उत्तरकाशी मंदिर श्रंखला -5
(आलेख-गढवाली लोकप्रिय लेखिका अनिता नैथानी ढौंडियाल)
ऋषिकेश बटी १६०किलोमीटर अर देहरादून बटी १४० किलोमीटर दूर सीमांत जनपद उत्तरकाशी बस अड्डा से अद्धा किलोमीटर दूर कलक्ट्रेट क समणा कंडार देबता कु भव्य मंदिर च। यु मंदिर भौत पुरणु च। उत्तरकाशी सैरा नजदीक संग्राली,पाटा,बग्याल गौं म भि कंडार देबता मंदिर छन यखा पुरणा बोल्दन किराजौं क टैम कलक्ट्रेट क समणा पुंगणौं म हैल लगौंदी दां एक हल्या तैं अष्टधातु कि बणी भौत सुंदर मूर्ति मिली, राज संपत्ति समजी वेन वा मूर्ति राजा तैं दे दे अर राजान वा मूर्ति अपरी पूजा म रखीं दुसरी मूर्त्यूंं क तौल रख दे। सुबेर जब राजा पूजा कन्नू गै त वेन देखी कि वा मूर्ति दुसरी मूर्त्यूंं से मत्थी छै। यांका बाद राजन वा मूर्ति परशुराम मंदिर म पौंचे दे। परशुराम मंदिर क पुजरी न वीं मूर्ति खासियत समजी नगर बटी दूर वरुणावत पाड़ म स्थापित करणै सला दे।
भूत, वर्तमान अर भविष्य बतौंण वला श्री कंडार देबता तैं संग्राली,पाटा,खांड,गंगोरी, लक्षेस्वर,बाडाहाट(उत्तरकाशी),बसुंगा गौं मा रक्षा करण वालू देबता मने जांद। वरुणावत पाड़ म मूल रूप से स्थापित श्री कंडार देबता क सुंदर रूप क वजै से आज भि पुरणौं बटी चन्न वली परम्परा ज्यूंदीं छन।
संग्राली गौं म बामणै पोथड़ी,डौक्टरै दवै अर कोतवालौ हुकम काम नि औंद, यख कंडार देबता कु हुकुम हि मने जांद। यख जज वकीलों कि बहस नि सणदु देबता कि डोली अफी फैसला करदी। पंचायत चौकम कुछ खास गौं वला डोली कंधौं म धैरी देबता तैं याद करदन अर डोली नचदा नचदा अगने क नुकीला भागन भुय्यां मकुछ चिरोड़ा लगांदी। यूं चिरोणौं का आधार पर हि फैसला,शुभ दिन वगैरा तै होंदन अर जन्मपत्री भि बणये जंदन। वखा लोगुम शिव क रुप मनै जाण वला कंडार देबता क प्रति इतगा जादा श्रृद्धा च कि ब्यो कु तैं जन्मपत्री नि जुण्ण पर ब्यो देबता क आदेश पर तै करे जंदन। इतगा हि ना बिमार होण पर भि रोगी तैं देबता समण लये जांद।मुंडरु , बुखार , दांत पिड़ा त एकदम गैब ह्वे जंदन।
श्री कंडार देबता कु मूल मंदिर क स्थान संग्राली गौं, उत्तरकाशी सैर क कुछ दूर चड़ै वला रस्ता म च
