
दिल्ली एनसीआर का साहित्य प्रेमियों की अक्टूबर मैनै मासिक साहित्यिक संगोष्ठी दिल्ली स्थित गढ़वाल भवन का अलकनंदा सभागार मा दिनांक 19 अक्टूबर, 2025 बग्वालै शुब अवसर पर दैंणि (सुसंपन्न) ह्वाई।
बेशक बग्वाळ (दीपावली) का परब होणा वजै से मात्र तीस साहित्य प्रेमियों की हि गरिमामय उपस्थिति रै, ज्यांमा भुलि निर्मला नेगी यखुलि ध्रुवतारा जन अलैदा से अपणि चलक्वार उपस्थिति दरज कराण मा सफल रै। उत्तराखंडै नारी, सब्यूं फर भारी।
तीस यनि साहित्य का तिसळा पराणी छाई, जन बोल्यां कि स्वाति नक्षत्रा चोली (पपीहा) ह्वा। बल सरग दिदा पाणी दे, सरसुती सुबाणी दे। कम खर्चै लक्ष्मीधनै गाणी दे (Money saved is money earned), अन्नपूर्णै पंचमेवा नर्यूल रोट भेलिकेक अठ्वाड़ै लौबाणी दे। जख रखड़ी त्यारा (रक्षाबंधन त्योहार का) पावन शुब परब फर श्री यानी त्रिदेवियों लक्ष्मी, सरसुती, अन्नपूर्णा स्वरूप श्रीलगुळि (मनीप्लांट) थर्पीं ह्वा, वख भाषा, संस्कृति, साहित्य की त्रिवेणी को समागम दैणु (फलदाई) होंद हि छ।
बल दिल्ली एनसीआरै यूं मासिक साहित्यिक संगोष्ठी मा हींग लगदी नि फिटकरी, अर रंग भी चोखा होंद। इलै यूं मासिक साहित्यिक संगोष्ठियों मा साहित्यानुरागियों को लगातार विश्वास बढ़णौ छ। यांकि वजै छ कि यूं आयोजनों मा सर्वभाषा, सुसंस्कृति अर साहित्य का संवर्धन का वास्ता कृतसंकल्प भागीरथी परयास होंणा छन। साहित्यकारों की नै प्रकाशित कृतियों का विमोचन, समीक्षात्मक एवं विश्लेषणात्मक परिचर्चा, गीत कवितापाठ का दगड़ा दगड़ी साहित्य की हर विधा खुणि एक नयो खुलो प्लेटफॉर्म विकसित होयूं छ। साहित्यिक संगोष्ठी का ज्यै मैना पोथी को विमोचन होंद, वैका अगल्या ही मैनौं की साहित्यिक संगोष्ठी मा गहन परिचर्चा भी होंदी। यीं तरां से संगोष्ठी लेखक अर पाठक का बीच सीधा संवाद का जरिया एक रामसेतु को काम करणी छ। यूं मासिक साहित्यिक संगोष्ठी का वास्ता गढ़वाल भवन दिल्ली को भरपूर सहयोग मिलणु छ। *गढ़वाल भवन तैं “साहित्यिक संगोष्ठी को गढ़वाल श्रीनगर” बुल्ये जा, त यांमा क्वी अतिश्योक्ति नि ह्वैलि*।
भाषाई एवं क्षेत्रीयता का बंधन से मुक्त साहित्यिक संगोष्ठी का ये खुला ‘शिविहि’ (शिवालय, विद्यालय, हिमालय) मा अतिथि देवो भव को भौ परबल छ। यख सभी साहित्य प्रेमियों खुणि द्वार खुला छन। बेशक केदारनाथ बद्रीनाथ मा छै मैना द्वार बंद रौन, यख बारामास भेलिफुड़ै होंण हि छ। भेलिकेक का ये महोत्सव मा हरेकौ ज्यू भोरी (हार्दिक) स्वागत छ। ये हि खुला निमंत्रण तैं आत्मसात कैरिक देहरादून बिटि गणेश काला इं संगोष्ठी मा सामिल ह्वैनि। वूंको अंगवस्त्र से सम्मान किये गे। हीलिंग कोच, गणेश काला जीन ‘बगैर दवाईयों के कैसे रखें अपने को स्वस्थ?’ विषय वस्तु पर स्वास्थ्य संबंधी भलि जानकरी दे। उपस्थित साहित्य प्रेमियोंन भि अपणि स्वास्थ्य संबंधित सवाल पूछिन। वूंन ध्यान योग का माध्यम से सात चक्रों तैं जागृत कैरिक बॉडी तैं बैलेंस मा लाणै बात करि। वूंको 20-25 मिनटौ सेशन ज्ञान बढौण्यां अर लाभदै रै। वूंन अग्नै भी साहित्यिक संगोष्ठी मा ऐकि अपणि निस्वार्थ सेवा देणै बात करी। साहित्यिक संगोष्ठी वूंका निस्वार्थ सेवा भौ तैं नमन करदा।
आपौ साहित्य, आपा सान्निध्य मा यनी दैणु होणु रौ, त हम सभी केवटै भरोसेमंद नाव मा कै भी भौसागरै रौ (भवसागर की गहराई) पार कैरि सकदौं।
हजार ग्राम हजार धाम, हमरी भाषा हमरी पछ्याण का संदेश का साथ श्रीलगुळी कि तरां लगालगी (लगातार) अग्नै बौड़ण वली द्वी अष्ट पजल धाम जातराओं पर विशेष वक्तव्य रखे गेनि।
सबसे पैळि 6वीं कालेश्वर से ताड़केश्वर अष्ट पजल धाम जातरा पर रिखणीखाल विकास खंड इलाका का पजल सहजातरी सतीश रावतन अपणि सारगर्भित बात रखी। वूंन बोलि कि जगमोरा की क्षेत्र विशेष (कालेश्वर, काळो डांडा यानी लैंसडाउन, डाबरी गांव, गोदड़ सिद्ध बाबा, सिद्ध खाल, रिखणीखाल अर ताड़केश्वर) की पजलों का माध्यम से वूं तैं अपणा क्षेत्र विशेष तैं बड़ी गैराई से समझणो मौका मिली, नै-नै सामाजिक सम्मानित लोगों दगड़ जाण पछ्याण बढ़ी। इं जातरा का डाबरी वल्ली का पड़ौ मा ममाकोट का साथ मामाश्री महावीर सिंह नेगी को सान्निध्य फलीभूत ह्वै; बाळपनै समलौंण तरोताजा ह्वै; ममाकोटै समलौण्या कविता बांचन कैरिक पूरो गौं भौविभोर ह्वै; सभी ग्रामीण वासियों तैं अंगवस्त्र पैर्यैकि सम्मानित किये गे। बल भण्जा तैं डाबरी (ममाकोट) प्यारी, अर कुण्जा (देव अर्पण हेतु सुगंधित पुजण्य घास) तैं कुंजापुरी प्यारी। टिहरी जिला मा अवस्थित सत्ती माता का कुंजापुरी शक्तिपीठ मा माता को वक्षस्थल गिरी छौ।
यांका बाद सुशील बुड़ाकोटी ‘शैलांचली’ जीन 5वीं सिद्धबली- सतपुली अष्ट पजल धाम जातरा (सिद्धबली, पुरिया डांग स्कूल, थनूल महादेव, थनूल गांव, सांगुड़ा देवी बिलखेत, बड़खोलू स्कूल, सतपुली स्कूल अर सतपुली का हि साहित्यिक संगोष्ठी) का पड़ौ पर अपणि सारगर्भित बात रखी। वूंन बोलि कि हरेक पड़ौ मा पजल जातरियों अर पजल साहित्य को भलो सम्मान होणु