कविता….
(कामेश बोगुणा)
आलै बालै पलेंगरा में आवासीय छत्री लागी
आलै चे दिी, इना किणीसाकत हरि गुरुण छिन
आलै- स्तु चोपा उडणारी पिचासबोधौकि डाकिनी शाकिनी दिरी वे खोटा स्योट अर कत्ता बारक्षक बणि गैनी बला, त अब हमल कनम
देरा री
“बालै- छिथै,, यु द्वोया दिदी पैली भटी हमह व बुष्णु काम खराप के देंदी., उन त उ खोटाराम अर कसा द्वी महा कमवूस अर लोभि छिन, नंग चपेकि भि खै जीन निखोर्य…
अलै- मिट बोल्डु कि यूके लवे चुसादन मैना चारियोक,,
“बलै- ठिकि बोनीं तू मेरी बळकुंडी, हरि हरि बोल,,
आलै- दीदी हरि हरि,,
*आलै बालै न दथडी पलेंनि अर बाजुबंद लगोंदी लगोंद लगोंद घास कटण लगिनी,,
आलै बलै न सैद्धान्तिक कु आकाशवाणी कै, हलौ,, नमोनारायण नमोनारायण नमोनारायण।।
मामंत्री- मेरु प्रणाम स्वीकार करा माते !??
आ.बा- कैसे आशीष दें हम कि, सुखी रहो वत्स, किलेकि अजकलु तुमरू समै ठिक नि चनू, अर तुमरा वे सरकरी ठेकादारौ त, बल्कि हम त वेकु खोटाराम बोल्दा, वे खोटो त उगताट कन सुरु कएलि देवदल वलौ ल,,
मामंत्री- लेकिन वैल इन क्या काई, माते,, ?
आलै बालै- वेल यखुली न, तुम सभ्यू ल मिलिजुली काई, भोली-भाली जनता को मेहनती ल्वे प्याई तुमल, ऊँका आस-विकासा स्वीणो पर रूडी आग-बणाग लगैनी तुमल, ऊँका ज्वान जमान नौन्यलु कि नौकरी-चाकरी बेची अपड़ा खीसा भोरिनि तुमल, लिस्ट भौत लंबी च बेटा, कख तक बतौण,, ?
मामंत्री शर्मिदा हेकि बोनु, पर माते सजा मी अर खोटाराम हि किले, यांम त सभी सामिल छय्या,
आ.बा — सभ्यू को लम्बर लग्यूँ च बेटा, भस आक्रमण पैली ऊँ पर होणु च, जुकी दशा खराब चनी, खोटा सेठ पर त शनि, राहु, केतू, अंछरी, बांण, भूत, डाँडय अर खबेश चौदिशो अर चौडांडयूं भटी हमला कनै तयारी कनों छःन, ??
मुख्यमंत्री- माते मेरे परिवार की रगसा करो, मेरी तुम पूजा करो,,??
आ.बा- बेटा या बात अब हमारा अधिकार लक्षेत्र से भैर हेगी, अब त तुमरि रगसा तुम अफी करि सकदा, लोखू का जोड़ा जुत्ता खैकि, अर इष्ट पित्रौ कि पूजा करीक,
मामंत्री- ठीक च माते, मि तयार छौं, ??
आ, बा– हम तेरि अर्जी यमराज म पौंछे दिंदा, किलेकि घूसखोरी निपटान विभाग अजलु ऊँमे च, हरि हरि बोल,,
मामंत्री- हरि हरि माते….
(मुख्यमंत्री पैली भैंसो को खरक्या छौ, पडयूं न लेख्यूं, छोटू मोटो सरकार ठेकादार छौ, बाद म छकै कळदार खर्ची न्योता बनिगे, ??
अंगोछाप इथगा भी नी समझी कि, अलै बलै ल यमराजौ नौ किला ले, अब यमराजलै त भेजेन अपड़ा दूत, भूत अर भैंसा…)
