रंत रैबार ब्यौरो…….
देहरादून। उत्तराखंडा पहाड़ी इलाकों मा बुरांसा अर फ्यूली का फलों कु टैम सि पैलि खिलण एक पर्यावरणीय समस्या बतै जाणी छ।
वनस्पति वैज्ञानिकों कु बुन्न छ कि मौसम परिवर्तन अर ग्लोबल वार्मिंगा का कारण यू सब हुंणू छ। यांने प्राकृतिक चक्र मा असामान्य बदलाव दिखेणा छन। एक तर्फ यूं फूलां कु खिलण लोगु का वास्ता खुशी की बात छ, त वनस्पति वैज्ञानिकों अर पर्यावरणविदों का वास्ता यूं चिंता कु विषय छ। किलैकि यु पर्यावरणीय असंतुलन कु संकेत हे सकदु च।
बुरांसा अर फ्यूली का फूल आमतौर परे गर्मी का मौसम मा खिलदन पर कुछ सालों बटि यु बदलाव दिखेणु छ कि इ
फूल जनवरी मैना मी ही खिलण लग गेन।
जलवायु परिवर्तन अर ग्लोबल वार्मिंग का चलदा पहाड़ी क्षेत्रों मा मौसम बदलणा कारण ई बार बर्फबारी मा बी कमी दिखेगणों मिलि अर ये साल ठंड बी कम
महसूस ह्वे। या स्थिति वैज्ञानिकों अर पर्यावरणविदों का वास्ता चिंता कु विषय बणीं छ।
ठंडियूं मा भारी बर्फबारी हूंदी छै, अब यांमा बी कमी ऐगि। बर्फबारी कम होण सिर्फ पर्यावरणीय संतुलन तै प्रभावित
नि कन्नू छ, बल्कि क्षेत्रों जलवायु, कृषि अर जल स्त्रोतों पर बि यांकू नकारात्मक प्रभाव पुडंणू छ। बर्फबारी सि मिलण वलु पाणी गर्मियों मा जल स्त्रोतों तैं भुरदु छो, जु खेती मा सिंचाई का वास्ता उपयोग हंदू छो। अब ये पाणी की कमी कु असर गर्मियों मा स्थानीय जीवन अर कृषि पर साफ दिखेणु छ।
केदारघाटी का खेत-खलिहानों मा मार्चा मैना मा खिलण वला फ्यूली का फूल जनवरी मैना खिलण से पर्यावरणविद चिंता मा छन।
द्वी दशक पैली बात तरां त चौत्र मांसा आण पर फ्यूंली अर बुरांसा फूल खिलदा छा। फ्यूली का फूल बसंत आगमन अर ऋतु परिवर्तनों द्योतक मणै जांदू छौ अर चौत्र मासा आगमन परे नौनिहालों द्वारा ब्रह्म बेला परे घोरों की देहलियों मा
फ्यूली, बुरांसा दगड़ि दुसरा प्रजाति का फूलों तै डाली बसंत आगमन कु संदेश दीणे परपम्परा युग-युगातरों बटि आज बि जीवित छ।फ्यूली का फूलों की महिमा अर सुन्दरता की महिमा कु गुणगान यखा का कवियों, संगीतकारों, साहित्यकारों अर चित्रकारों न बि फ्योंली का फूलै महिमा हैं लोगों तक पहुंचाण मा अहम योगदान दियूं छ। फ्यूंली उत्तराखंड मा अपणा आप उगण वलु एक जंगली फूल छ। यु उत्तराखण्ड हिमालयी क्षेत्रों मा उगदु। फ्यूली का फूल तैं यलो फ्लैक्स अर गोल्डन गर्ल का नौ सि वि जणै जांदू। फ्यूली का फूलों वैज्ञानिक नाम ‘रेनवार्डिया इंडिका’ छ। उत्तराखण्ड मा यू फूल करीब 1800 मीटरे ऊंचाई पर खिलदु छ। खास बात या छ कि ये सुन्दर पीला फूल पर क्वी खुशबु नि हूंदी।
