ्या मा । असल मा एक सैत्यकार हूंणा वजै से मिन लोगु का द्वी रूप दिखिन भैर कुछ अर भितर कुछ ।
एक भैसाब त मिन इन दिखीं जो मंच बटि ब्वना हमथैं नारी कु सम्मान करण चयेंद । अर वैका घार ग्यो त अपणि घरवळि थैं छाई लत्यांणू ।
ईलै भैसाब नाराज न हुयां उन तुमरि लेखनी जबरदस्त च भौत सध्यूं हथ च गद्य मा तुमरु एक सीनियर हूंणा नाता ब्वनू छौ हैका दा अगर तुमर बबा म्वारलू त ये शोक संदेश थैं हैरि भी सुन्दर अर मार्मिक ढंग से ल्यख्यां ।
वो ब्वनू – चुप ( बीच मा दस बीस सुन्दर सुन्दर कानफोडू गाळि) द्वी बचन वाह वाह अर भौत सुन्दर क्या सीखयळीं अफु थैं भौत बडु विद्वान चिताणू छै । अबै तुम सैत्यकार न स्वंयहितकार छौ तुम विद्वान न भाषा खुणै बिघ्न छौ । शोक संदेश मा बि मीन मेख निकलणां छौ ।
अपणु तै ज्ञान अफुमै धैर ।
मीथै इतगा गाळि देण का बाद आखिर दा वैन जो सादर प्रणाम अर आभार आपक बोलि जो साहित्यिक शब्दों मा बात कु अंत काई मन गद गद ह्वै ग्याई। मिथै वैमा भौत सम्भावना दिखेणी भविष्य की ।
