गढ़वाळि बाल कहानी
अनिता तैं जबरि नौना वळा दिखणा ऐन तब टिपड़ा मिलणा बाद नौना-नौनी की बात है ता अनिता न बोलि छौ कि मिल बीए की पढ़े पूरी कैरिकि फिर बीएड करण अर वांका बाद बाद नौकरी करण। तबरि नौना ला बोलि कि ठीक छ तुम जतगा पढ़ण चंदौ अर ज्या करण चंदौ मिर्ते व म्यारा घरवळों तैं क्वी परेषानी नी। अनिता की ब्वे ला बि वींका सासु-ससुरा म बोलि कि जब नौना-नौनी हैं एक दुसरू पसंद छन अर हम लोग बि राजी छेवा, टिपड़ा वि भलु कैकि मीलिगैन ता मि एक बात बुलण चांदु कि मेरी अनिता तैं खाणु से बिण्ड्या पढे पसंद च। वॉक सुपिन्या कि व टीचर बण। इलै ब्यौ का बाद वीकि पढ़े नि रूकणि दिया। तबरि वींका हुण वळा सासु-ससुरा ना एक सुर म बोलि कि हां जी हमतें क्वी परेशानी नों। हमरि ब्वारि खूब पैढि लेखी नौकरी कार यां सक हमतें खुशी होलि। हमुन ता शहर म ही रैण ता यख क्वी परेशानी नी। अनिता का बुबा जी न बि बोलि कि समधी जी अब ता रिश्ता पक्कु समझा। ता मेरी अनिता तैं आप पढ़णि दिंया अर नौकरि करण दिया। वींका सासु-ससुरा न एक स्वर म बोलि कि हां जी टक लगैकि। छ
बड़ा धूमधाम से अनिता कु व्यौ हे छौ। किलै कि व अपणां ब्वे-बाबू ब्वे-बाबू कि कि तीन द्वी भयों कि यकुलि भैण है। है। इलै अपणि हैसियत से बढ़िकि वींकु ब्यौ हे। अनिता का जवै कु बि अपणु खानदारी कारोबार छौ। दिल्लौ जना शहर अपणु घौर, दुकान सौब कुछ छौ। बेटी का ब्यौ से अनीता का ब्वे-बाब अपणां पर्या सौब खुष छाया।
अर ब्यौ का बाद हे बि बिवन्नि छ। न अनिता ला अपणि पढ़ें पूरी कारि। वांका बाद वीला बीएड कैरि। अर देहरादून जैकि अपणु पंजीकरण करैकि नौकरी जग्वाळ करण बैठिगे। ये दौरान वींका तीन साल कना बीति गेन वीं त ही खुद पता नि चलि। कुना बोलिगका केही खुद पतरदा करदा राधा तै विष्वास हेगे छौ कि अब वींकि नौकरि लगि जालि ता वीर्ते बि अपणा खुटों पर खडु हुणा सांसु मीलि जालु।
दिन-मैना साल बितणा रैन। ये दौरान अनिता का खुचलिवोंदा एक नौनु वि ऐगे। अब वो द्वी साल के होंदा। अनिता तैं नौकरी कि जग्वाळ अज्यों बि छै। पांच साल कि गृहस्थी राजी-खुशी चलणीं है। पति भौत मेनती अर सासु ससुरा जी वि भला मिल्यां छाया वींतै। मतलब सौब तरपां बिटिन बढ़िया छौ। बि
मेहनत कु फल
बतौण लग्यों छौ तन्नि वींकि सासुला आवाज लगैकि हे रमेशा इनौ औ जरा बात सूणी।
अनिता कि सासु ला बोलि कि ब्यटा रे बल सीं ब्वारि कि नौकरी लगीं छ वे उत्तरकाशी का मुलक। झणि कख हो वु भटवाड़ी। हमुन ता अमणि तक यु नाम सूर्णि बिनी।
रमेशा ला बोलि मां य ता भौत बढ़िया बात छ। वीं कि मेनत सफल हेंगे।
अरे लाटा मेनत सफल ता द्वेगे। पर अब यु त्यारू नौनु इस्कूल जाण जुगा होंदा अगला साल। तुमरू तुमरू घर-गृहस्थी कैल समळणां? जब व् व नौकरी कना चलि जालि ?
