(भीष्म कुकरेती) मीन भौत पैली जसपुरा बहुगुणा वंशावली प्रचारित कौर बि छे। टिकौली चलणस्यूं ) से स्व चैतराम बहुगुणा तैं १८४५- ५० का धोरा कर्मकांड हेतु जसपुर म बसाये गए छा . चैतराम जी का तीन पुत्र ह्वेन -तेजराम , माधवा नंद अर देवा नंद।
तेजराम जी का तीन पुत्र छा -जयराम , कृपाराम , अर तोताराम।
जयराम ददा (जयराम बहुगुणा जी ) म्यार नि दिख्यां छा किन्तु सुण्युं भौत छौ। जयराम ददा पूजा पाठ हेतु कम प्रसिद्ध छन अपितु ज्योतिष -कर्मकांड का संस्कृत श्लोकों तै लिखण अर तौं श्लोकों क गढ़वळि म टीका कोरी लिखद छा। यूं ग्रंथ की प्रतिलिपि हूण से बहुगुणा युवाओं तै पढ़ण म सुविधा हूंदी छे अर्थात रेडी मेड साहित्य /पुस्तक उपलब्ध छे।
नंदा बड़ाजी म यी ग्रंथ छा अर दिखे जा तो प्रत्येक बहुगुणा क डेर जयराम ददा क लिख्युं एक ना एक ग्रंथ आज भी मिल जालो।
एक ग्रंथ मैं तैं मील छौ तो मीन तै ग्रंथ को प्रचार बि कार छौ।
मीन स्वर्गीय पद्मा ड्डत जी से प्रार्थना भी कौर छे कि मि तैं जयराम ददा जी क लिखीं टीका क प्रतिरूप दे दे। भाई रूप चंद्र जखमोला तैं २००० रुपया बी पद्मा को समिण दे छौ पर नकल नि मील। मेरी सभी बहुगुनाओं विशेषकर गुना नंद से प्रार्थना च कि यूँ टीकाओं क डिजिटलाइजेशन करावो। यी टीका महत्वपूर्ण धरोहर छन।
जयराम ददा को सदा ही नाम स्मरणीय रालो जो बहुगुणा वंश का ‘गणेश ‘ छा।
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