नई दिल्ली। खुणि उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का तत्वावधान म व गढ़वाल हितैषिणी सभा, गढभारती व उत्तराखण्ड फिल्म एवं नाट्य संस्थान का सहयोग से गढ़वाल भवन, नई दिल्ली म उत्तराखण्ड का कालजयी लोकगायक, गीतकार, नाटककार जीत सिंह नेगी तैं याद करेगे। ज्ञातव्य हो उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली नेगी जी कु शताब्दी वर्ष मनाणु छ। यीं श्रृंखला म लगातार आयोजन हूंणा छन। नेगी जी की पुण्यतिथि का मौका पर ये आयोजन म नेगी जी का गीतों, कविता व संस्मरणों से नेगी जी तैं याद करेगे। ये मौका परैं कै साहित्यकार, पत्रकार, गायक, समाज का प्रबुद्ध लोग समेत नेगी जी का परिजन बि उपस्थित छाया।
उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली एक संयोजक दिनेश ध्यानी ला बोलि कि स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी शताब्दी वर्ष समारोह आज बिटिन शुरू ह्वेगेंन। हमरी कोशिश रालि कि पूरा साल नेगी जी परैं कुछ न कुछ आयोजन हूणा राला। ये बीच म जीत सिंह नेगी शताब्दी समारोह समिति कु गठन करला ताकि सब आयोजन सुचारु व बढ़िया कैकी सम्पन्न होवन अर अगला साल 2 फरबरी, 2027 खुणि विराट आयोजन होलु। श्री ध्यानी ल बोलि कि स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी बि चांदा छाया कि गढ़वाली, कुमाउनी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची म शामिल होवन। इलै हम लगातार कोशिश कना छौ कि सरकार गढ़वाली, कुमाउनी भाषाओं तैं संविधानै आठवीं अनुसूची म शामिल कार। श्री ध्यानी ल बोली कि स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी ही वो सौब से पैला गायक छाया जौंका का गीतों का ग्रामोफोन रिकॉर्ड 1949 म यंग इंडिया ग्रामोफोन कंपनी न सौब से पैली जारी करीं । स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी रेडियो का बि सौब से पैला गढ़वाली लोकगायक मने जांदन। आल इण्डिया रेडियो बिटिन भी नेगी जी का गीत व नाटक ‘शाबासी मेरो मोती ढांगा’ सौब से पैली प्रसारित ह्वेन।
ये मौका परैं संगीतकार राजेन्द्र चौहान ल बोली कि नेगी जी परैं यना आयोजनों म हम तैं बि शामिल करेजान्दु ता बढ़िया होन्दु, हम नेगी जी परैं सांस्कृतिक आयोजन बि कैरि सक्दो। माता पार्वती देवी चैरिटेबल ट्रस्ट का अध्यक्ष बरिष्ठ समाजसेवी महावीर सिंह राणा ल बोलि कि हम तन, मन, धन से उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच का दगड़ी छौ। कोटद्वार बिटिन अयाँ शिक्षाविद डॉ कलम कुमार ल बोलि कि ध्यानी जी अर ओंका दगड़ी जुड्या साहित्यकार लगातार आपरी भाषा कि सेवा कना छन। हम भी ये यज्ञ म अप्रु सहयोग देणा तैयार छौ। वखि बरिष्ठ पत्रकार, हिमालयी लोग यू ट्यूब चैनल का संयोजक डॉ हरीश लखेड़ा ल बोलि कि इना मंचों से जब क्वी बात समाज म जांद ता बडु प्रभाव हूंदा। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की पुत्री मधु नेगी अपणा बुबा जी का संस्मरण अर ओंका गीत द्वारा माहौल भावपूर्ण कैरी दे। बरिष्ठ रंगकर्मी, कवि उमेश बंदूनी ल अपणा संस्मरण सुणाई। युवा कवि संदीप गढ़वाली ला बोलि कि राजेंद्र चौहान जी अपरा महाकौथिग म एक दिन कु आयोजन स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी पर राखला ता शताब्दी वर्ष म सच्ची श्रद्धांजलि होलि। जैकु सौब लोगों समेत राजेन्द्र चौहान जी ला समर्थन कैरी। बृजमोहन वेदवाल, निर्मला नेगी, , वीरेन्द्र जुयाल ऊपरी, नीरज बावड़ी, द्वारिका चमोली, सुनील थपलियाल घंजीर, द्वारिका चमोली, आदि लोगों ला लोगों ला नेगी तैं अपणा तरीका से गीत, कविता, संस्मरण आदि द्वारा श्रद्धांजलि दे। बरिष्ठ रंगकर्मी, साहित्यकार दर्शन सिंह रावत व निर्मला नेगी ला नेगी जी की जीवनी पैढि।