रमेश ला बोलि कि मां क्वी बात नी सौव एडजस्ट हे जांद। बैठिकि बात करदौ अर क्वी समाधान टक लगेकि मीललु।
वेकि ब्वे ल बोलि कि इनां सूण हमरा खानदान कि क्वी बि व्यतुलु नौकरी म नि गै अज्यों तलक। अर घौर से इतगा दूर पर्या मुलक ? न ब्यटा न रै। मेरी मान ता हमरि ब्वारि ला कतै नौकरि नि करणि। सौ कि सूणि यालि। बोलि दे वीं व्वारी म। हमसे नि हृदि अर त्यारा नौना कि छौन छंगेट अर यीं गृहस्थी कि खटापट । किनौ
सासु अर अपणा पति कि बात अनिता ला सूणी यालि छै। इलै वीं तैं पक्कू विष्वास हेंगे छौ कि अब नौकरी नि जयेदु। इनां रमेष ला ला खाणु खाणु खै खै अर अर वो अपणु कमरा म ऐगे। अनिता ला भारी मन से खाणु खै अर भांड़ कुंडा मजेकि अपणां कमरा म ऐगे।
अनिता ला अपणां पति तैं व चिट्ठी दिखै। अर बोलि कि इतगा साल कि मेनत का बाद मेरी नौकरी लगीं अर सासु जी मना करणां छन। ब्यौ से पैलि ता तुमरा घौर वळीं न बोलि कि क्वी बात नी पढ़ें कैर-चा नौकरी कैर हमतें कब्बि बि क्वी परेशानी नि होलि अर अमणि जब सरकारी नौकरी लगणीं ता मना कुना छन ।
रमेषा ल बोलि कि बथै छन त्वे जु तेरी मेनत से य टीचर की नौकरी त्वे मीलिगे। लेकिन या हम अपणां ब्वे-बाब से भैर जैकि क्वी बि फैसला नि ले सकदा। वु हमरा ब्वे-बाब छन ता वो हमरू बुरू ता नि सोचि सकदा। तबरि अर अवरि म भौत फरक छ। तब ब्यौ नि ह्वे छौ अमणि हमरू एक बच्चा वि छ जु इस्कूल जण्यां हेगे। दुसरा हमरा ब्वे-बाब बि बुढ्या होणा छन। इलै हमतें से सस्तैकि क्वी फैसला करण पोड़लु। ब्वे खूबी ता बुनी छ कि इतगा दूर हैंका मुलक कनक्वै करण तिन नौकरी ? कैन समळण हमरि
गृहस्थी अर सब कुछ पैसा त नि होंदा। ता तुमरि बि वीं सोच छ ज्व तुमरि ब्वेकी
है। वींका आंसू छाया कि रुकणा नि छाया। आखरि सारू बि गै। अब अनिता हैं पक्कु पता चलिगे कि यखा सब्यि मनखि एकन्सी छन। हाथी का दांत खाण हौरि अर दिखाणा का हौरि। अब ता कुछ नि है
सकदु। अनिता का ससुरा ला बोलि रूणी किलै छै? कुछ ता बोल ?
अनिता ला रूंदा-रूंदा बोलि कि पिताजी सासु जी ला अर योंला वि मना कैरि यालि। आखरी सारू तुम छाया ता तुमला बि ना कैरि दे ता अब रूण नी छ ता क्या करण मिल ? इतगा साल मेनत कना बाद नौकरी लागि छै अर सौव तां बिटिन ना हेगे। हेगे। बोलिकि अनिता चुप हेंगे।
अच्छा यों यों द्वी मां-बेटों ला बि मना यालि ? अनिता का ससुरा ल बोलि। अनिता ला हां म मुंड़ हिलै पर बोलि कैरि कुछ नी।
अनिता का ससुरा ला आवाज लगै अरै रमेष इना औ जरा अपणि ब्वे हैं वि ल्हेकि ।
रमेष अर वेकि ब्वे झट कमरा म ऐगेन। वॉल द्वी ससुरा-ब्वारियों की बात कंद्वरा लगैकि सूणि यालि है।
अनिता का ससुरा जी न बोलि कि व्यटा रमेषा त्वे पता होलु ही कि ब्वारी कि नौकरी लगिगे बल उत्तरकाषी का भटवाड़ी
ब्लौक म ? हां पिताजी।
इतगा म अनिता की सासु ल बोलि कि नौकरी लगिगे ता क्या है? हे? हमुन यीं ब्वारी म न त नौकरी करवाणा अर न उतगा दूर वे मुलक भ्यजणां। अरे हमरा खानदान में कै व्यठुला अमणि तक नौकरि त क्या घौर बिटिन भैर खुद्ध नि नि निकाळि। अर या छ कि ल्हे वो बल उत्तरकाशी का मुलक जाण नौकरी करणा। रमेशा बुबा तुम द्वी ससुरा, ब्वारियों कि बात मिन सूणि यलीन। तुम बि खूची बुना छौ कि ब्वारी ला नौकरी नि कन। परिवार कैल समळण ? इलै यी
बात तें यखमी समाप्त समझा। व्यटा रमेषा तेरी क्या राय छ ? अनिता का ससुरा न बोलि।
