घुघूती… घुघूती… घुघूती…! सुनार काका! तु आज भौत खुश दिखेणू छै। अमणि आमदनि बढ़िया ह्वेग्ये मिजाण ।
‘ आमदनि त न घुगती, परंतु आज मि ‘लुटण से बच ग्यों। अपड़ि चीज हैंका हाथ मा जाण से बच ग्ये त वो बि एक आमदनि ही समझा।’
‘कनु ? तु कन बच ग्ये ! जरा खुलिक बथौ काका !!
‘ अरे ! क्या बथौं घुगती ! ‘मितै त बथाण मा बिहांसस आणि।’ काकन जोर से हंसिक ब्वाल, ‘ह्वै इन च कि ब्याली मेरी डुकनी मा 76 साल की एक दानी बुढदी अयीन है। देखन मा भारी धन लाभ वोली लगणी रै। वथका दगड़ी तीन चार आदिम होरी छै.व बड़ा इत्मीनान से भन भनिक गाना देखनी छै. मिन स्वच्छ कि आजमोती असामी आयं च त भांड्या शॉप कार्ली।’
घुगतिन जोर जोर से अपड़ा पंख फड़फड़ैक ब्वाल, ‘ तब त काका ! तिन बढ़ चढ़िक वींतै गैणा दिखै होला।’
‘हां हां, मिन अपड़ा दुया सहायकों से बि भितर बटेक गाड गाडिक गैणा ल्याणक ब्वाल। वो त भलु ह्वे कि एक की नज़र वींका दगड़ि अयां एक आदिम पर पोड़ ग्ये, जोकि एक जंजीर लुकैक भितर कीसा पर धरणू छै। वेन वेको हाथ पकड़िक हल्ला कार त वो उल्टा हम पर नाराज ह्वेकी भाज गिन कि तुम हम पर चोरी कु झूठु इल्ज़ाम लगाणा छवा।’
तब त तु भौत बड़ा नुकसान से बच ग्ये काका ! ‘अगने सूण। वो श्याम दा एक हैंकी दुकान मा चल गिन। रुमुक पोड़ण का बाद वे दुकानदार तैं कम दिखेंद, येकी फैदा उठैक ऊं दुष्टों न कुछ गैणो पर हाथ साफ कैर द्ये।’
दरे…! त काका तिन वे टैम पर
पुलिस से शिकैत नि कार।’
‘न घुगती ! शिकैत त नि कैर साक।’ वेन कुछ खिसियैक ब्वाल ।
‘किले ?’
‘दिमाग मा नि ऐ। फिर मिन स्वाच कि जब मि बच ग्यों… मतलब वो कौन से यखम बैठ्यां होला। जणि जख भाज ग्ये होला।’
‘ तुम मनखियों की ई त बुरी आदत चातुम सिरफ अपड़ आप से मतलब रखदौ । तुम सोचदौ कि कै बि हालत मा अपड्डु नुकसान नि हूण चैंद। ‘
‘ अरे घुगती ! त्वी बि हमारी चार तंज कस दींद, निथर इतगु खराब बि नि छौ हम ।
हां कबि कवि भूल या लापरवै हे जांद वास्ता दिमाग मा बात नि आंद । ‘ नाराज न हो काका ! मिन ठठा कार। तुम वजह से सरा संसार बच्यूं च । तुम नि हो कुछ नि ह्वाव। कैते भोजन नि मील।’
काकान मुस्करैक ब्वाल, ‘कैर, त्वेखुणि कुछ खाणक लेकी औंद।’
‘ न काका ! अबि न । अबित पुंगण बटेक बियां टीपिक आणू छौं। ”
क।’
अच्छा…! त अब अपड़ा फतेल मा जैली।’
‘ हां। रस्ता मा तुमारु गौं जैकी बोड ब्वाडा तै य खबर सुणौलु ।’
काकान हैंसिक ब्वाल, ‘मतलब ऊंमा झगड़ा करौण जाणी छै।’
घुंगतिन जोर जोर से अपड़ा पंखा फड़फड़ें।
‘वो त ऊंमा बात बेबात उनि हूणू रैंद काका।’
‘जा जा. ‘तेरी या खबर सुनिक वेको क्या असर ह्वे, मिटै जरूर बथै।’
घुगतिन मूण हिलैक उड़ान भ्वार।
डा. आशा रावत