छ। हर पड़ौ मा पजल हल भी ह्वैनि, सही उत्तर देण वलों तैं नकद पुरस्कार से प्रोत्साहित किये गे। स्कूल मा शिक्षकों अर गांव मा ग्रामीण वासियों को अंगवस्त्र से सम्मान ह्वै। सभी जगा लोग अपणो की याद मा खुदेणा छन, पजल जातरियों दगड़ वूंन अपणि खुद मिटै। यीं तरां से यि पजल जातरा गौं शहर की वैचारिक अर साहित्यिक दूरी तैं पाटणौ काम कन्नी छन। पजल चौदिशौं लौंफणि छन, वो गढ़वाल हि नि, कुमाऊं नेपाल तक अपणि पैंठ बनाण मा कामयाब होणि छन। पजल सम्पूर्ण हिमखंड क्षेत्र की बात कन्नी छन।
यांका बाद संदीप घनशाला गढ़वाली की व्यंग्यात्मक पोथि ‘घचाक’ पर गोविंद राम पोखरियाल ‘साथी’, दिनेश ध्यानी, डॉ बिहारी लाल जलंधरी, जयपाल सिंह रावत, अनूप रावत अर सुशील बुड़ाकोटी ‘शैलांचली’ जीन समीक्षात्मक टिप्पणियों मा अपणि सारगर्भित बात रखी। सबयूंन संदीप गढ़वाली कि व्यंग्यात्मक शैली की हाम भरी। डॉ जलंधरीन संदीप तैं व्यंग्य सम्राट से परिभाषित कैरिक जगमोरा कि बात पर अपणि मुहर लगे। दिनेश ध्यानी ल उत्तराखंड की भाषाओं तैं संविधान कि आठवीं सूची मा लाणौ आह्नवाहन करी। वूंन 11 नवंबर, 2025 का दिन गढ़वाली महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल कि स्मृति मा गढ़वाल भवन मा साहित्यिक आयोजन उर्याणै भी बात करी।
यांका बाद जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ ल उत्तराखंड की विलुप्ति कि कगार पर खड़ी ‘गमत’/नचाड़ लोक कला का संवर्धन पर अपणि सारगर्भित सार्थक बात रखी। जगमोरान बतै कि अंग्रेजों का टैम मा ढाकरी रूट (दुगड्डा, डांडामंडी, सतपुली बांघाट, नैथाणा, कांसखेत, तमलांग अर पौड़ी का पड़ौ) का ओरा-धोरा य लोक परंपरा खूब फलीभूत ह्वै। बाद मा द्वी तीन दिना ब्यो-बारात मा मनोरंजन का तौर पर नचाड़ परंपरा अग्नै बौड़ि। पर विकास का साथ-साथ उपेक्षित होणा कारण य लोक कला अपणा ह्रास पर ऐगे। गिणती का हि कुछेक यनी कलाकार रयां छन, जौंकी एक बिटोल कैरिक कृष्णा बगोट ल देहरादून मा एक आयोजन उर्यैकि अनुपम पहल करी। पजल परिवार का आह्वाहन अर सहयोग से 18,000/- (अठारह हजार) की धनराशि सभी उपस्थित कलाकारों तैं ससम्मान दिये गे। हजार ग्राम हजार धाम का तहत तथाकथित लोक कलाकारों का गांव तैं धाम का रूप मा पुजणौ अर लोककलाकारों का दगड़ दाल-भात खाणौ जगमोरा संकल्प भी ह्वै।
