(ई.प्र.उनियाल)
उत्तराखण्ड म मानव वन्य जीव संघर्ष थमणै नौ नि लेगु छ। हाल ही मा पौड़ी जिला का पोखड़ा ब्लाक मा गुलदार न खेत मा काम कन्नी एक जननी हैं अपणु गफ्फा बणैदे ऐ ही गौं मा एक हौर जननी हैं घायल करि दे। गुलदार की डौरा बाना नौना स्कूला नि जाणा छ। बाधै सक्रियता तैं दिखद ब्लाक का 12 स्कूलों तैं सुरक्षा की दृष्टि सि बंद करेगेन। कैबिनेट मंत्री व चौबट्टाखाल सि विधायक सतपाल महाराज न अपणी विधानसभा मा बाघ क हमलै घटनाओं तै दिखद आदमखोर बाघ हैं मरणा वास्ता शूटर तैनात कन्न का निर्देश का दगड़ि लोग की जानमाल की सुरक्षा कन्न वास्ता जिलाधिकारी पौड़ी तैं निर्देश देन बतै जांद की वन विभाग सि अनुमति मिलन का बाद क्षेत्र का जगा-जगा बाघ तैं पकड़ण वास्ता पिंजरा लगण का दगड़ि शूटर कि तैनाती करेगे।
पहाड़ हो चै मैंदान सबि जगा गुलदार, रिख कि दखल जब तक सखणो मिल जाणी छ। राज्य बण्यां 25 साल हवे ग्येनि पर नेता न कबि यीं तर्फ ध्यान नि ये कि वन्य हिंसक जीवों कि मानव बस्त्यों मा घुसी भय अर मौत को आतंक मचौणे समस्या का निदान खुण क्य करे जाण चयेणू छ। यि घटना त आज-ब्यालि कि छ यख त हर टैम क्वी अनहोनी कि आशंका बणी रैंद। हालात बयां कना छन कि जैं रफ्तार से मानव-वन्यजीव संघर्ष कि घटना प्रकाश मा आणि छन।
सवाल यो छ कि जंगल कि चौखट नंधै कि यि हिंसक जीव मानव बस्तयों मा किलै औणा छन। एक सीधो सि जवाब होंद कि चूंकि जंगलों को कटान अर जंगली जानवरों का पर्यावास मा मनख्यों को अतिक्रमण यांकि वजै छ। पर असल बात कुछ हौर त नी छ। मनख्यों कि बस्ती मा घुसणु क्वी बि जंगली जानवर सही नि समझदो होलो। किलै कि मनखि हि वृंको सबसे बड़ों दुश्मन होंद यीं बात हैं वो जण्दा छन पर फिर बि वस्त्यों मा गुलदार को प्रवेश शैद कुछ हौर हि तर्फ संकेत देणू छ। खासतौर पर गुलदारों न शहर-अर गौं क्षेत्रों मा आतंक को माहौल तयार कर्फ्यू छ। खेत-खल्याण हो चै घर-गुठ्यार कखि बि लोग सुरक्षित नि छ। कब अर कख गुलदार समणि आकि चुनौती दे या कुछ नि बोले सकेंदो।
एक बात त पक्की छे कि जै रफ्तार से जंगली जानवर मानव बस्त्यूं कि तर्फ रूख कना छन त वख यानि जंगल मा सब कुछ ठीक नजर नि औणू छ। यानि जंगल कि आजाद जिंदगी छोड़ी व मनख्यों कि बस्ती मा पाकि जिंदगी खतरा डाली वो क्य प्रदर्शित कना छन। क्य चूं खुण वख भोजन कम पड़ गये। क्य चूंका वास्ता रैणै जगा नि बचीं छ। यानि क्वी न क्वी कारण जरूर छ। यां पर हमरा नीति नियंतों हैं विचार कन पड़लो।
य एक समस्या छ अर वो बि आम जनता का सरोकारों से जुड़ी जथगा जल्दी हवे सको यांको समाधान खोज लेण चयेणू छ।
राजाजी नेशनल पार्क अर जिम कार्बेट पार्क को संधि क्षेत्रों मा बाघ को आतंक आम बात छ। लगभग रोजाना आम जनता मा वां यीं बातै सोच आम छ कि सरकार तैं वींकि रक्षा कि चिंता नी छ। वो सिर्फ हर्जाना देकि अपण कर्तव्य कि पूर्ति मान लेंद। जो कि जनता तैं सुरक्ष देणै शासन कि गारंटी को मखौल छ। वो पशोपेश कि स्थिति मा छन कि वो अगर हिंसक जानवरों तैं गोली मार्दन त जेल हवे जैलि अर अगर यिनु नि कर्दा त बूकि जिंदगी कि गारंटी खत्म होंद। यीं दुविधा को निदान सिर्फ सरकार को छ। अगर वो हि जनता कि अनदेखी करलि त व्यथा कैतै सुणेलि। आंकड़ा बतौंदन कि राज्य गठन का बाद से अबि तक सैकड़ो लोग कि ज्यान जंगली जानवर ल्हे चुकि ग्येनि। जबकि यांसे द्विगुणा घायल अर अंगहीन होयां छन। यानि जो मर ग्ये वो त समझा तर ग्ये पर जो अंगहीन वैकि ज्यूंदा छन चूंकि जिन्दगी न नर्क वे ग्ये समझा। क्या प्रदेश का नीति नियंता यीं बात पर कबि मंथन कनौ तयार होला। य फिर जनता यिनि यूं जानवरों को गुफ्फा बणद रैलि। हां अबि तक प्रदेश कि तमाम सरकार चिन्ता त व्यक्त कर्दी छ पर यांसे क्वी फैदा। जब तक क्वी कारगर नीति नि बण्दी वन्य जीव मानव संघर्ष चल्द रालो। यीं बात पर मंथन कि जर्वत छ। वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं तैं रोकण वास्ता ठोस कदम उठाणा होला। यांका वास्ता कारगर नीति बणणा होलि।
