(बिठलरुं/नारी शोषण कथा)
लेखक -भीष्म कुकरेती
ब्याळी भद्रा क बड़ो बंगलो क आज भितर पैंच सम्पन ह्वे गे। नाती नतणा सब खुश छा। भौत सा पौण अयां छा। दून हॉस्पिटल का डाक्टर नर्स बि अयाँ छा. आज नरेंदर अपर बैणी तैं छुड़नो क्लैमनटाउन जयुं छौ। हौर परिवार वळ हॉल म छा या अपर अपर कमरों म छा। पैलि मंजिल म भद्रा इखुलि अपर कमरा म छे खिड़की क समिण। अपर नर्सिंग क नौकरी क विषय म सुचणी छे. भौत सा उतार चढ़ाव वळ जिंदगी। वेदना व सुख को मेल जॉल। तब गढ़वळि ह्वेक नर्स हूण बड़ो त्रस्सदायी हूंद। अब तो समाज म कुछ जागृति ऐ गे अर भौत सी गढ़वळि नर्स अमेरिका, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया म नौकरी करणा छन अर ऊखी बस बि गेन। पर जब भद्रा न नर्सिंग कोर्स कौर छौ तो समाज म नर्स को काम छी छी वळ छौ।
भद्रा का पिताजी कोच्ची म नेवई म छा। जब भद्रा पांच वर्षै छे तो पिताजी की पोस्टिंग कोच्ची म ह्वे। नेवी ई क्वाटरों म जगा नि मील। तो भद्रा क पिताजी न नेवी ओफिस क कुछ निकट घर ले ले अर रोज ओफिस साइकल से जांदा छा । भद्रा तैं पढानों समय ऐ तो बड़ी समस्या ह्वे गे। नेवई वळों कुण बच्चों स्कुल भद्रा क हिसाब से भद्रा क घर से भौत दूर पड़दु छौ। निकट म एक हिंदी स्कूल छे जो केरल वळों समाज चलांद छौ। केरल वळ चतुर छा कि भारत म या विदेश म कखि बि नौकरी करण तो हिंदी ज्ञान आवश्यक च। तो कोच्ची म कत्ती सरकारी हिंदी स्कूल छा। भद्रा तैं हिंदी स्कूल म भर्ती तो कर दे किन्तु भद्रा कुण स्कूल नरक साबित ह्वे गे। स्कूलों सारो वातावरण मलल्यालमी छौ। विषय बि टीचर मलयालमी म पढ़ांदा छा। स्कुल म बच्चा बि भद्रा को ग्वारो रंग देखि बुल्दा छा नार्थ इंडियन। भद्रा न क्या सिखण छौ उल्टां पढ़ाई से ही डर या घृणा ह्वे गे। छै मैना बाद भद्रा क पिताजी तैं क्वाटर मील अर भद्रा क प्रवेश नेवी क स्कूल म ह्वे बि च पर भद्रा तैं पढ़ाई से प्रेम नि पंनप साक। तेल ठाली भद्रा न दस पास कार। तब केरल म हिन्दू अर क्रिश्चियन लड़कियों क एकी सुपिन हूंद छौ कि नर्स बौणी दुबई जाण । हौर प्रदेशों मुकाबला म केरल म सरकारी अर गवर्मेंट अपरूव्ड नर्सिंग स्कूल बिंडी छा। भारत म केरल की नर्सों क बड़ी मांग छी। यांक अतिरिक्त केरल क समाज न मिडल ईस्ट या विदेश जाणों निशुल्क सहायता केंद्र या सलाह केंद्र बि खुल्यां छा जो नर्स या हौर युवक युवतियों तैं मिडल ईस्ट म नौकरी प्राप्ति करणो सलाह दींदन। दगड़ म प्राइवेट सलाहकार तो प्रत्येक गलीम मिल जाला।
भद्रा क पिताजी न भद्रा तैं सेंट्रल गवर्मेंट अपरुव्ड इंस्टीच्यूट म भर्ती कौर दे। द्वी वर्ष म नर्सिंग कोर्स पुअर ह्वे तो इंस्टीट्यूट क तरफ से एक महीना आयुर्वेद रिजॉर्ट जन अस्पताल (जख योग आदि बी हूंद ) , तीन मैना नर्सिंग हॉस्पिटल अर द्वी मैना एक डाक्टर दगड भद्रा न काम कार। चूँकि स्कूल म द्वी तीन दैं फेल ह्वे छे तो नर्सिंग कोर्स करदा करदा भद्रा सत्रह वर्षा क ह्वे गे छे।
