रंत रैबार ब्यौरो…..
उत्तराखंड मा बढ़ती गर्मी, सूखा मौसम अर तेज हवाओं का कारण बणों मा आग विकरला रूप लेंद जाणी छ। गढ़वाल सि लेकिन कुमौं तक क वनक्षेत्र बणांग सि प्रभावित छन। वन विभाग का अधिकारियों का अनुसार 15 फरवरी सि अब तक राज्य मा बणांगै 193 घटना दर्ज ह्वेनि। यं घटनाओं मा 150 हैक्टेयर सि जादा वन क्षेत्र प्रभावित ह्वे। याकु जादा असर गढ़वाल क्षेत्र मा दिखेगि।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछला दस साल मा राज्य मा बनगन की यादें मा 29 लोगु की मौत, अर 79 लोग झुलसे हुए की घायल ह्वेनी। बताय जांद कि हर साल औसत दो हजार हेक्टेयर सी जादा वन क्षेत्र आग की चोटी मा आणु छ। कटी बार तक आग इथगा विकराल रूप ले लेदी किश्त की चोटी मा गौ का मनखी बी ऐ जांदन। इनी काति घटना ह्वे गेनी जमा गांव का लोग व वन कर्मी झुलसी की मेरी गेन।
हाईकोर्ट न बि फायर सीजन का दौरान जंगलों मा आग लगनै संबंधी घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेंद कुछ सुझाव दे ग्येन। जनकि सीजन शुरू होण सि पेली फायर लाइन कटै जावन, अगै कि छोटी-छोटी घटनाओं पर बि ड्रोन सि नजर रखे जाव। यांका अलावा स्थानीय लोगु की बि ये काम मा मदद लिये जाव ताकि पर्यावरण बचै जै सकु!
बणांग कि घटना जिम्मेदारों का अलावा सिस्टम का वास्ता बि चिंता का कारण बणद जाणो छन हालांकि ह्यूद्या मैनों मा बि बणाग कि घटना समणि औणी रैनि पर वो यिथगा चिंताजनक नि छै। गर्मी शुरू होदै। स्थिति जादा गंभीर ह्वे जांद या पर सरकार और विभागीय जिम्मेदारों तैं सकारात्मक विचार कन चयेणू छ।
हालांकि सरकार पूरा साल तैं अग्निकाल घोषित कर चुकि अर दावा कनी छ कि यीं आपदा से निबटणौ बींन पूरी तयारी करीं छ। बावजूद यांका स्थिति गंभीर होंद जाणी छ। हालांत यि छन कि कुमाउं बटी गढ़वाळ रीजन तक का बणों मा अग्यां कि घटना होंद जाणी छन।
यख तक कि कथगै जगौं बणाग आबादी तक पौंछ ग्ये। अगर यीं समस्या से निबटणु सरकार कि प्राथमिकतों मा गिणे अर बणाग से निपटणु 10 हजार कार्मिकों कि नियुक्त कि बि बात करि। यूं मुद्दे आधा संख्या मा जनानि होलि। वो यिलै कि जनाना जंगल अर बणाग कि संस्कृति से अच्छी तरां वाकिफ होंदन। वूतें विशेष प्रशिक्षण देणै बि जर्वत नी छ। वन बि जनान्यू को बणों से जादा सम्पर्क होंद। साफ सि बात छ कि जंगळ तैं आग से बचौणी वो पूरा दायित्व से प्रयास करलि। राज्य मा 71 प्रतिशत भूभाग घना बण छन अर यु जैव विविधता वास्ता अत्यंत महत्वपूर्ण छन।
हर साला बणांग सि वन संपदा तैं भारी नुकसान होंद या का अलावा वन जीवों का दगड़ि पर्यावरण अर स्थानीय लोगु की आजीविका बि प्रभावित होंद। यांका वास्ता स्थानीय लोगुं तैं अगनै ऐकि काम कन्न होलु। ये काम मा युवा मंगल दल, महिला मंगल दल, एन.सी.सी. अर.एन.एस.एस कैडेट्स, एनजीओ पंचायत प्रतिनिधि, ग्राम प्रधान तैं ये काम वास्ता जागरूक होण होलु। वनाग्नि तैं रोकण वास्ता चाल खाल तलैया अर अन्य प्रभावी उपायों पर काम करे जाण चैंद, ताकि जमीन का नमी बणी रै ये काम मा
जलागम विभाग कु सहयोग लिये जै सकद। यांका अलावा वनाग्नि नियंत्रण
मा आधुनिक तकनीकों जना सैटेलाइट मॉनिटरिंग, ड्रोन सर्विलांस, रिमोट
सेंसिग अर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फायर डिटेक्शन सिस्टम कु
उपयोग करे जै सकद। वन विभाग कु बुन्न छ कि संवेदनशील इलाकों मा फायर लाइन बणै जाणी छ। अर निगरानी बढै जाणी छ पर यु काफी नी छ यांका वास्ता ठोस कदम उठाणा होला।
