रंत रैबार ब्यौरो….
कला-कौशल का विकास मा समर्पण अर एकाग्रता भौत बड़ी भूमिका अदा कर्दन। आज कि तनाव भरीं दिनचर्या मा मानसिक शांति अर एकाग्रता का अभाव का चल्द निराशा अर असफलता द्यखणो मिल्नी छन। यिनी स्थिति मा जबकि मनखि तैं जीवन को अर छोर समझना नि औंदो तब महान ग्रंथ श्रीमद्भागवात गीता ज्ञान भौत मददगार साबित ह्वे सकद। गीता जैंको मूल संदेश मनखि तैं कर्म कि तर्फ उन्मुख कनु छ। वो पाठक कि एकाग्रता अर निराशा तैं सकारात्मक सोच से सराबोर कर देंद। गीता सिर्फ क्वी धार्मिक ग्रंथ नी छ। वो त मनख्यों तैं कर्म कि तर्फ उन्मुख कर्द। कर्म बि वो कि जैमा फल हाशिया मा रख्यूं रै जांद। निराशा अर हताशा पर सीधा प्रहार कना वळा गीता ज्ञान को अनुसरण कैरी क्वी मनखि अपणि कार्य कुशलता अर गंभीर कार्य प्रणाली पर अग्रसर हे सकद। निथर कथगा बि क्वी दक्ष य पारंगत किलै नि हो वेकि मानसिक स्थिरता पर सवाल उठणा रैंदन। ये मंत्र तैं अजकाल बहुराष्ट्रीय कम्पनी अपण स्टॉफ तैं समझौणै कोशिश कनी छन। वू खुण गीता ज्ञान प्रबंधकीय कौशल मंत्र साबित होणा छन। कम्पन्यूं तें मैसूस होण छ कि वृंका कर्मचार्यों मा गीता का श्लोकों का आनुवादिक अध्ययन से नयि ऊर्जा के संचार होणू छ। आमूमन कै बि संस्थान मा सिर्फ 10 फीसद कर्मचारी हि अपणि
पूरी प्रतिभा को इस्तेमाल कर्दन जबकि 70 प्रतिशत लोग सिर्फ खानापूर्ति कैरी कार्य कि इतिश्री कर देंदन। यी बजै छ कि कंपनी कि उत्पादकता को आंकड़ा तैं मानकों से भौत कम होंद।
यीं स्थिति से निबटणौ गीता का समाधान दिन्यूं छ। यो कि जन गीता का पैला अध्याय मा भगवान श्रीकृष्ण शांत भाव से अर्जुन कि समस्या सुणदन अर वेका बाद हि वृंका समाधान को रस्ता बतौंदन। ठीक यीं तरां कम्पनी प्रबंधन तैं अपण स्टाफ कि समस्यों तैं सूणी बूंका समाधान को रास्ता अपनौण चयेणू छ। बूंन गीता का दुसरा अध्याय मा कर्मयोग पर गीता मा दिन्या ज्ञान को उल्लेख सुणै। यो कि गीता मा ल्यख्यूं छ कि कर्मण्येवाधिकार मा फलेषु कदाचन। वास्तव मा यी एक यिनु कर्ममंत्री छ जैको अनुसरण अर जैतै आत्मसात कैरी क्वी बि कार्मिक अपणु सबसे सुंदर कर्म कैरी दिखे सकद। यानि कि क्वी अपण संपूर्ण कर्म तबि कर सकदां जब वेका परिणाम कि तर्फ बढी आंखा बूज दूये। यानि फल निगेटिव (कर्ता) दावा नि कर सकदा कि फल पक्ष मा हि आलो। ये वास्ता जब फल तुमर वश मानी छ। त वैकि चिंता कनि बेकार छ। य स्थिति मनखि तैं कर्म मा वेको सम्पूर्ण समर्पण कन से रोकदी छ। ठीक यीं तरा अगर सम्पूर्ण समर्पण नि रालो त उत्पादकता तैं आंकड़ा का मुताबिक नि हे सकदी। छठा अध्याय मा कृष्ण अर्जुन तें युद्ध का नतीजों से पैदा होण वळा तनाव से मुक्ति को रस्ता बतौंदन। जैमा वून बोलि कि जनि तेरी (कर्ता) मानसिकता होलि वुनि तु कर्म करिल्यु। यी वजै छ कि कम्पनी नुकसान उठौणी छन पर गीता मा यांको सौंगु उयार छ। यो पैलि आचार (आचरण) फिर विचार अर तिसरो प्रचार। कम्पनी गीता ज्ञान का आधार पर अपण कर्मचार्यों मा काम का प्रति अनिच्छा खत्म कना उयार कनी छन। गीता का आधार पर कर्म संस्कृति तयार कैरी क्वी बि मनखि, संगठन य संस्था विकास अर मानकों का उच्च आयाम स्थापित कर सकद। या खुण गीता तैं उच्च शिक्षा का पाठ्यक्रम मा एक वैकल्पिक विषै रखे जाण चैंद ताकि कौशल विकास मा मदद मिल सकु।