तबि नरेंदरौ ट्रांसफर विशाखापटनम ह्वे गे। नरेंदर न ये मध्य गाँव म भद्रा क नाम राशन कार्ड म लिखवै दे छौ अर भद्रा तैं गाँव भेज दे कि नौकरी लग जाओ तो उखी कौर ले। पिता जी न भद्रा से ब्वाल कि उख नि नौकरी इंतजाम ह्वाल तो विशाखापट्नम बुलै द्योला। नरेन्दर न भद्रा की नौकरी काम अपर संबंधी गोविन्द तैं लखनऊ म दे दे छौ जु सचिवालय म काम कार्डो छौ।
भद्रा ना पतलळी , ना मोटी बल्कण म बिगरैली छे। भद्रा गाँव आई। उन वा द्वी तीन दैं गांव ऐ बि छे। घर म दादी छे अर बोडी-बाडा छा। गांव म ऐक भद्रा निरुत्साहित ह्वे गे। भद्रा क ज्यू बुल्याइ कि वा गाँव से भाज जा। तब गढ़वाळ म नर्स की क्वी एक छवि नि छे। कुछुं मन म छवि छे कि नर्स क्रिश्चीयनों माई( चरचै सिस्टर ) हूदन। तो कुछ गाँवों म स्वास्थ्य संरक्षण वळी दीदे समझदा छा अर बच्चों क गू पिसाब बि पुंजदा छा ।
अब जनकि जुंकळी ददि न ब्वाल , ” ये भद्रा त्यार बुबा पाणी जायजा सिपै ह्वेक बि नरेंदर त्वे गू -मूत फिड़नो काम पर लगै दे। “
परमेश्वरी बोडी न अपर अंथाज म ब्वाल कि अंग्रेजों मंदिर म काम कन्न तीन ?
डक्खु न दगड्यों दगड़ छ्वीं लगैन , ” मीन सूण बल डाक्टर नर्सों दगड़ उन तिन। .. “
जति लोक तति बोल। लोक चकित छा कि उथगा दूर रैक भद्रा नर्स बौण। क्लर्क बणदि , मास्ट्यानि बणदि तो कुछ बात छे।
भद्रा क समज म नि आई कि गढ़वाली गाँवों म नर्सों प्रति इथगा नकारात्मक सोच किलै ह्वेलि। हां जु भैर रौंद छा वो तो नर्सो महत्व जणदा हहा कि बद्रीनाथ जन जगा म बि केरल की नर्स हूंदन।
लखनऊ म गोविन्द क सहायता से भद्रा की नौकरी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र बिछलधार म ह्वे गे। बिछलधार म हाई स्कूल छे अर बिछलधार पट्टी को मुख्य बजार बि छौ। पहाड़ी पर को बजार छौ बिछलधार।
प्राथमिक चिकित्सा केंद्र म फस्ट एड क सामान छौ अर भद्रा नर्स। भद्रा को उत्तरदायित्व छौ कि आस पास का गांवों म स्वास्थ्य क प्रति जागरूकता फैलाण अर प्रसव समय बिठलरों सौ सायता करण। भद्रा खिमसिंग लाला क दुकानी पैथर उबरा की एक कुठड़ी म रौंदी छे।
भद्रा क जीवन म भौत सा वेदना क्षण ऐन किन्तु सर्वाधिक वेदनापूर्ण समय छौ बिछलधार म नौकरी।
भद्रा न पायी कि गढ़वाल म तब नर्सिंग विचार छौं इ नि छौ जन केरल म छौ। तखक समाज नर्सों तै उथगी सामान दींद छौ जथगा वैद्य या डाक्टर या नौकरी करण वळ व्यक्ति। परिवार वळ अपर बेटी तैं नर्स बणान म अपमान नि समजद छा। इलै इ केरल की नर्सों क मांग मिडल ईस्ट इ ना अमेरिका म बि छे। अर केरल मेडिकल टूरिज्म को महाराजा छौ। भद्रा न पायी कि गढ़वाळ म तब समाज नर्स तैं हेय दृष्टि से दिखदौ छौ। कुछ मरद तो नर्स तैं तंग करणो यंत्र समजदा छा। कुछ सुचद छा कि नर्स लोगों बिस्तर म हूण चयेंद। समाज बि नर्सों क महत्व नि समजद छौ तब। हां अब तो गढ़वळि समाज म परिवर्तन ऐ गे पर तब १ ये मेरी ब्वे !