स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी कु लोकप्रिय गीत 1950 के दशक का शुरूआत म रेडियो से यु गीत ‘तू होली उंचि डांड्यूं मा बीरा-घसियारी का भेष मां-खुद मा तेरी सड़क्यां-सड़क्यों रूणूं छौं परदेश मा। ता देश, प्रदेश व उत्तराखण्ड का घर, गौं म जख बि वे जमन म रेडियो छौ, जैन बि यु गीत सुणी सौब मन्त्रमुग्ध ह्वेगें न। नेगी जी को जन्म , 2 फ़रवरी, 1925 जन्म भूमि पौड़ी गढ़वाल का अयाल गौं म ह्वै। अर नेगी जी की मृत्यु 21 जून, 2020 खुणि ह्वै। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी का बुबा जी कु नौ स्वर्गीय सुल्तान सिंह नेगी व माताजी स्वर्गीय रूपदेवी नेगी छाया। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की पत्नी कु नौ श्रीमती विमला नेगी छौ। नेगी जी का बूबा जी वे जमना म सरकारी सेवा म छाया वो करांची, बर्मा आदि जगों अपरा बूबा का दगड़ी गेन वख नेगी जी की पढ़ै बि ह्वे। बर्मा बिटिन नेगी जी का पैली गीत रिकॉर्ड ह्वेन।
स्वर्गीय जीत सिंह नेगी क निर्देशन म 1954-1955 में दिल्ली म आयोजित गढ़वाली नाटक ‘भारी भूल’ कु मंचन ह्वै । कै कलाकार नेगी जी की टोली से वे जमन म जुड्या रैन ।जीत सिंह नेगी उत्तराखंड क यना पैला लोकगायक छाया जौंका गीतों का ग्रामोफोन रिकॉर्ड 1949 म जारी ह्वै छौ । जीत सिंह नेगी ला द्वी हिंदी फिल्मों म भी बतौर सहायक निर्देशक कु काम कैरी। नेगी जी संगीतकार व रंगकर्मी भी छाया । वो पैला यना गढ़वाली लोकगायक छाया जौंका गीत कु ऑल इंडिया रेडियो से पैली दौं प्रसारण ह्वे ।
स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी कु लोकप्रिय गीत 1950 के दशक का शुरूआत म रेडियो से यु गीत ‘तू होली उंचि डांड्यूं मा बीरा-घसियारी का भेष मां-खुद मा तेरी सड़क्यां-सड़क्यों रूणूं छौं परदेश मा। ता देश, प्रदेश व उत्तराखण्ड का घर, गौं म जख बि वे जमन म रेडियो छौ, जैन बि यु गीत सुणी सौब मन्त्रमुग्ध ह्वेगें न।
नाटकों की बात करदा ता स्वर्गीय जीत सिंह नेगी का निर्देशन म 1954-1955 म दिल्ली म आयोजित गढ़वाली नाटक ‘भारी भूल’ का मंचन ह्वै । मुंबई-दिल्ली-चंडीगढ़ समेत देश क कई प्रमुख नगरों म वे दौर म जीत सिंह नेगी का गीत अर नाटक श्रोताओं-दर्शकों तैं मंत्रमुग्ध ता करदा ही छाया। लोगों की जिकुड़ी म कुतग्यळि बि लगौंदा छाया। वे जमन म लोगों तैं जब जीत सिंह नेगी जी अर नाटकों ला गढ़वाल का जान-जीवन का अछूता भावों तैं संगीतमय कैरी ता लोगों का जिकुड़ों बिटिन वा खुद, भाव सदन्नी खुणि छप्प छपेगेन। लोक संस्कृति, लोक गीत अर लोक जीवन तैं ज्यूण वळा हिमालय जना विराट मनीषी जीत सिंह नेगी कु निधन 21 जून, 2020 खुणि धर्मपुर, देहरदून म ह्वै। लोक थाती का युगपुरुष स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की सौवीं जयंती परैं क्वी विराट आयोजन उत्तराखण्ड की धरती म हूण चैन्द। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली की पुरजोर मांग छ कि उत्तराखण्ड सरकार तैं जीत सिंह नेगी जी की जयंती परैं विराट आयोजन कं चैन्द। हमारा लोक का गीतकार, गायक व स्वनामधन्य कलाकार बि अगनै ऐकी जीत सिंह नेगी जी की सौवीं जयंती तैं यादगार बणाणा पूरी कोशिश कारला। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली की पूरी कोशिश च कि अगला साल जीत सिंह नेगी जी की सौवीं जयंती परैं विराट आयोजन होलु। पिछले एक दशक से बंड्या बगत बिटिन भाषा शिक्षण कक्षाओं म गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी साहित्यकारों की अग्रणी भूमिका रै। आज भी सब साहित्यकार आपरी भाषा व समाज का खातिर लगातार सक्रिय छन।
ये आयोजन म स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की सुपुत्री मधु नेगी, मंजू नेगी समेत राजेंद्र चौहान, महावीर सिंह राणा, चंद्र किशोर नैथानी, चारु तिवारी, विकास चमोली, राजेंद्र चमोली, उमेश बंदूनी, बृजमोहन वेदवाल, दीपा पंत, मंजू मैखुरी, मंजू भट्ट, धर्मेंद्र प्रकाश, दर्शन सिंह रावत, विक्रम नेगी, डॉ हरीश लखेड़ा, संयोगिता ध्यानी, रविंद्र सिंह रावत, सौरभ पंत, वीरेंद्र सिंह, हंसी, रामपाल किमोली, शेखर भट्ट, गौरी रावत, डॉ कमलेश कुमार, सुनील थपलियाल घंजीर, ओंकार सिंह कोहली, नीरज बावड़ी, सुबोध थपल्याल, , बृजमोहन वेदवाल, निर्मला नेगी, , द्वारिका चमोली, अनिल कुमार पंत, , निर्मला नेगी, संदीप घनशाला गढ़़वाली, रूद्र घनशाला, वीरेन्द्र जुयाल उपरी, नागेश बलोधी, रेनू उनियाल, देवांक लुथियाल, वीरेंद्र कुमार, धीरेन्द्र गुसाईं, आदि लोग उपस्थित छाया।
कार्यक्रम कु संचालन उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी ल कैरि।
