रंत रैबार ब्यौरो….
रतनसिंह किरमोलिया गरुड़ (बागेश्वर)
हमरि दुदबोलि चाहे उ गढ़वाली हओ या फिरि कुमाउनी। यों ई हमरि पछ्याण छन और हमरि संस्कृक्ति लै। इनरै फांकों में भेटि बेर हमरि संस्कृक्ति हमार लोकाक पराणों में बाँ लगूनै हैं और लोक कैं तराण चैं पराण हीं अधिल बढ़ण हूं। ताकी लोक में भाषा कि बदौलत हमरि संस्कृक्ति और उमें यर्याई मेसी संस्कार हमेश ज्योंन रौल कै।
हमर उत्तराखंड में द्वि मंडल छन। 1. गढ़वाल और कुमाऊं। गढ़वाल में बुलाई – जाणी बोलि भाष गढ़वाली और कुमाऊं में कुमाउनी कई जैं। इनार लै आपण क्षेत्रा क – अनुसार कएक उप बोली छन। करीब तेर – कुमाउनी क और यसै करीब गढ़वाली क। कै लै रौ कोस कोस पर बदले पानी और चार कोस पर बानी..!
सुणण में उणै कि हमार कुछ विद्वान उत्तराखंडी भाषा कि बात करणई। य बात कुछ अटपट लै लागणै और अचंभित करणी लै। सोचणै कि बात य छु कि जब कुमाउनी और गढ़वाली भाषा कै आजि तॉलै सर्वग्राह्य मानक रूप तै नि है पाणय तो पुर उत्तराखंड यानी कुमाऊं और गढ़वाल में बुलाई जाणी बोलियों क सर्वग्राह्य मानक रूप तै हुण में कदुक लंब टैम लागल..?? कल्पना करी जै सकीं। यास विद्वान जनों क मेधा कि बलै ल्हिण है जो…??
हमरि दुदबोलि कि भाषाओं क मानक
रूप तै हुण बैंक लिजी भौत जरूड़ी छु ताकि इनर एक सशक्त इस्कूली पाठ्यक्रम बणि सको और इनु कै संविधान कि अनूं अनुसूची में शामिल करण आसान है सको। किलै की इस्कूली पाठ्यक्रम बणूण और संविधान कि अई अनुसूची में शामिल करण कि लिजी इनर मानक रूप तै हुण जरूड़ी छु। य बात कैं समजण पड़ल। और मिलि भैटि बेर बिचार मंथन करण क बाद उत्तराखंड सरकार पारि दबाव बणूण लै भौत जरूड़ी छु। नतर सरकार आपण आप ये काम करणी न्हेँत। करणी हुनी आज पच्चीस साल बिति गई.. ?? सोचण कि बात छु। भाषा के मामुल में कभैं कुमार विधायको ल ?? ना हमार लेखक साहित्यकारों ल कभैं सरकार कैं लेखि बेर दे..? नां कर्भे क्वे शिष्टमंडलै सरकार दगै मिलौ.. ?? तब कसिक हुल काम। बिन रोइयें मयड़ि लै आपण भौ कैं दूद नि दिनि कूनी । इदुक भाषा सम्मेलन हुणई हर साल। खालि दावभात खवै है रै। य मामुल गाड़ लै तरी जांठि लै खेड़ि… ? उसै किस्स है रौ हमार य भाषा सम्मेलनों क। खालि खाण पिणाक में एक किस्स याद उणौ धंद बणनै जाणई यों भाषा सम्मेलन…. ?? हमार गढ़वाली और कुमाउनी में छपणी भौत पत्र-पत्रिका छन। इनु सबों ल आपणि
आपणि बाटों य मुद्द कैं उतूण च। चिंतन मंथन लै करण चैं। मुख्यमंत्री और भाषा मंत्री दगै मिलि बेर य संबंध में ज्ञापन दिण चैं। जवरदस्त दबाव बणूण पड़ल तिथै के बाट मिलण कि आस उमेद करी जै सकीं। नै त वी किस्स है जाल…. काव कड़कड़ानै
रौंछ और पिन सुकनै रौंछ. ??