भौत सा असभ्य युवा तो सेवा केंद्र म ऐक निरोध की मांग करदा छा। यूंकुण नर्स बस खिलणो चीज बस्तर छे।
कुछ गांवक युवा तो यदि भद्रा सड़क म चलणी हो तो रस्ता रोकिक भद्रा पर घुसे जांद छा। यूंकूण भद्रासरकार द्वारा मनोरंजन कुण भिजीं बादण छे।
एक जगदीश गैंग छौ जु गुंडा जन चार पांच लोगुं गैंग छौ। एक मील दूरक गांव का बेरोजगार , नीरस , अदूरदर्शीयों जमवाड़ा। यी तो सब्युं समिण पुछदा छा। एक राता रेट क्या च ? ” भौत सा लाला या वरिष्ठ अध्यापक यूं तैं टोक दींदा छा।
गांवक महिला वास्तव म भद्रा तैं देवी समजदा छा। चूंकि भद्रा तैं कोच्ची म कुछ अनुभव छौ तो पेट दर्द या मुंडर जन रॉक दवा बोली दींदी छे।
कुछ विद्यार्थी तो बड़ा बिगड़ैल छा। वो सुबेर सुबेर उना ऐ जावन जना बजारा जननी झाड़ा जांद छा। कति लाला तो इन छ्वारों पिटै बि कर लींद छा तो यी बिगड़ैल काबू म आंद छा। दिन म टट्टी पिसाब करण तो जनान्यूं कुण बड़ो कठिन छौ।
एक बारा अनुभव यु छौ कि एक सुपरवाइजर आयी इस्पेक्शन हेतु। स्यु मुर्दाखोर बुलण लग गे कि रात वो भद्रा क कमरा म हि रै जालो , बेशरम स्साला। वींन सफा ना बोल दे। वो एक लाला क चाय की दूकान भितर राई। वै हरामी न भद्रा क खराब रिपोर्ट मथि भेज दे।
तीन मास्टर तो मास्टर बुलण लैक नि छा। जब बि अवसर मिल्दो छौ यी भद्रा तैं छेड़ दींदा छा। तौ तीन मास्टरों न सबसे बिंडी भद्रा तैं दिक करदा छा। प्रिंसिपल मैदानौ छौ तो वैक भान अध्यापक राक्षस छन या क्या वै तै कुछ मतलब नी। प्रिंसिपल वास्तव म झांसी हाई स्कूल से पनिशमेंट पर बिछलखाल भिजे गे छौ।
शनिवार कुण बिछलधार जन शून्य न सै तो हीन संख्या वळ ह्वे जांद छा। लाला लोक बि छंछरॉ कुण अपर गां चल जांद छा। कुछ लाला जन श्रीधर पोस्ट मास्टर यखी रौंद छा।
छंछरौ कुण हॉस्टल सब बंद सि ह्वे जांद छा।
वैदिन भद्रा न्याड़ क गाँव से एक जननी क प्रसव करवैक ऐ छे। आंद दैं गाँव वळों न भरीं रोटी पकड़ै दे छौ। भद्रा न भरीं रोटी खैन अर से गे। रात डर लगद छे तो पिसाब -टटी हेतु भद्रा न एक डब्बा धर्यूं रौंद छौ। आज ठंड बि छे तो नौ बजि भद्रा से गे।
रात पता नि ग्यारा या कथगा बजि धौं। भद्रा क द्वार क्वी जोर जोर से खटखट खटखट हूण शुरू ह्वे। भद्रा डर गे कि यी क्या ? भैर बिटेन की आवाज भद्रा न पछ्याण याल छौ। यी आवाज तिनि छेतर मास्टरों की छे। वो शोर मचाणा छा कि द्वार खोल। भद्रा डौर च पर साहस कम नि हूण दे। खिड़की बिटेन भद्रा न आवाज दे , “यूं रागसूं से बचाओ , बचाओ … ” आवाज सूणी श्रीधर लाला टॉर्च बाळी ऐ गेन। श्रीधर लाला न वूं छेतर मास्रों तै भगायी अर भद्रा तैं अपर घर ली गे। सरा रात भद्रा श्रीधर लाला क पत्नी दगड़ राई।
सुबेर श्रीधर लाला न ब्वाल कि पटवारी म रिपोर्ट लिखाण आवश्यक च। भद्रा क समज म कुछ नि आयी अर घाम आणो कुछ समय उपरान्त वा अपर गां चल गे।
कुछ समय बाद भद्रा लखनऊ गे अर गोविन्द तैं मील अर अपर ट्रांसफर कोटद्वार करैक ड्यार आयी। सामन लीणों अपर ककरा भाई तैं लेक बिछलधार गे। श्र्रध्र लाला से मिलण म पता चल कि तिनि मास्टरों न तिकड़म लगैक ट्रांसफर ले ले छौ।
भद्रा क जिंदगी म बिछलधार म नौकरी समय ‘सड़ांध ‘ को समय छौ अर बड़ो भयानक छौ।
(एक सत्य घटना आधार पर बुणी कथा। चरित्र नाम , स्थान व भौत सी घटना काल्पनिक )
