रंत रैबार ब्यूरो…..
नई दिल्ली। वरिष्ठ साहित्यकार श्री ललित केशवान जी हैं गढ़भारती साहित्य सम्मान -2026 प्रदान करेंगे। दगड़ि रंगकर्मी कुसुम चौहान हैं ललित मोहन थपलियाल रंगमंच सम्मान दिऐगे। सम्मानित विभूतियों हैं अंग वस्त्र, प्रशस्ति पत्र व नगद धनराशि बि प्रदान करेगे। गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान अर गभारती व उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली का संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखण्ड सदन चाणक्य पुरी, नई दिल्ली म आयोजित समारोह म यु सम्मान प्रदान करेंगे।
ये मौका परें वरिष्ठ साहित्यकार रमेश चन्द्र घिल्डियाल सरस का गढ़वाली उपन्यास तेरो मेरो साथ छयो पैलु जनम मां कु लोकार्पण वि है। अर भाषा साहित्य पर्ने वि चर्चा है। वरिष्ठ साहित्यकार श्री ललित केशवान जी पिछला है दशक से बि विण्ड्या समय विटिन साहित्य सूजन कना छन। आपल हिन्दी, गढ़वाली म कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी व बाल साहित्य म वि हर बिधा म साहित्य सृजन कैरि। मतलब हर विधा केशवान जी कु अद्वितीय काम छ। हास्य कविता व गंभीर चिंतन बि आपकी रचनात्मकता कि खास पछ्याण च।
वखी कुसुम चौहान वि सफल रंगकर्मी कुछ गढ़वाली फिल्मों म वि आपन भूमिका छन व हिन्दी म आपको किताब छपों छन। कैरि।
वरिष्ठ साहित्यकार रमेश चन्द्र घिल्डियाल गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान का अध्यक्ष संरस ला बोलि कि प्रतिष्ठान लगातार भाषाई सरोकारों पर काम करणों। व पुस्तक प्रकाशन का क्षेत्र म बि काम करणों। अवरि तलक लगभग डेढ़ दर्जन पुस्तकों कु प्रकाशन गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान द्वारा करेंगे।
दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी ल बोलि उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच व गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान लगातार कि उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच आठवीं अनुसूची में शामिल कना खातिर गढ़वाली कुमाऊनी भाषाओं तै संविधानै भाषाई सरोकारों पर काम कना छन। लगातार जतन हुणा छन। वॉल बोलि कि हम नै पीढ़ी हैं गढ़वाळि कुमाऊनी जौनसारी भाषा शिक्षण कक्षाओं का संचालन का माध्यम से भाषा सिखाणा छौ। हमरु लक्ष्य छ कि हमरा लोग अपणा घरों म अपणि दुधभाषा म बात करें। ये आयोजन म
शिक्षा, साहित्य, रंगमंच, पत्रकारिता व समाजसेवा से जुड्यां मनीषी उपस्थित छाया।
आयोजन व उपन्यास का बारम वक्ताओं ला अपर्णा विचार प्रस्तुत करी जौं म मुख्य वक्ताओं म दिल्ली विश्वविद्यालय म (ड्ढा) दिल्ली विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन का अध्यक्ष प्रोफेसर वीरेन्द्र सिंह नेगी, प्रोफेसर हरेन्द्र असवाल, फिल्म निर्देशक सुर्याला रावत, लक्ष्मी रावत, अणुव्रत अनुसंधान केंद्र का निर्देशक योगाचार्य रमेश कांडपाल, हेम पंत, डॉ सतीश कालेश्वरी, बरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी, प्रोफेसर प्रदीप घिल्डियाल सरस, दिनेश ध्यानी समेत कै रावत, दर्शन सिंह रावत, रमेश चन्द्र वेदवाल, बरिष्ठ साहित्यकार जयपाल सिंह बोलि कि बरिष्ठ साहित्यकार रमेश चन्द्र लोगों ला अपरा विचार रखीं। सब्यों ला लोकार्पित उपन्यास का बाराम सब विद्वान आसानी से समझ म औण वलु च। घिल्डियाल सरस को साहित्य पठनीय व लोगों का अपरा-अपरा मत छाया। पर सब्यों ला बोलि की दिल्ली जना महानगर म रैणा का बाद बि हमरा सहित्यकार लगातार काम कना छन या बड़ी बात च। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली संयोजक दिनेश ध्यानी ल बोलि कि
आठवीं अनुसूची में शामिल हुग चैद। ये बावत हम सबुर्ते प्रयास करण चंदन। प्रोफेसर वी एस नेगी व प्रोफेसर हरेंद असवाल ने बोलि कि हम ध्यानी जी की बाती समर्थन करदी। गढ़वाली कुमाऊनी भाषाओं हैं संविधानै आठयों अनुसूची म शामिल हुण चंद।
पत्रकार विद्वान व बरिष्ठ समाजसेवी ये मौका पर्ने के प्रबुद्ध साहित्यकार, उपस्थिति छायाम प्रमुख भाष्करानंद कुकरेती, जोहन वेदवाल, सुनील नेगी, राजेन्द्र चौहान, अजय सिंह बिष्ट, कुसुम बन्दूणी, जगमोहन सिंह रावत जगमोरा, सिंह कैंतुरा, इंदिरा प्रसाद उनियाल, उमेश बिष्ट, भगवती प्रसाद जुयाल गड़देशी, जबर रीना रतूड़ों, शशि बडोला, पंकज केशवान, निर्मला नेगी, प्रीति रमोला, अंजू भण्डारी, प्रबोध डोभाल, रवींद्र गुडियाल, राजभाषा घिल्डियाल, मनोज कुमार, राकेश बहुगुणा, वीरेंद्र जुयाल उपरी, संदीप गढ़वाली, राजेन्द्र अधिकारी डा. मोहन चंद बहुगुणा, कैलाश चंद्र घिल्डियाल, जीवन सिंह बिष्ट, प्रबोध डोभाल, मायाराम बहुगुणा समेत कै लोग उपस्थित छाया। कार्यक्रम कु संचालन उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली का संयोजक दिनेश ध्यानी ल कैरि।
