रंत रैबार ब्यूरो
देहरादून। कलश का संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल अर कलश कुटुंबदरिन एक बड़ी काव्य गोष्ठी आयोजित करेगि। जैमा प्रबुद्ध साहित्यकारोन अपणि प्रस्तुति दिनी। ई काव्य गोष्ठी संचालन गिरीश सुन्दरियाल न करि।
मुख्य अतिथियूँ मा कुलानन्द घनशाला , मदन मोहन डुकराल, डॉ. गीता नौटियाल, दयाल सिंह राणा, रमाकांत बेंजवाल छया। गोष्ठी सुरुवात कृष्णवी सकलानिन नरेन्द्र सिंह नेगी का गीत से करि। वेका बाद कवितों की लंगत्यार अर वयार मा सब्बि लिख्वार एक हैके सृजनता का कायल हुयाँ। जैमा गीत, गजल, व्यंग, दोहा छंद, छिटगा, हाईकु आदि सब्बि काव्य विधा मा कवियूँन अपणी प्रस्तुति दिनी ।
कवियूँ मा योगेन्द्र सकलानी, शिवदयाल शिलाज, कवियित्री नेहा सिलवाल, हरीश बडोनी, अनिल सिंह नेगी, श्रीमती रक्षा बौड़ाई, शांति प्रकाश जिज्ञासु, श्रीमती आशा भट्ट, श्रीमती आशा नेगी पंवार, धर्मेन्द्र नेगी, श्रीमती कान्ता डंगवाल घिल्डियाल, डॉ. नीता कुकरेती, सुनील डंगवाल, सुशील चन्द्रा, श्रीमती सिद्धि डोभाल, अनुज पुरोहित, आनंद अनन्ता, जगदम्बा चमोला न त गढ़ गौरव गाथा गै समा बांधी। वेका बाद श्रीमती रेखा पुरोहित, अरविन्द प्रकृति प्रेमी, श्रीमती मुन्नी रावत, जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू , अर्चना गौड़, देवेश जोशी, डॉ ओम बधानी, डॉ. सत्यानंद बडोनी, नीरज पुरोहित, मोहन वशिष्ठ, बेलीराम कंसवाल, डॉ. ञ्चशैलेन्द्र मैठाणी, बलबीर राना अडिग ओमप्रकाश सेमवाल, गिरीश सुन्दरियाल, बीना बेंजवाल, डॉ गीता नौटियाल न अपणी प्रस्तुति दिनी। यांका अलौ दयाल सिंह राणा जिन ‘कलश’ संस्था का गढ़वाळि साहित्य मा योगदान पर प्रकाश डाळि। अध्यक्षीय कविता मदन मोहन डुकलाण न छ पढ़ी। आखिर मा रमाकान्त बेंजवाल न सब्बि कवियूँ आभार ज्ञापित करि।
