सरोज शर्मा (भोजन मूल शोधार्थी )
बवलदिन मिठै कड़वाहट दूर करद,
लेकिन द्वी राज्यों पश्चिमी बंगाल और ओडिशा का बीच लड़ै छिड़ि गै छै….
बंगाल जीत ग्या येकि जानकरि खुद ममता बनर्जी न ट्विटर मा लंदन से दयाई, ममता न ट्वीट काई, हम सबयो खुण गर्व कि बात च बंगाल मा सर्वप्रथम रसगुल्ला ईजाद हूणकि भौगोलिक पछांण (जी-आई)मिल गै रसगुल्ला बंगाल मा ही ईजाद ह्वाई, बंगाल म आम जनता से लेकि नेता तक खुशी मनाण लगिन।
दरअसल द्वी राज्यो क बीच विवाद छा रसगुल्ला क आविष्कार कख ह्वाई, ई मामला वै वक्त सुर्खियो मा आई जब 2015 मा ओडिशा का विज्ञान व तकनीक मंत्री न दावा कैर रसगुल्ला कु आविष्कार ओडिशा मह ह्वाई ऊन सिद्ध कनकु जगन्नाथ क खीर मोहन प्रसाद कु भि जोड़ दयाई, ये बात पर बंगाल क खाद्य प्रसंस्करण मंत्रि अब्दुल राज्जाक मुल्ला न बवाल कि रसगुल्ला क आविष्कारक बंगाल च हम ऐ क क्रेडिट ओडिशा थैं नि लीण दिंयूला,
जी-आई क मसला क्या छा
2020 मा एक मैग्जीन खुण सर्वे करवै ग्या रसगुल्ला थैं राष्ट्रीय मिठै क रूप मा पेश किए ग्या, ओडिशा सरकार न रसगुल्ला कि भौगोलिक पछांण खुण (जी-आई )कदम उठाई बंगाल न ऐक विरोध कर, जी-आई वू अधिकारिक तरीका च जु क्वी भि वस्तु क उद्गगम स्थल का बारा मा बतांद
ओडिशा लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय रसगुल्ला कि भौगोलिक पछांण जोड़न मा लगयू छाई, दस्तावेज इकठ्ठा किए गैन जैसे कि साबित ह्वा पैल रसगुल्ला भुवनेश्वर और कटक का बीच मा अस्तित्व मा आई, पश्चिम बंगाल न भि सभी दावों कु तोड़ ढूँढ ल्याई और आखिरकार रसगुल्ला पर बंगाल क कब्जा ह्वै ग्या।
रसगुल्ला को अपण बताण क खातिर बंगाल सरकार न केसी दास प्राइवेट लिमिटेड की मदत ल्याई,
ई मिठै कि दुकानो कि चेन च जु नवीन चंद्र दास का वंशजो द्वारा संचालित च,
रसगुल्ला क बार मा ब्वले जांद बंगाल मा 18वीं सदी का दौरान डच और पुर्तगाली उपनिवेशो न छेना से मिठै बणाण क तरकीब सिखै तभि बटेक रसगुल्ला अस्तित्व म आई, इतिहासकार जन्दिन रसोगुल्ला 1868 मा कोलकता के नवीन चन्द्र दास न ईजाद कार वो एक नई मिठै बनाण चांदा छाई ऊं न छेना क गोलो क चाशनी मा उबालण की कोशिश कैर पर वू टूट जांद छाई उन तब रीठा मिलै जै से छेना नर्म ह्वै गै आखिरकार सफल ह्वै मेहनत रसगुल्ला कु जन्म ह्वाई, ग्राहको न खूब पसंद कार, कयी लोग न बवाल अपण नाम से पेटेंट करवा ल्याव पर वू नि माना, वून भौत लोगो थै बनाण क तरीका बतै वून बवाल जब देश का सभी लोगो तक पौछ जालि तभी सफल ह्वैल,