जगमोरान अपणि सारगर्भित बात मा बतै कि सतपुली क्षेत्र विशेष की जातरा का हरेक पड़ौ मा संदीप घनशाला गढ़वाली की व्यंग्यात्मक पोथि ‘घचाक’ पर खूब परिचर्चा ह्वै। अपणा लोगों का बीच मा साहित्यिकार का रूप मा परिचै पाणु कै भी राष्ट्रीय सम्मान पाण से कम नि छौ। सतपुली कल्जीखाल क्षेत्र मा संदीप गढ़वाली, जगमोहन डांगी, इंद्रजीत सिंह रावत, सह-जातरियों अर पंचाली गांव का प्रधान अशोक रावत को सहयोग खूब फलीभूत ह्वै। अशोक रावत पजल साहित्य का ‘अशोक सम्राट’ की उपाधि से सम्मानित ह्वैनि। यनी रिखणीखाल क्षेत्र विशेष की जातरा मा सह जातरी सतीश रावत अर वूंका मामाश्री महावीर सिंह नेगी जी को विशेष योगदान रै। महावीर सिंह नेगी पजल जातरियों का ‘मामाश्री’ की उपाधि से सम्मानित ह्वैनि। चाय पाणि से पैलौ सत्र जयपाल सिंह रावत की अध्यक्षता मा अर शैलांचली का कुशल संचालन का साथ परिपूर्ण ह्वै।
चाय पाणि का बाद को सत्र नीरज बवाड़ी का ओजस मंच संचालन का साथ शुरू ह्वै। उपस्थित कवियों को काव्य पाठ ह्वै, ज्यांमा निर्मला नेगी, सते सिंह रावत, भगवती प्रसाद जुयाल ‘गढ़देशी’, चंदन प्रेमी, बृजमोहन शर्मा ‘वेदवाल’, तिलक राज शर्मा, वीरेन्द्र जुयाल ‘उपिरि’, शशि बडोला, संदीप घनशाला गढ़वाली, रोशन लाल ‘हिंद कवि’, नीरज बवाड़ी, सतीश रावत, दिवान सिंह नेगी, सुशील बुड़ाकोटी ‘शैलांचली’, दिनेश ध्यानी, जयपाल सिंह रावत, अनूप रावत इत्यादि कविगणोंन अपणि प्रतिनिधि कविता वांचन करी। युगराज सिंह रावत, इंद्रजीत सिंह रावत, डॉ मदन सिंह, मुकेश बिष्ट, जगदीश सिंह नेगी, किशन सिंह गुसाईं इत्यादि साहित्य प्रेमियों की गरिमामय उपस्थिति भी रै।
जगमोरान धन्यवाद प्रस्तौ मा सभी उपस्थित साहित्य प्रेमियों को विशेष आभार व्यक्त करी। बल एक से द्वी भले, अर द्वी से तीन बल्ले बल्ले। ये हि एकजुट एकमुठ संदेश का साथ वूंन डॉ कुसुम भट्ट का दिनांक 26 अक्टूबर, 2025 (ब्यखुनि 4 बजि) का मुक्तधारा सभागार, दिल्ली मा आयोजित ‘द्रोपदी को नारैण/मौर-मौरयाण’ प्रोग्राम अर रामेश्वरी नादान का 9 नवंबर, 2025 का वैशाली गाजियाबाद का आयोजन मा अपणि पोथियों दगड़ ज्यादा से ज्यादा संख्या बल मा सामिल होणौ आह्वाहन करी।
आखिर मा बग्वाल का शुभ अवसर पर पंचमेवा नारियल रोट भेलिकेक का अठ्वाड़ महोत्सव का साथ संगोष्ठी सुसंपन्न ह्वै। अग्नै संगोष्ठी रिख/मंगसीरी बग्वाळ का शुभ अवसर पर दैणि होलि, यनि हम आशा करदौं।
सपरिवार सुखी संत जुगराज यंगराज जांबाज रयां। आपा ज्यू मा भाषै बडूली, गळा मा संस्कृति घंडूली, मुंड मा साहित्यै गडोली, अर खुट्टों मा साहित्यिकारै गरूड़ी पराज रयां। सादर नमन वंदन भै-बंदौं।
