रंत रैबार ब्यौरो….
उत्तराखण्ड मा पर्यटन उद्योग तैं बढ़ावा देणा लिहाज से होम स्टे योजना एक अभिनव प्रयोग छ। यांक माध्यम सि पर्यटकों तैं स्थानीय जनता जख घोर जनु वातावरण उपलब्ध करोंदन वखि होटल, रेस्तरां, धर्मशालों अर सरकारी अतिथि गृहों मा होण वलि हौचपौच सि सैलानी दूर रैंदन। यिथगै न वूतें होम स्टे का माध्यम सि स्थानीय संस्कृति को परिचे मिल्द ।
होम स्टे योजना जख आम सैलान्यूं का मन माफिक साबित होणी छ वखि देश विदेश का पर्यटक अर बहुराष्ट्रीय कम्पन्यू मा काम कन वळा लोग याते जादा पसंद कना छन। यांको सबसे जादा फैदा यो छ कि यूं स्टेशनों मा रैकि वो लोग प्रकृति का सौंदर्य अर बदल्दा वातावरण मा कुदरत कि पल पल करवट ल्हेंदी छटा से वो अभिभूति मैसूस कर्दन। यानि वो प्रकृति का जादा नजीक होंदन। यांसे वो स्थानीय जीवन प्रणाली से परिचित होंदन। य उपलब्धि वृंका वास्ता जीवन भर कि धरोहर बणी रै जांद। ये बीच वो वर्क फ्रॉम होम का तहत विभागीय काम बि शांति से निपटै सकदन ।
सूत्रों का मुताबिक यीं योजना तैं स्थानीय लोगु मा खूब लोकप्रियता मिल्नी छ। यीं बात सिं इन्कार नि करे जै सकदो कि पर्यटन विधा का मामला मा उत्तराखण्ड भाग्यशाली प्रदेश छ। अगर पर्यटन उद्योग तैं हि विशेष प्राथमिता दिये जाव त वो प्रदेश कि आर्थिकी विकास को महत्वपूर्ण जरिया ह्वे सकद। किलैकि उत्तराखण्ड मा हर साल तकरीबन तीन से साढ़ तीन करोड़ पर्यटक अर तीर्थयात्री औदन। साफ सि बात छ कि अगर चूंकि सुविधों पर फोकस करे जाव त यो आंकड़ा दुगुणा ह्वे सकद। यांक वास्ता जरूरी छ कि होम स्टे जनि योजना तें विस्तार दिये जाव ।
सरकार कि य कोशिश सराहनीय छ पर यांका प्रचार प्रसार अर योजना तैं -आम लोग तक ल्हेकि जाणं पर विशेष ध्यान दिये जाव। सैलान्यूं तैं मूलभूत सुविध उपलब्ध करै जावन जन के इंटरनेट कि निर्वाधित सेवा जो कि वख टैरयां सैलान्यू तैं विभागीय अर संस्था का काम कन बाधा नि आव। बात यखि मा खत्म नि होंदी साहसिक पर्यटन है ल्हेकि बि सरकार उत्साहित लगणी छा यांको उदाहरण पौड़ी जनपद का सतपुला मा नयार नदी तैं यांक वास्ता इस्तमाल कनै योजना परवान चढनी छ। भविष्य मा बि पूर्वी नयार घाटी मा झील निर्माण कि बात चल्नी छ। योजना छ कि झील को इस्तमाल नौकायन जना खेलों मा करे जालो। सरकार हाल मा उत्तराखण्ड कि सीमा. का अंतर्गत औण वलि हिमालै कि 42 नयी चोटियों का आरोहण तैं मंजूरी दिनीं छ। याक अलावा कैलास मानसरोवर अर चारधाम यात्रामार्ग पर पुराणा पड़ावों का सौंदर्याकरण कि दिशा मा बि काम चल्नू छ।
पर्यटन नीति का तहत अब सैलानी भारत-चीन सीमा लग्यां नेलांग अर जांदगा गौं कि सैर कना दौरान होम स्टे को आनंद ल्हे सकला। यिं द्विय गौं अवि तक उपेक्षा का शिकार रैनि पर अब वूतें फिर सि आवाद कनै कोशिश चल्नी छ। यि गौं पलायन दश का कारण भुत्या ह्वे ग्ये छौ । उत्तरकाशी बटी नेलंग 15 अर जादुंग 30 किलोमीटर कि दूरी पर छ। अजकाल यू गों मा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस कि चौकी स्थापित छन।
बतौंद चल्दी कि वर्ष 1962 मा भारत चीन युद्ध से पैलि नेलांग गौं मा 40 अर जादुग मा 30 मवासा रेंदा छा । वृंको व्यवसाय खेती अर बखरा- द्यबरो को पालन कनु छौ। पर लडै का बाद यि द्विय गौं खाली करै दिये ग्येनि। तब यू लोगुन अपण रिश्तादारों का यख डुण्डा अर बगोरी मा शरण लिनी। बतै जांद कि अब यूं गौं तैं आबाद कनौ सरकार योजना बणौणी छ। कोशिश छ कि यि द्विय गौ आदर्श ग्राम का रूप मा विकसित करे जावन । यख त पर्यटकों तैं आकर्षित कनौ सरकार होम स्टे योजना पर गंभीरता से विचार कनी छ। यांसे यखा लोग्वी आर्थिक स्थति मा सुधार त आलो ही वखी सैलान्यूं तैं भारत चीन सीमा पर स्थित क्षेत्र कि सुंदरता का दर्शन बि होला। दरसल होम स्टे योजना शुरू काल मा जादा खर्च नि औंदो, थोड़ा सि अपण घरों क लीपापोती करै कि बख बिजली अर शौचालै आदि कि सुविधा उपलब्ध करै जाव त सैलान्यूं खुण ठैरणो साधन तयार ह्वे जांद। फिर ये मामला मा सरकार आर्थिक सहायता बि देणी छ। पर सवसे पैलि पर्यटन विभाग मा होम स्टे शुरू कन इच्छुक लोग तैं पंजीकरण करौण पड़लो। यांके आधार पर सरकार होम स्टे का वास्ता जरूरी संसाधन जटौणो आर्थक सहायता मुहैया करौंद । आशा छ कि जल्द हि य योजना प्रदेश कि आर्थिकी सुधार मा महत्वपूर्ण भूमिका अदा करलि।
